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Kurukshetra News: आस्था, संस्कृति और इतिहास का अद्भुत संगम माना जाता है चैत्र चौदस मेला

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पिहोवा। सरस्वती तीर्थ, जहां 16 मार्च से शुरू होगा चैत्र चौदस मेला संवाद - फोटो : Samvad
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पिहोवा। सरस्वती तीर्थ पर प्रत्येक वर्ष चैत्र मास की चौदस के अवसर पर आयोजित होने वाला पारंपरिक मेला आस्था, संस्कृति और इतिहास का अद्भुत संगम माना जाता है। इस प्राचीन मेले का धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व दूर-दूर तक प्रसिद्ध है जिसके कारण हरियाणा ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों व विदेशों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पिहोवा को प्राचीन काल में पृथुदक के नाम से जाना जाता था। यह स्थान पवित्र सरस्वती नदी के तट पर स्थित होने के कारण अत्यंत पवित्र माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि यहां स्नान, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों को शांति मिलती है और मनुष्य के पापों का नाश होता है। इसी आस्था के कारण चैत्र चौदस के दिन यहां विशेष स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है।
इतिहासकारों के अनुसार, पिहोवा का उल्लेख प्राचीन शिलालेखों और ऐतिहासिक ग्रंथों में भी मिलता है, जो इस क्षेत्र की प्राचीनता और धार्मिक महत्व को दर्शाता है। माना जाता है कि चैत्र चौदस के अवसर पर यहां स्नान करने और सरस्वती तीर्थ के दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी कारण इस दिन हजारों श्रद्धालु तीर्थ पर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और अपने पूर्वजों की स्मृति में तर्पण करते हैं।
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धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन, कथा-प्रवचन व सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं : चक्रपाणी
नपा अध्यक्ष आशीष चक्रपाणी ने कहा कि मेले के दौरान सरस्वती तीर्थ परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ भजन-कीर्तन, कथा-प्रवचन और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। इसके अलावा मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें, पारंपरिक हस्तशिल्प, खिलौने और खान-पान की वस्तुएं भी आकर्षण का केंद्र रहती हैं जिससे स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों को भी लाभ मिलता है। इस बार मेला 16 से 19 मार्च तक होगा जिसके लिए तैयारियां की जा रही हैं।
सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र रहा मेला : विनोद पांचौली
तीर्थ पुरोहित विनोद पांचौली ने कहा कि चैत्र चौदस मेला केवल धार्मिक आस्था का ही प्रतीक नहीं है बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक एकता को भी मजबूत करता है। यह मेला सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र रहा है और आज भी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। पिहोवा का सरस्वती तीर्थ पर लगने वाला चैत्र चौदस मेला क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी समृद्ध परंपरा से जोड़ने का कार्य कर रहा है।

पिहोवा। सरस्वती तीर्थ, जहां 16 मार्च से शुरू होगा चैत्र चौदस मेला संवाद- फोटो : Samvad

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