टीम अस्पताल के हालात देख हैरान रह गई। उसने कॉलेज एवं अस्पताल का रिकॉर्ड भी खंगाला। टीम के आने से कॉलेज प्रशासन के भी दिन भर पसीने छूटे। टीम में राजकीय महिला आयुर्वेदिक कॉलेज चेन्नई के प्रो. डॉ. सनतिल नांदन और लखनऊ स्थित राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के प्रो. पीसी चौधरी शामिल थे। यह टीम सुबह ही कालेज पहुंच गई। इसका निरीक्षण देर रात तक जारी था। टीम ने कॉलेज के छात्र, अध्यापकों के साथ ही अन्य संसाधनों के बारे में जानकारी एकत्रित की। कालेज में चल रहे बीएएमएस कोर्स के संसाधन भी जांचे।
खामियों का खुलासा नहीं, सौंपेंगे रिपोर्ट निरीक्षण टीम में शामिल सदस्यों ने बताया कि पूरे रिकॉर्ड सहित कॉलेज व अस्पताल की बारीकी से जांच की है। जांच के दौरान कई खामियां मिली हैं। वह इन खामियों का खुलासा नहीं कर सकते, लेकिन परिषद को इन खामियों के साथ पूरी जांच रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। किसी भी प्रकार की खामी को दबाने नहीं दिया जाएगा। अगला कदम परिषद को ही उठाना है।मान्यता के लिए किया निरीक्षणबताया जा रहा है कि सीसीआईएम हर मेडिकल कोर्स करवा रहे सभी कॉलेजों का निरीक्षण हर वर्ष कराती है। इसके बाद ही कोर्स के लिए अनुमति प्रदान की जाती है। हालांकि, पहले यह निरीक्षण पांच वर्षों के उपरांत कराया जाता था। लेकिन, कई वर्षों से हर वर्ष निरीक्षण होने लगा है। इसमें कोर्स करवाए जाने के लिए आवश्यक पूरी व्यवस्था उपलब्ध होने की जांच की जाती है।
एएमओ को भी बना दिया शिक्षकटीम आने की भनक लगते ही कॉलेज प्रशासन में खलबली मच गया। बताया जा रहा है कि जिले और आसपास जिलों में तैनात आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर को कालेज में शिक्षक दिखाते हुए निरीक्षण टीम के समक्ष पेश कर दिया। हालांकि इसकी कालेज प्रशासन ने पुष्टी नहीं की, लेकिन बताया जा रहा है कि आनन-फानन में इन अधिकारियों को रिकॉर्ड में शिक्षक के तौर पर ज्वाइन भी करवा दिया गया।
टीम ने जताई संतुष्टी : डॉ उषा दत्तकालेज की कार्यवाहक प्राचार्या डॉ. उषा दत्त का कहना है कि सीसीआईएम की टीम ने हर वर्ष की भांति इस बार भी निरीक्षण किया है। निरीक्षण के दौरान यहां की व्यवस्थाओं के प्रति काफी संतुष्ट नजर आई। टीम ने पूरी बारीकी से जांच की है। टीम के सदस्यों ने अध्यापकों के साथ साथ कॉलेज के छात्रों से भी बातचीत की है।