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दोनों पदों पर भाजपा का कब्जा, लगातार तीसरी बार अध्यक्ष बनीं उमा

Sun, 26 Jun 2016 01:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
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चेयरमैन बनने के बाद विजयी चिह्न दिखाती उमा सुधा व वाइस चेयरमैन सुरेंद्र छिंदा - फोटो : Amar Ujala
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 नगर परिषद थानेसर के अध्यक्ष का ताज विधायक की पत्नी उमा सुधा के सिर सजा। इस जीत से उमा सुधा ने नप अध्यक्ष की हैट्रिक लगाई है। नप थानेसर के दोनो पदों पर भाजपा के ही पार्षद जीते हैं। अध्यक्ष पद के लिए वार्ड नं-19 से निर्विरोध चुनी गईं भाजपा की उमा सुधा और वार्ड नं-27 से इनेलो के संदीप टेका आमने-सामने थे। उपाध्यक्ष पद के लिए भाजपा से वार्ड नं-20 के पार्षद सुरेंद्र सिंह छिंदा और वार्ड नं-10 से इनेलो की सुनीता शर्मा में टक्कर थी। चुनाव में नप थानेसर के दोनों पदो पर भाजपा प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। दोनों पदों में जीत का अंतर 21-12 रहा। बीजेपी के समर्थन में 18 पार्षदों के अलावा एक निर्दलीय पार्षद ने भी वोट डाला। दो वोट विधायक और सांसद के रहे।
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ऐसे चली रणनीति
अपनी हैट्रिक बनाने के लिए विधायक सुधा ने पार्षदों को शपथ ग्रहण के बाद शिमला टूर पर भेज दिया। दो दिन तक शिमला में घूमने के बाद चेयरमैन चुनाव से महज 20 मिनट पहले ही ये पार्षद नप कार्यालय थानेसर पहुंचे। इन सभी पार्षदों की टीम को पुलिस एस्कॉर्ट कर रही थी। सूत्रों की माने, तो शिमला में शुक्रवार रात को बैठक भी हुई। इसमें पार्षदों की राय मांगी गई। इस राय के बाद अध्यक्ष के नाम की मोहर लगा दी गई। इसे बेहद गोपनीय रखा गया। शिमला टूर पर पार्षदों के साथ विधायक के सबसे विश्वास पात्र भी थे। शिमला में भी हर पार्षद पर पैनी निगाह रखी गई।


ये रहा सुधा परिवार का सफर
नगर परिषद थानेसर के इतिहास में सुधा परिवार कुल चार बार अध्यक्ष पद पर काबिज रहा है। सबसे पहले वर्ष 1995 से 2000 तक सुभाष सुधा इनेलो से नप चेयरमैन बने। इसके बाद वर्ष 2005 से लगातार 2016 तक उमा सुधा चेयरमैन पद पर रहीं। अब लगातार तीसरी बार वह चेयरमैन बनी हैं। उपाध्यक्ष पद पर काबिज हुए सुरेंद्र सिंह छिंदा ने भी लगातार तीन बार पार्षद बनकर हैट्रिक लगाई है। छिन्दा वर्ष 2005, 2010 और 2016 में जीते। उमा सुधा वार्ड-19 से निर्विरोध पार्षद चुनी गई थी। सुरेंद्र सिंह छिंदा ने वार्ड-20 से चुनाव जीता था।
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नप कर्मचारियों को बाहर निकाला
नगर परिषद थानेसर के चेयरमैन चुनाव के दौरान नप थानेसर में तैनात चार अधिकारियों को छोड़ कर अन्य सभी कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया। इन कर्मियों में कुछ कच्चे, जबकि कुछ स्थायी कर्मी थे। कर्मियों ने दबी जुबान में कहा कि शुक्रवार को नोटिस निकाला गया था कि सभी कर्मी शनिवार शाम पांच बजे तक ड्यूटी में तैनात रहेंगे, लेकिन अब बाहर निकाल दिया गया। यह गलत है।

ये नहीं जा सके चुनाव कक्ष तक
नप चेयरमैनी को लेकर जोश से लबलेज भाजपा के कई नेताओं को नप थानेसर में चुनाव कक्ष तक जाने की इजाजत नहीं मिली। इनमें सीपीएस श्याम सिंह राणा, सीएम के ओएसडी अमरेंद्र सिंह, इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा शामिल रहे।

व्हाट्स एप पर कर रहे थे अपडेट
शाम के चार बजे तक नप कार्यालय के बाहर खड़े कार्यकर्ता अपने-अपने मोबाइल में व्यस्त रहे। जानकारी ली तो पता चला की वे व्हाट्स एप पर चेयरमैन के चुनाव से संबंधित जानकारियां अपने मिलने वालों को भेज रहे थे।

झलकियां
- सांसद सैनी और विधायक सुधा ने किया अपने मत का प्रयोग
- हार के बाद सबसे पहले निकले इनेलो के पार्षद
- जीत के बाद सभी पहुंचे सुधा निवास पर
- जीत के बाद नप कार्यालय में चला बधाई का दौर
- चुनाव से पहले दोपहर एक बजे डीएसपी नूपुर बिश्नोई ने देखी सुरक्षा व्यवस्था
- ढोल की थाप पर थिरके पार्षद
- इनेलो कार्यकर्ता दिखे पार्षद के कार्यालय की ओर
- सभी 31 पार्षदों ने किया मत का प्रयोग
- अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों ने नप चुनाव में बनाई जीत की हैट्रिक


धन बल और सत्ता के दम पर जीती भाजपा : अशोक अरोड़ा

इनेलो प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने कहा कि भाजपा ने धन बल और सत्ता के दम पर चुनाव जीता है। भाजपा ने सभी 31 वार्डों में प्रत्याशी खड़े किए थे, लेकिन उनमें से केवल 13 प्रत्याशी ही जीतसके। इनेलो समर्थित 14 प्रत्याशी विजयी हुए थे। शपथ ग्रहण करते ही इनमें से दो गरीब हरिजन पार्षदों को विधायक जबरन उठाकर ले गए। उन्हें लालच और दबाव बनाकर अपने पक्ष में मतदान के लिए  मजबूर किया। आरोप लगाया कि इन गरीब पार्षदों के परिजनों को पुलिस से पिटवाने की धमकी दी गई। इनेलो के 12 पार्षद एकजुट रहे।

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने अपनी पार्टी के नेताओं को राजनीति में परिवारवाद और वंशवाद खत्म करने का मंत्र दिया था। लेकिन, हरियाणा में भाजपा के नेता मोदी के मंत्र को सिरे से खारिज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इनेलो ने नगर परिषद थानेसर से परिवारवाद खत्म करने की बात कही थी। हमने कहा था सुधा परिवार को छोड़कर यदि कोई भी पार्षद प्रधान पद के लिए सामने आता है, तो इनेलो समर्थित पार्षद उसका समर्थन करेंगे। लेकिन, विधायक ने परिवारवाद को बढ़ावा देते हुए अपनी पत्नी को ही चुनाव मैदान में उतारा। तरावड़ी में वहां के भाजपा विधायक कबीर पंथी ने अपनी भाभी को अध्यक्ष बनवाया है।
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