राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र। अब कहां ढूंढने जाओगे हमारे कातिल, आप तो कत्ल का इल्जाम हमीं पर रख दो... स्वर्गीय राहत इंदौरी की रचना के बीच की ये पंक्तियां किसान जसविंदर सिंह पर सटीक बैठती हैं। क्योंकि उसके खिलाफ उस अपराध में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज हो चुका है, जो करना तो दूर, वह उस स्थान पर था तक नहीं। जाहिर है कि केंद्र सरकार के तीन नये अध्यादेश पर देशभर से किसानों के आंदोलनरत होने की खबरें आ रही हैं, भले किसानों का एक वर्ग इन अध्यादेशों के प्रति नाराज है, मगर जसविंदर सिंह कमरतोड़ मेहनत के साथ अपनी खेतीबाड़ी में ही जुटा है, उसका वास्ता न तो किसी राजनीतिक दल से है और न ही भाकियू और उनके आंदोलन से।
कुरुक्षेत्र के गांव बिहोली में आठ एकड़ जमीन पर मेहनत करके जसविंदर खेतीबाड़ी का काम करता है। उसका दावा है कि 10 सितंबर को पिपली में जो किसान आंदोलन हुआ था, उसमें शामिल होने के आरोपों के तहत विभिन्न धाराओं में दर्ज एफआईआर में वह नामजद है। वह भी ड्यूटी मजिस्ट्रेट साहब सिंह (बीडीपीओ) की संस्तुति पर। जसविंदर कहना है कि उसे मामला दर्ज होने के दूसरे दिन पता चला था कि उसका नाम अमर उजाला अखबार के फ्रंट पेज पर छपा है। उसके पुत्र ने मोबाइल फोन में ई-पेपर को डाउनलोड किया उसके बाद जब खबर को पढ़ा तो पहले पन्ने पर नाम लिखा था। इसके बाद वह अखबार के दफ्तर पहुंचा, जहां ज्ञात हुआ कि यह नाम थाना सदर पिपली में दर्ज एफआईआर से लिया गया था। थाने में जाकर पूछा तो वहां बताया कि ड्यूटी मजिस्ट्रेट साहब सिंह (बीडीपीओ) की शिकायत पर कार्रवाई की गई है। जसविंदर सिंह ने हैरानी जताते हुए बताया कि साहब सिंह का बीडीपीओ दफ्तर उनके गांव में ही है, पिछले सात-आठ माह से उन्हें जानते भी हैं, वह इस बारे में सरपंचपति से भी पूछ सकते थे, क्योंकि वह तो उस दिन सरपंचपति के साथ ही गांव में ही मौजूद था।
जसविंदर पूरा दिन गांव में ही था। साथ में ही मौजूद रहा। गांव के लोग भी इस बात को जनते हैं। यहां तक कि सीसीटीवी फुटेज में भी इस बात की पुष्टि की जा सकती है।
-प्रीतम सिंह, सरपंच पति।
ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने कहा जा कर ले शिकायत
किसान ने बताया कि बीडीपीओ से जब उन्होंने पूछा तो वे बोले कि हो सकता है किसी शरारती ने गलत नाम दिये हों, मगर जब उस शरारती का नाम पूछा तो वे बोले कल बताता हूं और यह मामला भी निपटवा दूंगा, लेकिन अगले रोज बीडीपीओ बोले ये नाम उन्हें सीआईडी से मिले थे, जब सवाल कर ये पूछा कि सीआईडी ने कैसे दे दिये तो तड़ाक से बोले बोले जा जहां देनी है शिकायत दे दे।
अगर पुलिस मुझे उठा लेती तो क्या सुनती मेरी
मेरी 70 साल की मां है, मेरे खिलाफ आज तक कोई केस दर्ज नहीं हुआ, मेरी पत्नी, 15 साल के पुत्र सभी परेशान हैं। अगर मुझे अखबार से पता नहीं चलता तो शायद पुलिस मुझे उठाकर भी ले जाती। मेरा सवाल ये है कि क्या उस समय पुलिस मेरी सुनती। जसविंदर सिंह ने कहा कि मैं चार दिन से परेशानी के कारण अपनी बेटी से भी बात नहीं कर सका हूं।
सीएम विंडो, डीसी और एसपी को भेजी शिकायत
किसान आंदोलन में दर्ज एफआईआर में विभिन्न धाराओं में जो नामजद हैं, उनमें शामिल जसविंदर सिंह ने अपनी बेगुनाही के प्रमाण जुटाने के साथ-साथ सीएम विंडो पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल, कुरुक्षेत्र की डीसी और एसपी को लिखित शिकायत भेजी है।