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शिक्षक कर रहे ट्रेनिंग, बच्चों को पढ़ाया मजदूरी का पाठ

Sat, 27 Feb 2016 01:06 AM IST
कुरुक्षेत्र
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राजकीय मीडिल स्कूल, गांव सुंदरपुर, समय : सुबह सवा 10 बजे। कक्षा आठवीं के छात्र सुबह घर से निकले थे यह सोच कर कि स्कूल में पढ़ाई होगी। रोज ही होती है, यही सोचकर स्कूल तो पहुंच गए। लेकिन मिडिल स्कूल हेड ने बताया शिक्षक किसी ट्रेनिंग में गई है। इसके बाद सभी बच्चों को कक्षा से बाहर निकाला गया और फिर शुरू हुआ बच्चों का किताबों के बजाय मजदूरी का पाठ..।
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स्कूल परिसर के बाहर स्कूल हेड ने मिट्टी भरने का काम बच्चों को दे दिया। शर्मनाक बात यह थी कि जिस थाली में बच्चे मिड डे मील खाते थे, उसी में मिट्टी उठा-उठा कर लाने लगे। बच्चों के हाथों में किताबों की जगह कस्सी और तसले थमा दिए गए। 

सुदंरपुर के इस राजकीय स्कूल की यह घटना सरकार के उन प्रयासों की हकीकत को बयां करने के लिए काफी है, जिसमें शिक्षा के स्तर को सुधारने के बड़े बड़े दावे किए जाते हैं। कक्षा आठवीं के करीब 20 से ज्यादा बच्चों को स्कूल के बाहर से मिट्टी उठवा कर परिसर में डालने की जिम्मेदारी दे दी गई। कई लड़के लड़कियां सुबह सुबह ही पसीने में तर-ब-तर हो गए थे। लेकिन मुफ्त की इस मजदूरी कोकरने की मजबूरी भी थी, क्योंकि स्कूल हेड सामने ही खड़ी थी। 
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दरअसल कैंपस में स्थित राजकीय मिडल व प्राथमिक स्कूल परिसर में इंटरलॉकिंग कार्य किया जा रहा है। लगभग 5 लाख रुपये की लागत से करवाए जाने वाले इस कार्य का शुभारंभ विधायक सुभाष सुधा ने दो सप्ताह पहले किया गया था। जिसके बाद यह कार्य शुरु हुआ तो इसके लिए मिट्टी भरवाई जाने लगी। काफी मिट्टी स्कूल के बाहर ही सड़क के दूसरे किनारे की ओर डाली गई। जिसे स्कूल परिसर में डाले जाने के लिए आठवीं कक्षा के छात्रों को लगा दिया गया। इसमें कई छात्रों को तसलों में मिट्टी भरने के लिए कस्सी थमा दी गई तो दर्जनों छात्र व छात्राओं को तस्ले देकर मिट्टी स्कूल परिसर में डाले जाने को कहा गया। 
तस्ले कम पड़े तो थालियों को तसला बना लिया गया। मिट्टी ढोते हुए इन बच्चों को जिसने भी देखा वह हैरान रह गया। आते जाते लोगों ने कहा भी कि बच्चे स्कूल में पढ़नेके लिए भेजे जाते हैं, लेकिन यहां तो मजदूरी कराई जा रही है। 
शोर कर रहे थे इसलिए हमें यह काम दियामिट्टी उठा रहे कुछ बच्चों से जब अमर उजाला टीम ने बात की तो बच्चों का मासूम सा जवाब मिला। उन्हें पढ़ाने वाले अध्यापक नहीं थे। कुछ बच्चे शरारत कर रहे थे, शोर होने लगा तो उन्हें मिट्टी उठाने के लिए कह दिया गया। 
हादसे की आंशकास्कूल के बाहर सड़क पार कर बच्चों द्वारा मिट्टी ढोने के दौरान कोई भी हादसा होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। स्कूल के मुख्य गेट के समक्ष गांव को शहर से जोड़ने वाली इस सड़क पर हर समय वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे भी बच्चों का सड़क पार कर मिट्टी ढोना बेहद गंभीर है।
टीचर ट्रेनिंग पर गए हैं : मुख्य अध्यापकजब अमर उजाला की टीम स्कूल पहुंची तो मुख्य अध्यापक रजनी ने बच्चों को काम करने से मना कर दिया। रजनी ने बताया कि आठवीं कक्षा के बच्चों को पढ़ाने वाले अध्यापक किसी ट्रेनिंग में गए हुए है। अध्यापक नहीं होने से बच्चे शरारत कर रहे थे।ऐसे में उन्हें यह कार्य करने के लिए कहा गया। इससे पहले कभी भी बच्चों से इस प्रकार से कार्य नहीं लिया गया। आज पहली बार ही यह कार्य करवाया गया। बाकी पूरी मिट्टी मजदूरों द्वारा ही डलवाई गई है।
बच्चों से ऐसे कार्य कराना गैर कानूनी : डीईओजिला शिक्षा अधिकारी सुमन आर्य ने बताया कि मामला उनके संज्ञान मेें नहीं है। यह बेहद ही गंभीर मामला है और वह इसकी जांच करवाएंगी। बच्चों को शिक्षा के अलावा कोई भी अन्य कार्य करवाना गैर कानूनी है तो वहीं इस प्रकार का कार्य निंदनीय है। यह सरकार के निर्देशों की अवहेलना है।
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