कुरुक्षेत्र। बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के बीच प्रदेश में बिजली और पानी की किल्लत को लेकर थानेसर के विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री अशोक अरोड़ा ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लोग पीने के पानी के लिए परेशान हैं और बिजली आपूर्ति बाधित होने से रोजमर्रा के काम ठप पड़े हैं। सरकार को जब हड़ताल के अल्टीमेटम की जानकारी थी तो कर्मचारियों से बातचीत कर समस्या का समाधान निकालना चाहिए था या वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी।
अरोड़ा ने कहा कि सरकार की नाकामी का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। कुरुक्षेत्र में भी कई जगह लोग पानी की कमी से जूझ रहे हैं। प्रशासन से शिकायत करने पर तैयारी और कार्रवाई का आश्वासन मिलता है, लेकिन लोगों की परेशानी दूर नहीं हो रही। टैंकर भेजने की बात कही जाती है, फिर भी कई क्षेत्रों में पानी नहीं पहुंच रहा।
अशोक अरोड़ा ने बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर मुख्यमंत्री और बिजली मंत्री के बयानों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार निजीकरण के खिलाफ है तो प्रदेश के दो जिलों में बिजली निजी कंपनियों को सौंपने का फैसला कैसे हुआ। उन्होंने मांग की कि सरकार हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन के फैसले को रद्द करे और निजीकरण पर रोक लगाए।
अरोड़ा ने कहा कि प्रदेश में कई जगह लोग पानी की समस्या को लेकर सड़क जाम कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में सरकार को भाजपा संगठन मजबूत करने के बजाय जनता की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। बिजली और पानी जैसी जरूरी सुविधाएं बहाल करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।