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अब आयुर्वेदिक अस्पताल में भी नहीं रहेगा दवाओं का संकट

Sun, 21 May 2017 11:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
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अब आयुर्वेदिक अस्पताल में भी नहीं रहेगा दवाओं का संकट - फोटो : Amar Ujala
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अब प्रदेश के एकमात्र श्री कृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल को दवाओं की किल्लत से नहीं झूझना पड़ेगा और न ही विभिन्न प्रदेशों की दवा निर्माता कंपनियों पर निर्भर रहना होगा। अब यहां पर अनेकों दवाओं की पूर्ति अस्पताल परिसर में ही स्थित राज्य आयुर्वेद फार्मेसी से ही हो सकेगी। फार्मेसी ने अब दवा निर्माण कार्य शुरू कर दिया है, जिसके साथ ही अब उक्त अस्पताल में आने वाले मरीजों को दवा मिल पाएंगी तो वहीं प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी यहां से दवा की पूर्ति हो सकेंगी, जिससे भी लोगों को लाभ होगा।
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फार्मेसी में बनाई जाने वाली दवाएं यहां अस्पताल में आने वाले मरीजों तक पहुंचनी भी शुरू हो गई है, जिससे अस्पताल के चिकित्सकों से लेकर मरीजों को भी बड़ी राहत मिल पाई है। हालांकि अभी छोटे स्तर पर ही दवा निर्माण कार्य शुरू हो पाया है, लेकिन अगले कुछ ही दिनों के दौरान यहां बड़े स्तर पर दवा निर्माण किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। बता दें कि प्रदेश के एकमात्र राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए अभी तक उत्तराखंड, मध्यप्रदेश व कर्नाटक सहित कई अन्य प्रदेशों की दवा निर्माता कंपनियों पर ही निर्भर रहना पड़ता था।

अभी इन दवाओं का किया गया निर्माण
फार्मेसी में अभी हार्ट से लेकर पेट की बीमारियों में काम आने वाली दवाओं अश्वगंधा चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, हरितकी चूर्ण, मधुयष्ठी चूर्ण, अर्जुन चूर्ण व आंवला चूर्ण का निर्माण शुरू किया गया है, जिनकी पूर्ति आयुर्वेद अस्पताल में ही नहीं बल्कि कुरुक्षेत्र के अलावा अन्य जिलों में भी की जाने लगी है।
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आउटसोर्सिंग स्टाफ के सहारे बनाई जा रही दवाएं
फार्मेसी स्थापना के करीब 6 वर्ष बाद जहां दवा निर्माण कार्य शुरू कर दिया है वहीं आज भी यह कार्य आउटसोर्सिंग कर्मियों के सहारे ही है। विभाग आज तक यहां स्थायी स्टाफ की नियुक्ति नहीं कर पाया है, जिसके चलते अभी फार्मेसी का पूरा प्रबंधन कालेज व अस्पताल स्टाफ को ही संभालना पड़ रहा है।

दूसरी दवाओं का भी जल्द होने लगेगा निर्माण: उषा दत्त
कॉलेज एवं अस्पताल की प्राचार्या डॉ उषा दत्ता का कहना है कि प्रारंभ में उक्त दवाओं का निर्माण शुरू किया गया है लेकिन जल्द ही दूसरी दवाओं का भी निर्माण यहां किया जाने लगेगा। अब अस्पताल में दवाओं की कमी नहीं रहेगी तो वहीं विभाग व सरकार को दवा खरीद को लेकर खर्च किए जाने वाले बड़े बजट में भी बचत होगी। वहीं यहां आने वाले मरीजों को बाहर की दवा लेने की भी जरूरत नहीं रहेगी।
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