धार्मिक नगरी पिहोवा में प्रथम बार तीन दिवसीय गीता जयंती समारोह मनाया जा
रहा है। इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा कुरुक्षेत्र जिले के नाम पर 10 लाख
रुपये का बजट भी जारी किया गया।
जिसे जिलास्तरीय समारोह आयोजित करने के लिए
पिहोवा में दिया गया है। लेकिन प्रशासनिक अधिकारी शायद रुपये को खर्च करने
की बजाय बचाने के पक्ष में हैं। प्रशासन की अव्यवस्था का अंदाजा इसी बात
से लगाया जा सकता है कि बाहर से आए कलाकारों को बिना भोजन के ही रहना पड़ा।
इतना ही नहीं, जब वे शिकायत लेकर पहुंचे तो अधिकारियों ने उन्हें यहां तक
कह दिया कि किसी मंदिर के भंडारे में जाकर खा लो। बाहर से आए लोक
कलाकारों कर्मबीर नाथ, बीजा नाथ, कल्लू नाथ, सुरजीत, अनूप, भल्ले राम तथा
सुभाष ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वे खाने व रात्रि में रहने के लिए
धर्मशालाओं में भटकते रहे।
वे 18 दिसंबर को रात में पिहोवा पहुंचे तो पता
चला कि उनका रहने व खाने के लिए तीन दिन के लिए इंतजाम ब्रह्मजून स्थित
धर्मशाला में प्रशासन द्वारा कराया गया है। वे वहां पहुंचे तो पता चला कि
केवल रहने का इंतजाम है। रात्रि के समय जैसे-तैसे वे वहां पर सो गए और सुबह
लगभग 8 बजे तक चाय-नाश्ता नहीं आया। उन्हें जानकारी मिली कि प्रशासन की
तरफ से केवल रहने के लिए रात्रि तक का इंतजाम था।
उन्होंने जेब से खर्च
करके नाश्ता किया और गीता जयंती समारोह में प्रस्तुति के लिए चले गए। दोपहर
तक उनके भोजन का कोई इंतजाम नहीं हुआ था। जब उन्होंने प्रशासनिक
अधिकारियों से जाकर रोष जताया तो अधिकारियों द्वारा आनन-फानन में उन्हें
दोपहर के खाने के लिए शहर में बाला सुंदरी मंदिर में भेज दिया। लेकिन, वहां
पर पहले से ही प्रोग्राम होने के कारण उन्हें मां चिंतपूर्णी धर्मशाला भेज
दिया गया।
वहां जाकर पता चला कि इस धर्मशाला में दोपहर तथा रात्रि का भोजन
हर व्यक्ति को नि:शुल्क मिलता है। लेकिन, सुबह के नाश्ते का वहां पर कोई
प्रावधान नहीं है। प्रशासन के रवैये पर रोष जताते हुए उन्होंने कहा कि
सरकार द्वारा लाखों रुपये का बजट जारी करने के बावजूद वे रहने तथा खाने के
लिए घंटों भटकते रहे। यह सरकार व प्रशासन की नाकामी साबित हो रही है और
इसके साथ-साथ उनकी कला का घोर अपमान है।
कैसे जाऊं कार्ड पर नाम तक नहीं : संधू
पिहोवा
के इनेलो विधायक जसविंद्र सिंह संधू जिलास्तरीय गीता जयंती कार्यक्रम से
नदारद रहे। उनका कहना है कि जिला प्रशासन की ओर से जो कार्ड जारी किए गए
हैं उनमें उनका नाम तक अंकित करना मुनासिब नहीं समझा गया। जबकि वे यहां के
विधायक हैं और कार्ड पर बाहरी विधायकों के नाम अंकित हैं। यह कार्यक्रम
सामूहिक न होकर निजी पार्टी का कार्यक्रम ज्यादा है। इसलिए, मैंने वहां
जाना मुनासिब नहीं समझा।
एसडीएम किरण सिंह का
कहना है कि हमने विधायक को 18 दिसंबर को निमंत्रण पत्र भेजा था। प्रशासन के
पास विधायक की ओर से दोपहर बाद 3 बजे पत्र की रिसीविंग है। विधायक की
अनदेखी नहीं की गई है। लोक कलाकारों के लिए रहने और खाने का पूरा इंतजाम
तहसीलदार व नायब तहसीलदार द्वारा कराया गया है, यदि फिर भी कोई लापरवाही
पाई गई तो नियमानुसार कार्रवाई होगी।