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Kurukshetra News: धर्मनगरी में सांसों पर संकट, एक्यूआई 352 पर पहुंचा

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कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी में भले ही औद्योगिक इकाइयां न के बराबर हैं, लेकिन बढ़ते प्रदूषण के चलते सांसों पर संकट दिखाई देने लगा है। दिवाली पर्व के बाद मंगलवार को एक्यूआई 352 पर पहुंच गया, जो इस सीजन में अब तक सबसे ज्यादा रहा है। इससे न केवल बीमार बल्कि स्वस्थ लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। जहां बच्चे व बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित माने जा रहे हैं वहीं लोगों का घरों से निकलना भी दूभर रहा। वातावरण की खराब हुई इस गुणवत्ता में कब सुधार होगा, यह अभी नहीं कहा जा सकता है।
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वायु गुणवत्ता की बेहद खराब हुई दशा को लेकर अधिकारी अभी तक आदेशों तक ही उलझे हैं। न फसल अवशेषों के जलाने पर ही उम्मीद अनुसार अंकुश लग पाया है और न ही अन्य आदेशों को लेकर ही गंभीरता दिखाई दी है। यहां तक कि दिवाली पर्व पर पटाखे पर प्रतिबंध के आदेश भी जहरीली बन चुकी हवा में घुलते दिखाई दिए। प्रशासन हर बार थीम पार्क में पटाखा मार्केट दिवाली के अवसर पर लगाता था जबकि शहर के बाजार में पटाखे बेचने पर पाबंदी होती थी। इस बार प्रशासन ने यह मार्केट भी नहीं लगाई तो वहीं जिले में पटाखे बेचे जाने पर प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर आदेश भी जारी किए, इसके बावजूद हर वर्ष की तरह इस बार भी जमकर आतिशबाजी की गई तो पटाखे भी बजाए जाते रहे। वहीं खराब वायु गुणवत्ता में मौसम की भी अहम भूमिका मानी जा रही है। उधर प्रशासन निर्माण कार्यों व माइनिंग आदि को लेकर भी अब तक सख्ती नहीं दिखा पाया है।


106 तक आ गया था एक्यूआई
दिवाली से एक दिन पहले हुई बूंदाबांदी के चलते ही एक्यूआई घटने लगा था और यह 106 तक भी आ गया था जबकि इससे पहले 346 तक भी पहुंच चुका था। एक्यूआई घटने से लोगों ने राहत की सांस लेनी शुरू की थी कि दिवाली के अगले ही दिन एक्यूआई बढ़ने लगा, जो मंगलवार को 352 तक पहुंच गया। वहीं सोमवार शाम को यह 307 रहा था।
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विवि परिसर से बाहर निकलने ही घुटने लगता है दम
यह कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हरे भरे परिसर का ही असर है कि यहां रहने वाले लोग राहत महसूस कर रहे हैं। प्रो. मीनाक्षी बताती है कि परिसर से बाहर सामान्य एरिया में आते ही दम सा घुटने लगता है। सैर करने के लिए निकलने पर लोग हांफने जैसी स्थिति में दिखाई देते हैं। बड़े स्तर पर लोगों ने घरों से बाहर निकलना ही बंद कर दिया है।


अगले तीन से चार दिन मेें ही राहत की उम्मीद : प्रो. मीनाक्षी
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग की प्रो. मीनाक्षी सुहाग का कहना है कि जहां पहले फसल अवशेष जलाए जा रहे थे वहीं दिवाली पर भी जमकर आतिशबाजी हुई है। ऐसे में हवा में बड़े स्तर पर जहरीला धुआं जमा हो चुका है। तापमान में आई गिरावट व तेज हवा न चलने के कारण यह धुआं आसमान में ठहरा हुआ है। हालात को देख अगले तीन से चार दिन बाद ही राहत की संभावना दिखाई दे रही है।


333 जगहों पर मिल चुकी आग लगाने की सूचना
फसल अवशेषों में आग लगाने वाले किसानों पर सेटेलाइट के साथ-साथ कृषि विभाग के अन्य अधिकारियों के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है। हरसेक सेटेलाइट से 151 और अन्य माध्यम से 209 सूचनाएं मिली है। इनमें 333 जगहों पर आग लगाने की सूचना सही मिली है, जिसके चलते 300 किसानों पर सात लाख 87 हजार 500 रुपये का जुर्माना किया जा चुका है।
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