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अंधे कानून की पोल खोलेगी शहीदे आजम के पौत्र की पुस्तक

Sun, 18 May 2014 11:49 PM IST
अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
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कुरुक्षेत्र। 85 वर्ष पहले लाहौर में अंग्रेजों की ओर से दर्ज कराई एफआईआर में शहीदे आजम भगत सिंह का नाम नहीं होने के बावजूद फांसी देने के मामले का खुलासा उनके भाई कुलबीर सिंह के पौत्र यादविंद्र सिंह संधू की पुस्तक करेगी।
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इस पुस्तक का अंग्रेजी संस्करण आ चुका है और हिंदी संस्करण पर उनके पौत्र काम कर रहे हैं। यादविंद्र का कहना है कि वे पूरी दुनिया में लोकतंत्र की जननी होने का दंभ भरने वाले इंग्लैंड और उसके अंधे कानून की 85 साल बाद पोल खोलेंगे।

गौरतलब है कि हाल ही में लाहौर जेल के दस्तावेजों और अंग्रेज पुलिस अधिकारी जेपी सांडर्स की हत्या (17 दिसंबर 1928) के बाद दर्ज की गई एफआईआर में शहीदे आजम का नाम न होने का खुलासा हुआ है।
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हालांकि 83 बरस पहले इस आजादी के परवाने को इस मामले में फांसी दे दी गई थी। एफआईआर में नाम नहीं होने के खुलासे के बाद से शहीदे आजम के पौत्र यादविंद्र सहित पूरा परिवार सन्न हैं।

यादविंद्र सिंह संधू ने अमर उजाला से बातचीत में पाकिस्तान के सामाजिक संगठन शहीद भगत सिंह मेमोरियल और खास तौर पर इम्तियाज राशिद कुरैशी और पाकिस्तानी गायक जस्सी लायलपुरिया का आभार जताया।

यादविंद्र के अनुसार इस मामले के खुलासे के बाद से वे पाकिस्तान में उपरोक्त संगठन, जस्सी लायलपुरिया और राशिद कुरैशी के संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की बार काउंसिल की रिसर्च के दौरान करीब 85 वर्ष पुराने इस मामले की कड़ियां खुलना शुरू हो गई हैं। उन्होंने शहीदे आजम की फांसी को न्यायिक हत्या करार दिया।

उन्होंने ये भी बताया कि फिलहाल ये मामला लाहौर हाईकोर्ट की बड़ी बेंच पर पहुंच चुका है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस मामले में पाकिस्तान की हाईकोर्ट का सकारात्मक फैसला आएगा।

उन्होंने भी मुकदमे के कागजात मांगें है। इन दस्तावेजों के मिलने के बाद वे इन्हें शहीदे आजम के जीवन से जुड़े अहम दस्तावेजों पर आधारित पुस्तक के हिंदी संस्करण में शामिल करेंगे।

यादविंद्र सिंह की एक पुस्तक भगत सिंह का हाल ही में अंग्रेजी संस्करण मार्केट में आ चुका है। इस पुस्तक में भगत सिंह की जेल डायरी, चिट्ठियों और उनके जीवन से रोचक पहलुओं से जुड़े अहम दस्तावेज संकलित किए गए हैं। 

भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी और योग गुरु स्वामी रामदेव ने इस पुस्तक का विमोचन 23 मार्च 2014 को दिल्ली रामलीला मैदान में किया था।

शहीदे आजम पर लिखी जिस पुस्तक के अंग्रेजी संस्करण का 23 मार्च 2014 को नरेंद्र मोदी ने विमोचन किया था, यह पुस्तक विमोचन से 10 माह पहले 20 मई 2013 को अमर उजाला माई सिटी की वर्षगांठ पर यादविंद्र सिंह ने प्रदर्शित की थी। उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम में यादविंद्र सिंह बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करने कुरुक्षेत्र पहुंचे थे।
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