अदालत के आदेश पर थाना आदर्श केयू के अंतर्गत भिवानी खेड़ा की पूर्व महिला सरपंच व उसके पति के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अनेक धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। गांव के ही एक युवक ने महिला सरपंच और उसके पति के खिलाफ अदालत में 156 (3) के तहत मामला दर्ज करने की गुहार लगाई थी, जिस पर अदालत ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करने की पुलिस को सिफारिश की।
गांव भिवानी खेड़ा के विकास ने अदालत में दायर याचिका में बताया था कि कृष्णा रानी 2016 में गांव भिवानी खेड़ा की सरपंच निर्वाचित हुई थी। सरपंच निर्वाचित होने के बाद उसके पति मुकेश कुमार ने सरपंच की शक्तियों का दुरुपयोग किया। याचिका में बताया गया कि बतौर सरपंच की शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए मुकेश कुमार ने विभिन्न कार्यों से पंचायत को नुकसान पहुंचाने का काम किया। विकास का आरोप था कि आरोपी मुकेश कुमार ने अपने भाई के नाम से जो विदेश में रहता है, एक कंपनी बनाई हुई थी, जिसके माध्यम से वह गांव में बनने वाली गलियों के लिए ब्लाक की सप्लाई करता था।
मुकेश कुमार ने मार्केट रेट से ज्यादा के रेट लगाकर ब्लाकों को बेच कर पंचायत को नुकसान पहुंचाया। आरोप लगाया कि फर्जी बिल तैयार किए गए। जो ब्लाक मार्केट में छह या सात रुपये में उपलब्ध हो जाते थे। विकास ने याचिका में बताया कि उसने पंचायत द्वारा किए गए कार्यों की आरटीआई डीडीपीओ, बीडीपीओ और कई अधिकारियों को लगाई गई, लेकिन उसे सूचना नहीं दी गई। जिसके बाद उसे अदालत की शरण लेनी पड़ी।
हर जांच के लिए तैयार : मुकेश कुमार
पूर्व महिला सरपंच के पति मुकेश कुमार ने विकास द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि उसने ब्लाक लगाने में कोई गड़बड़ नहीं की है। सरकार की हिदायतों के अनुसार तय रेटों के अनुसार ही ब्लाक के रेट लगाए गए हैं। सरकार की हिदायतों के अनुसार जेई व अन्य अधिकारियों द्वारा किए गए कार्यों की एमबी भरने के बाद ही ब्लाक लगाए गए और पंचायती कार्य किए गए हैं। मुकेश ने स्पष्ट किया कि गांव में जो ब्लाक बनाने की फैक्टरी लगाई गई है, वह उसके भाई के नाम पर लगाई गई, जो विदेश में रहता है। मामला अदालत के आदेश पर दर्ज किया गया है, जिसकी अभी जांच होनी है। वे हर जांच के लिए तैयार हैं।
सबूत जुटाकर जांच करेंगे: आईओ
जांच अधिकारी सहायक उपनिरीक्षक नफे सिंह ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ अदालत के आदेश पर मामला दर्ज किया गया है, जिसकी अभी जांच की जानी है। वे जल्द ही इस मामले से संबंधित दस्तावेज सरकारी कार्यालयों से एकत्रित करेंगे। सबूत एकत्रित होने के बाद वे मामले की तफ्तीश करेंगे। जांच के बाद रिपोर्ट को उच्चाधिकारियों को सौंपा जाएगा।