कुरुक्षेत्र। एलएनजेपी नागरिक अस्पताल में डॉ. शैलेंद्र शैली ने पहले नाबालिग को बिना जांच किए ही पेट में पथरी बता दी और फिर चैकअप के बहाने से लेटा दिया। दो और मरीजों को देखा, जिनके बाहर जाने के बाद तीन उसका यौन शोषण किया। इसके बाद बाथरूम में बाल पकड़कर कहा कि किसी को बताना मत।
दर्द से कराहते हुए पीड़िता ने डॉक्टर की ओपीडी पर तैनात पुरुष कर्मी को संकेत किया लेकिन वह अनदेखी कर चला गया। इसके बाद एक मरीज को बताया तो उसने किसी डॉक्टर आदि को बताने का प्रयास किया लेकिन कुछ नहीं हुआ, जिसके बाद खून अधिक बहने लगा और हालत ज्यादा खराब हुई तो मामला खुला।
पीड़िता ने यह खुलासा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया के समक्ष उस समय किया जब वे रविवार को अस्पताल पहुंची। चेयरपर्सन ने पहले अधिकारियों, स्टाफ नर्सों को फटकार लगाई तो फिर उपचाराधीन पीड़िता के पास जाकर काउंसलिंग की। चेयरपर्सन ने बाद में पत्रकारों के समक्ष पीड़िता के खुलासे का जिक्र करते हुए बताया कि वह अभी भी सदमे है। उसने बताया है कि खून का बहाव कुछ कम हुआ है लेकिन बेड से नीचे उतरते ही चक्कर आने लगते हैं।
पीड़िता ने बताया कि पहले वह 27 अप्रैल को दादी के साथ पेट दर्द के चलते डॉक्टर के पास आई थी। उस समय डॉक्टर ने दादी से छिपाते हुए उसे 100 रुपये दिए और कहा कि तुम्हारी मां नहीं है। तुम कुछ खा लेना। फिर वह परिजनों के बारे में जानकारी लेने लगा। इसके पीछे डॉक्टर की क्या मंशा थी, यह समझा जा सकता है। आठ दिन दाखिल रहने के बाद पीड़िता 29 मई को फिर आई तो डॉक्टर ने बिना जांचे ही कहा कि पेट में पथरी है। जबकि बाद में जांच रिपोर्ट में पथरी मिली ही नहीं।
नर्सों के साथ पीएमओ की भी भारी लापरवाही
चेयरपर्सन ने कहा कि न तीनों में से कोई नर्स पीड़िता के चैकअप के दौरान मौजूद थी और न ही पीएमओ ने इस पर संज्ञान लिया। इसका मतलब है कि डॉक्टर व नर्सों के बीच अंडरस्टैंडिंग है। तीनों नर्सों को सस्पेंड करने के लिए सीएमओ को कहा है तो वहीं पीएमओ पर कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक व एसीएस को आयोग पत्र लिखेगा। स्वास्थ्य मंत्री से भी चर्चा की जाएगी, ताकि मामले की कार्रवाई हो और जेल में डॉक्टर को कोई सहायता न मिल पाए। उसने महापाप किया है। वे खुद जेल जाकर देखेंगी कि कोई विशेष सुविधा तो उसे नहीं दी जा रही।