जीटी रोड पर मारकंडेश्वर हॉकी स्टेडियम के सामने फ्लाईओवर पर एक कार व अप्रवासी मजदूरों से भरे थ्री व्हीलर की भिड़ंत हो गई। बताया जाता है कि कार चालक ने टैंपो को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि टेंपो पुल की ग्रील तोड़कर नाले में जा गिरा। दुुर्घटना में दो मजदूरों की मौत हो गई। एक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि दूसरे की इलाज के दौरान मौत हुई। दोनों वाहनों में सवार करीब 17 लोग घायल हुए हैं। जिनमें तीन बच्चे भी शामिल है। गंभीर घायल तीन मजदूरों को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया है। मरने वालों सहित सभी मजदूर बिहार के निवासी बताए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार थ्री व्हीलर चालक सोमप्रकाश अप्रवासी मजदूरों को गांव खानपुर कोलियां से अंबाला छावनी छोड़ने के लिए जा रहा था। सभी मजदूर बिहार के लिए ट्रेन पकड़ने निकले थे। जैसे ही थ्री व्हीलर फ्लाई ओवर पर स्टेडियम के सामने पहुंचा, पीछे से आ रही तेज रफ्तार आल्टो ने थ्री व्हीलर को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि टैंपों पुल की ग्रील को तोड़ कर नीचे नाले में जा गिरा। मौके पर ही बिहार के रहने वाले मजदूर सदूरी की मौत हो गई। जबकि इलाज के दौरान मिथिलेश नाम के युवक की मौत हो गई। दुर्घटना में टैंपों चालक सोमप्रकाश, बिहार के सरसा जिले का निवासी मुन्ना, लच्छो, छोटू, गुन्ना, बेचैन, सोनू, माधुरी, रामसेवक, ललित और उदय घायल हो गए। रामसेवक, ललित और उदय की हालत ज्यादा खराब होने से उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया।
कार सवार भी हुए घायल
टक्कर लगने से कार में सवार लोग भी घायल हुए हैं। कार करनाल से चंडीगढ़ जा रही थी। टक्कर के बाद चालक प्रेम चंद सिंगला, स्नेह लता, रीना, 15 वर्षीय रुचिका, 12 वर्षीय अंशुल और 10 वर्षीय रूबी भी घायल हो गई है। घायल अंशुल ने बताया कि वह करनाल में अपने चाचा की शादी में शामिल होकर वापस चंडीगढ़ लौट रहे थे। अंशुल ने बताया कि उसके पिता बुधवार रात को ही वापस चले गए थे। ऐसे में वह अपने दादा, दादी व मम्मी के साथ गुुरुवार दोपहर 3 बजे करनाल से चले थे। अंशुल ने बताया कि अचानक थ्री व्हीलर कार के आगे आया और कब टक्कर लगी उन्हें पता ही नहीं चला।
मानवता की दी मिसाल
हेल्पर्स सोसायटी जहां लगभग हर दुर्घटना में पीड़ितों की सेवा कर रही है वहीं आज एक दम्पत्ति ने घायलों की सेवा कर मानवता की एक नई मिसाल कायम की। मलेरकोटला निवासी विशाल गोयल व उनकी पत्नी रेखा गोयल दुर्घटना के समय वहीं से गुजर रहे थे तो उन्होंने घायलों की चीखें सुनकर अपने दिल्ली जाने के सफर को वहीं रोक दिया और मौके पर मौजूद लोगों के साथ मिलकर घायलों की सेवा में जुट गए। उन्होंने कार का डेशबोर्ड तोड़ कर बच्चों की दादी स्नेह लता को बाहर निकाला और इसके बाद तीनों बच्चों को संभाला। देर सायं तक गोयल दंपत्ति घायलों और बच्चों की देखभाल करते रहे।