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आठ प्रकार के विवाह में ब्रह्म विवाह सबसे उत्तम : अनिल शास्त्री

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कुरुक्षेत्र। पालिका पार्क में कथा के दौरान मंच पर कथावाचक एवं श्रद्धालु। स्वयं
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कुरुक्षेत्र। पटेल नगर के पालिका पार्क में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक ने भक्ति प्रवचन किए। श्रोताओं को अनिल शास्त्री ने बताया कि विदर्भ राज्य के राजा भीष्मक के एक पुत्र और एक पुत्री थी। पुत्र का नाम रुक्मी और पुत्री का नाम रुक्मिणी था। राजा भीष्मक अपनी पुत्री से बहुत प्रेम करते थे और उनके विवाह के लिए योग्य वर की तलाश में थे। इस विषय में राजा भीष्मक के सबसे करीबी मित्र और महाभारत कालीन मगध राज्य के नरेश जरासंध को भी पता था।
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कथावाचक ने बताया कि जरासंध को उस वक्त का शक्तिशाली राजा माना जाता था। कहा जाता था कि जरासंध का वध कोई नहीं कर सकता। जरासंध देवी रुक्मिणी को अपनी पुत्री जैसा ही मानते थे। वह खुद भी रुक्मिणी के लिए योग्य वर की तलाश में थे। रुक्मिणी के मन में शुरू से ही भगवान श्रीकृष्ण की छवि बसी हुई थी। बड़े-बड़े महारथी को परास्त करने वाले श्रीकृष्ण की कथा रुक्मिणी कई लोगों के मुंह से सुन चुकी थी। देवी रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण के विषय में सुनकर ही यह तय कर लिया था कि वह उन्हीं से विवाह करेंगी।

शास्त्री ने कहा कि देवी रुक्मिणी के भाई रुक्मी के साथ मिलकर जरासंध ने छेदी नरेश शिशुपाल के साथ रुक्मिणी का विवाह तय कर दिया लेकिन विधि को तो कुछ और ही मंजूर था। यह विवाह कभी हो ही नहीं सका। मुख्य आयोजक राजबीर सिंह, सरोज बाला देवी, नवीन, शिवानी, सचिन व एस्लीन ने व्यासपीठ का पूजन किया। आरती में मुलकराज कामरा, पवन, महेश शर्मा, गगनदीप ढींगरा, जगदीप, नवनीत कुकरेजा, वैभव, मोनिका, बाल कृष्ण और गौरव शर्मा सहित अन्य श्रद्धालु शामिल रहे।

कुरुक्षेत्र। पालिका पार्क में कथा के दौरान मंच पर कथावाचक एवं श्रद्धालु। स्वयं

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