कुरुक्षेत्र। जीर्णोद्धार समिति द्वारा ब्रह्म सरोवर स्थित गीता भवन ट्रस्ट परिसर में मौनी अमावस्या के उपलक्ष्य में संकीर्तन एवं भंडारा आयोजित किया गया। ट्रस्ट के वाइस चेयरमैन केके गुप्ता ने बताया कि यह अनुष्ठान सचिव ओपी गुप्ता की देखरेख में किया गया।
सुबह वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा हवन किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने आहुतियां दी। मौनी अमावस्या का महत्व बताते हुए पुजारी पंडित पंकज शुक्ला ने बताया कि माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन मौन रहने का बड़ा महत्व है। व्रत रखने वालों को मौन रहते हुए व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए। मौनी अमावस्या के दिन श्रीहरि और हर का पूजन किया जाता है। कई श्रद्धालु मौनी अमावस्या के दिन व्रत भी रखते हैं।
शास्त्रों के अनुसार उच्चारण करके जाप करने से कई गुणा अधिक पुण्य मौन रहकर हरि का जाप करने से मिलता है। मौन या शांत रहने का तात्पर्य है कि भक्त बाहरी जीवन से दूर रहकर स्वयं के भीतर क्या चल रहा है उसका आत्ममंथन करें। मन के भीतर जो भी कमियां नजर आ रही हैं उन्हें समझ ईश्वर की आराधना में लीन होकर अपनी कमियों को दूर करें। मौन का मतलब अपने मन को एकाग्र करना होता है और प्रभु के नाम का स्मरण करना होता है। इससे मानसिक नकारात्मकता दूर होगी। गीता भवन में सुबह 6 से दोपहर 12 बजे तक लगातार विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर भंडारा आयोजक जोगेंद्र पधाना (करनाल), सतपाल, देसराज, मोती लाल, अनिल कुमार धवन, रमेश कपूर, संतोष दीक्षित और अशोक कुमार आदि मौजूद रहे।