कुरुक्षेत्र। करीब चार वर्ष पुराने चेक बाउंस मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार की अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने दोषी करार दिए गए कारोबारी को समझौते के आधार पर बरी कर दिया।
अदालत ने पाया कि आरोपी ने शिकायतकर्ता को चेक की पूरी राशि का भुगतान कर दिया था। दोनों पक्षों के बीच स्वेच्छा से समझौता हो चुका है। इसके चलते वर्ष 2022 में सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा के आदेश को निरस्त किया गया। साथ ही कंपाउंडिंग शुल्क भी माफ कर दिया गया। यह मामला अंबाला जिला के नारायणगढ़ निवासी विनोद मित्तल की अपील से जुड़ा था। निचली अदालत ने उन्हें परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया था। निचली अदालत ने उन्हें एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही चेक राशि की दोगुनी रकम बतौर मुआवजा देने का आदेश दिया था।
अदालत में समझौता
सुनवाई के दौरान विनोद मित्तल और शिकायतकर्ता करमजीत संधू अदालत में पेश हुए। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे चेक की पूरी राशि मिल चुकी है। अब उसके पास आरोपी के खिलाफ कोई बकाया दावा नहीं है। आरोपी ने भी भुगतान की पुष्टि करते हुए कंपाउंडिंग शुल्क माफ करने का अनुरोध किया। अदालत ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर विनोद मित्तल को आरोप से बरी कर दिया।