कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी की सड़कें बेसहारा पशुओं का डेरा बनी हुईं हैं। बड़े-बड़े दावे और कई बार प्रयास के बावजूद भी सड़कें पशु मुक्त नहीं हो पाईं। शहर की मुख्य सड़क हो या फिर किसी कॉलोनी व पॉश एरिया सेक्टर की, हर जगह बेसहारा पशुओं के झुंड घूम रहे हैं। यहां तक कि आज भी सड़कों पर 700 से ज्यादा गोवंश हैं। लगातार हादसों के बावजूद यह समस्या कम होने की बजाय गहराती जा रही है।
भले ही नप ने हम फाउंडेशन को सड़कें पशु मुक्त करने का जिम्मा सौंप दिया लेकिन करीब ढाई माह बीत जाने के बाद भी आज तक इस संस्था की ओर से पशुओं को छोड़ने के लिए जगह नहीं दी जा सकी। बताया यह भी जा रहा है कि जो गोवंश पकड़े गए, उनका भी भुगतान नप की ओर से नहीं किया गया और ऐसे में अब करीब एक माह से पशु पकड़े जाने का अभियान ठप पड़ा है।
अब डेढ़ साल की मासूम गोवंश की चपेट में आई
बेसहारा पशुओं की चपेट में अब डेढ़ साल की मासूम आरिका आई है, जो गुरुनानकपुरा मोहल्ला में अपने घर के बाहर खेल रही थी। तभी दो गोवंश दौड़े और इसे अपनी चपेट में लेते हुए निकल गए। यह सब घर के बाहर ही बैठी उसकी मां के सामने कुछ ही पलों में हो गया। बच्ची न केवल घायल हो गई बल्कि वह बुरी तरह से सहम भी गई तो उसकी मां व अन्य परिजन भी सन्न रह गए। तीन माह से भी कम समय में यह तीसरी बड़ी घटना मानी जा रही है।
जहां बुजुर्ग महिला को गोवंश ने मारा, वहीं पर खड़े रहते हैं झुंड
जुलाई में ही धर्मनगरी के पटेल नगर न्यू कॉलोनी में सड़क पर घूम रहे गोवंश ने बुजुर्ग महिला को पटक-पटक कर मौत के घाट उतार दिया था। इस घटना से प्रशासन में हलचल मच गई थी तो आनन-फानन सड़कें पशु मुक्त किए जाने के दावे भी किए गए लेकिन ये दावे आज तक हकीकत नहीं बन सके जबकि बुजुर्ग महिला की मौत के बाद कई और लोग भी गोवंश की चपेट में आ चुके हैं, जिनमें भाजपा नेता फतेहचंद गांधी भी शामिल है। गुरुनानकपुरा मोहल्ला के ही कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से सह कुलसचिव पद से सेवानिवृत्त जगदीश अरोड़ा को एक सांड ने उठाकर पटक दिया था, जिसमें वह घायल हो गया था।
300 गोवंश ही पहुंचाई जा सकीं गोशाला
बुजुर्ग महिला की मौत के बाद मची हलचल के बीच नगर प्रशासन ने वाह फाउंडेशन को सड़कें पशु मुक्त किए जाने का काम सौंपा। इस फर्म ने भी उसी माह 29 जुलाई को ही पशुओं को सड़कों से हटाने का अभियान शुरू कर दिया था। हालांकि 300 से ज्यादा गोवंश विभिन्न गोशालाओं में पहुंचाए गए लेकिन क्षमता पूर्ण होने पर गोशाला संचालकों ने भी हाथ खड़े कर दिए। जगह न मिल पाने के चलते पिछले अभियान भी ठप पड़ा है। फांडेशन की ओर से जसबीर सिंह का कहना है कि जगह न मिलने पर वे गोवंश कहां छोड़े। जब जगह मिल जाएगी तो एक सप्ताह में अभियान का असर दिखाई देने लगेगा।
23 गोशालाओं में नौ हजार गोवंश
जिले भर में 23 गोशालाएं हैं, जिनमें करीब नौ हजार गोवंश है। शहर में ही सात गोशालाएं हैं। पशुपालन विभाग के एसडीओ डॉ. जसबीर सिंह का कहना है कि सभी गोशालाओं में क्षमता अनुसार गोवंश हैं जहां और गोवंश नहीं छोड़े जा सकते। अब सड़कों पर घूम रहे गोवंश के लिए प्रशासन को जगह का समाधान करना होगा।
आज भी सड़कों पर हैं करीब 700 गोवंश : चोपड़ा
नगर परिषद के मुख्य सफाई निरीक्षक सुरेंद्र चोपड़ा का कहना है कि हम फाउंडेशन को पशु मुक्त सड़कें करने का काम सौंपा हुआ है लेकिन यह सच्चाई है कि उन्हें आज तक पशु छोड़ने के लिए जगह नहीं दी जा सकी है। जगह तलाश करने के आज भी प्रयास जारी है। वर्तमान समय में करीब 700 गोवंश सड़कों पर है।