संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की गई हैं। वहीं उन्हें कानूनी अधिकारों की जानकारी देकर जागरूक भी किया जा रहा है लेकिन आज भी महिलाएं उम्मीद के अनुसार सशक्त नहीं हो पाई है। यहां तक कि वे अपने अधिकारों का सही प्रयोग भी नहीं कर पा रही है। इस संबंध में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में वीरवार को विश्व चिंतन दिवस पर अपराजिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।जिसमें कई वक्ताओें ने महिला सशक्तीकरण पर अपने विचार रखे।
इस अवसर पर सहायक प्रो. डॉ. आशु धवन ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की और वर्तमान समाज में महिलाओं की भूमिका पर विचार साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक भी किया। इस दौरान रितिका, वाटिका, विपिन, हर्ष, रमनदीप, सीवांश, अंकित, प्रीति समेत अन्य विद्यार्थियों ने कविता, भाषण और हरियाणवी रागनी के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का महत्व बताया।
महिलाओं का सम्मान करना हमारा मौलिक कर्तव्य : प्रो. रोहतास
विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. रोहतास वर्मा ने कहा कि हम सभी का भी मौलिक दायित्व बनता है कि महिलाओं का हर स्तर पर सम्मान करे और उन्हें शिक्षा ग्रहण करने का मौका देकर समाज को सशक्त बनाएं। उन्होंने कहा कि देश की आबादी में 48 प्रतिशत महिलाएं है लेकिन 16 प्रतिशत महिलाएं ही अलग-अलग क्षेत्र में कार्यरत है। महिलाओं को शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक करना बहुत जरूरी है।
महिला सशक्तिकरण सतत विकास के लिए आवश्यक : डॉ. आशु
सहायक प्रो. डॉ. आशु धवन का कहना है कि महिला सशक्तीकरण सतत विकास के लिए आवश्यक परिवर्तनकारी आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तनों की उपलब्धि में एक उत्प्रेरक भूमिका निभाता है। विकास को गति देने के लिए लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ाना जरूरी है। यह व्यक्तिगत महिलाओं को उनके पूर्ण मानवाधिकारों का आनंद लेने की अनुमति देता है और अधिक स्थिर अर्थव्यवस्थाओं और मजबूत समाज की ओर ले जाता है।
सशक्त बनने के लिए खुद शुरू लड़नी होगी लड़ाई : प्रो. जोशी
प्रो. डॉ. हरदीप लाल जोशी ने कहा कि पुरुष और महिलाएं दोनों को एक दूसरे की भावनाओं को समझना चाहिए ताकि वे अपनी इच्छा खुलकर व्यक्त कर सके। वर्तमान समय में महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति सशक्त होना होगा और अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी। सशक्त महिलाओं को अपने आसपास रहने वाली महिलाओं को भी जागरूक करना होगा। जब एक परिवार सशक्त होगा तो पूरा समाज सशक्त होगा।
शिक्षा और अधिकारों के लिए महिलाओं को करें जागरूक : डॉ. राज रत्न
सहायक प्रो. डॉ. राज रत्न ने कहा कि जहां नारी की पूजा होती है वहीं भगवान का निवास होता है। हमारी संस्कृति में देवताओं से पहले देवी का पूजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग के दौर में महिलाएं सशक्त हुई है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी ड्रॉप आउट की दर बढ़ती जा रही है, जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि उच्च शिक्षा तक कुछ महिलाएं ही पहुंच पाती है। शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए उन्हें जागरूक करने की आवश्यकता है।
दैनिक जीवन में भी बदलाव लाने की जरूरत
छात्रा रिया ने कहा कि सशक्त और आधुनिक समाज में कानूनी तौर पर तो महिलाओं को अधिकार प्राप्त हो चुके हैं, लेकिन दैनिक जीवन में भी बदलाव लाने की जरूरत है। वर्तमान में भी महिलाएं अपने मन की इच्छा अभिव्यक्त नहीं कर पाती और कहीं न कहीं उनकी आवाज को दबा दिया जाता है। इसके लिए अभी भी महिलाओं को जागरूक करने की आवश्यकता है।
महिलाओं का आत्मनिर्भर होना जरूरी
छात्रा नेहा ने कहा कि आज के समय में कई लड़कियां ऐसी है जिनकी बाल्यावस्था में शादी कर दी जाती है। जिससे उनकी शिक्षा भी बीच में ही छूट जाती है और उनका मानसिक तौर पर भी विकास नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि एक महिला का आत्मनिर्भर होना बहुत जरूरी है और आत्मनिर्भरता के लिए शिक्षा की अहम भूमिका है। इसके लिए समाज को अपनी सोच बदलकर महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना होगा।
हर क्षेत्र में महिलाओं को भी मिले सम्मान
छात्रा बंटी ने बताया कि केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण को लेकर योजनाएं बनाई गई है और महिलाएं भी आज राजनीति, आईटी सहित प्रत्येक क्षेत्र में अपनी भूमिका निभा रही है, लेकिन अनेकों क्षेत्रों में आज भी महिला को वह सम्मान नहीं दिया जाता जो देना चाहिए। तलाक के बढ़ते मामलों के चलते महिलाएं अपने बच्चों का तो पालन- पोषण कर लेती है, लेकिन तनाव का शिकार होती जा रही है।
रागिनी से दिया बेटी को शिक्षित बनाने का संदेश
छात्रा नैना ने कहा कि महिला को शिक्षा का अधिकार दिया जाए, ताकि वह शिक्षा के माध्यम से सशक्त समाज का सृजन कर सके। उन्होंने रागिणी के माध्यम से बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया। कहा कि जब एक महिला शिक्षित होगी तो वह दो घरों में अपनी भूमिका बखूबी निभाकर समाज को शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है।