कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग द्वारा 37वें राज्य स्तरीय चार दिवसीय रत्नावली महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन शुक्रवार को एनआईटी निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी द्वारा किया गया। महोत्सव की शुरुआत वेलकम गीत और लूर नृत्य के साथ हुई। महोत्सव में जहां हरियाणा पवेलियन सजाया गया तो वहीं कलाकारों की प्रस्तुति हेतु छह मंच सजाए गए, जिसमें विभिन्न कलाकारों ने प्रतिभा की छटा बिखेरी।
पहले दिन ऑडिटोरियम हाल के मुख्य मंच पर रिचुअल और लूर नृत्य, पॉप सॉन्ग और कोरियोग्राफी हुई और आरके सदन के मंच पर हरियाणवी भजन, ड्यूट रागनी प्रतियोगिता करवाई गई। वहीं ओपन एयर थियेटर में सोलो नृत्य (पुरुष), रागनी प्रतियोगिता हुई तथा सीनेट हॉल में भाषण एवं पगड़ी बांधने की प्रतियोगिता हुई। जबकि खुले मंच पर सांग प्रतियोगिता तो वहीं क्रश हॉल में फोक पेंटिंग कार्यशाला व प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। हरियाणवी रीति रिवाजों के माध्यम से युवा पीढ़ी को जहां अपने समृद्ध रीति-रिवाजों से रूबरू होने का मौका मिला तो वहीं बुजुर्गों को अपने दिन याद आ गए। कलाकारों ने बान, खोड़िया और भात सहित अन्य रस्मों की प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया
कुरुक्षेत्र विवि के युवा एवं सांस्कृतिक विभाग द्वारा 2023 में लूर नृत्य को पुनर्जीवित कर युवा उत्सवों में शामिल किया गया है। इससे पूर्व करीब 50 वर्ष पहले यह नृत्य हरियाणा से लुप्त हो चला था। फागण के महीने में यह नृत्य प्रदेश के बांगर क्षेत्र में होता था। इस नृत्य में नृत्य एवं अभिनय दोनों का समागम देख दर्शक गदगद हो गए। वहीं कलाकारों ने भी जी-जान से अपनी प्रस्तुति दी कि दर्शक भी थिरकने पर मजबूर हो गए।
कलाकारों ने बांधा समां, दर्शकों ने भी खूब की मस्ती
चार दिवसीय रत्नावली महोत्सव में करीब तीन हजार कलाकार कला का जादू बिखेरेंगे। वहीं पहले दिन महोत्सव में पहुंचा कमलेश एवं पपोसा गांव के दल की महिलाओं ने सभी मेहमानों का हरियाणवी गीत गाकर स्वागत किया। कलाकारों द्वारा लोक-पारंपरिक नृत्यों को प्रस्तुत कर हरियाणवी संस्कृति की विविध छटाओं के स्वरूप प्रस्तुत किए। जींद से पहुंची बीन-बांसली की पार्टी ने गजे सिंह की परंपरा को निभाते हुए बीन और बांसुरी की स्वर लहरियों के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। ब्रज से पहुंची बंचारी टीम ने बंचारी की होली गाकर दर्शकों को नाचने के लिए बाध्य कर दिया। धरोहर हरियाणा संग्रहालय के सहयोग से प्रदेश के समृद्ध किसान परिवार की झांकी प्रस्तुत की गई, जिसके माध्यम से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और बेटी के जन्म पर छठी मनाओ एवं हम विश्वास दिलाते हैं पराली न जलाने की कसम खाते हैं का महत्वपूर्ण एवं आधुनिक संदेश दिया गया।
आज इन विधाओं का होगा मंचन
लोक संपर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि 26 अक्तूबर को ऑडिटोरियम हॉल के मुख्य मंच पर सोलो नृत्य महिला, फॉक कॉस्ट्यूम पुरुष एवं महिला, हरियाणवी फैशन शो, हरियाणवी फॉक ऑरकेस्ट्रा का मंचन होगा। आरके सदन मंच पर हरियाणवी लोकगीत, हरियाणवी गजल व मोनो एक्टिंग प्रतियोगिता कराई जाएंगी तथा ओपन एयर थियेटर में हरियाणवी स्किट एवं टिट-बिट्स एवं सीनेट हॉल में हरियाणवी क्विज (प्री), शॉर्ट फिल्म (इन हरियाणवी ओर ऑन हरियाणा) की प्रतियोगिताएं होंगी। खुला मंच पर सांग प्रतियोगिता का आयोजन होगा तथा क्रश हॉल में एंटिक हरियाणवी संग्रह प्रदर्शनी बोहिया, इंडी, पिड्डा, बिंदरवाल को प्रदर्शित किया जाएगा।