कुरुक्षेत्र। धान उठान न होने व कट लगाने के विरोध में मंगलवार शाम से रातभर धरने पर बैठे रहे भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने धान की ट्राॅली से उतरते ही डीएफएससी राजेश कुमार आर्य को थप्पड़ जड़ दिया। इस घटना के बाद पुलिस ने चढूनी सहित करीब 20 किसानों को हिरासत में ले लिया। उन्हें बस में बैठाकर झांसा थाने ले जाया गया। पुलिस ने बाकी कुछ किसानों को भी वहां से खदेड़ दिया तो धरना स्थल पर किसानों की ओर से बिछाई गई दरियां व गद्दे हटा दिए। धान से भरा ट्रैक्टर-ट्राॅली भी पुलिस ने हटवा दिया।
उधर पुलिस ने डीएफएससी की शिकायत पर चढूनी व अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया तो किसानों ने प्रशासन को डीएफएससी पर कार्रवाई करने के लिए 25 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम देकर धरना खत्म किया।
चढूनी मंगलवार दोपहर बाद करीब साढ़े तीन बजे जिला सचिवालय परिसर में धान की ट्राॅली सहित पहुंचे थे, जहां प्रदेशाध्यक्ष कर्म सिंह मथाना व कुछ अन्य किसानों के साथ धरना शुरू कर दिया था। रात भर धरने के बाद भी मांग पूरी नहीं हुई तो बुधवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे चढूनी ट्राॅली पर चढ़ गए और धान नीचे फेंकने लगे। हालांकि पुलिस ने उन्हें धान ट्राॅली से नीचे फेंकने से रोक लिया लेकिन चढूनी वहीं पर करीब एक घंटे तक बैठे रहे। इस दौरान कई बार ट्राॅली में भरा काला पड़ चुका धान देख व सुनवाई न होने के आरोप लगा कई बार वह भावुक भी हुए। कैथल के भाकियू जिलाध्यक्ष गुरनाम सिंह ने ट्राॅली पर ही आत्महत्या करने तक की धमकी दे दी तो अनाज मंडियों में किसानों को धान रोक देने व धरना स्थल पर पहुंचने का आह्वान किया।
मामला गंभीर होता देख आनन-फानन डीएफएससी मौके पर पहुंचे और कहा कि उन्होंने उनके प्रतिष्ठान से धान उठान किए गए वाहनों को खाली करवा दिया है, वहीं बाकी उठान भी किया जा रहा है। उन्होंने चढूनी को इसके सबूत दिखाने चाहे तो चढूनी ट्राॅली से नीचे उतर आए और थप्पड़ जड़ दिया।
चढूनी बोले, ऐसे अधिकारी को फिर मारूंगा
चढूनी ने हिरासत में लेने से पहले कहा कि डीएफएससी भ्रष्ट अधिकारी है। बार-बार प्रार्थना करने के बाद भी उन्होंने उनकी दुकान से धान उठान के लिए आरओ जारी नहीं किया। वे डीसी से भी मिले लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। उन्हें यहां इस तरह धरना देने के लिए मजबूर किया गया। ऐसे अधिकारी को तो मौका मिलने पर फिर मारूंगा। इस अधिकारी पर पहले ही दो मामलों में मुकदमा चला हुआ है। इसके बावजूद उसे दो जिलों कुरुक्षेत्र व जींद की जिम्मेदारी दे दी गई। छह रुपये प्रति कट्टा की रिश्वत तय की हुई है, जिसमें डीसी भी शामिल हैं।
धान खरीद, उठान व भुगतान रहा ठप
थप्पड़ कांड के बाद जिले की सभी अनाज मंडियों में खरीद, उठान व भुगतान ठप रहा। डीएफएससी व अन्य खरीद एजेंसियां हड़ताल पर उतर आईं। उधर विवाद के बाद गिरफ्तार किसानों को पहले झांसा थाना ले जाया गया। वहां किसान धरना देने लगे तो शाम करीब चार बजे उन्हें थाना शहर लाया गया। यहां भी सैकड़ों किसान पहुंच गए और थाना परिसर में ही धरना देकर नारेबाजी शुरू कर दी गई, जहां किसानों को रिहा किए जाने व डीएफएससी को निलंबित करने की मांग करते रहे। गहराए विवाद के बीच एडीसी शंभू राठी थाने पहुंचे और किसानों के साथ बैठक की। भाकियू प्रवक्ता राकेश बैंस के मुताबिक एडीसी ने स्पष्ट किया कि थप्पड़ मारे जाने को लेकर मामला चलेगा लेकिन किसानों की शिकायत पर जांच करते हुए डीएफएससी पर भी कार्रवाई की जाएगी। इस पर किसान शांत हुए लेकिन 25 अक्टूबर तक कार्रवाई नहीं की तो जाट धर्मशाला में बैठक कर बड़ा फैसला लिया जाएगा।