कुरुक्षेत्र। जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हेम राज की अदालत ने शाहाबाद शुगर मिल्स में फर्जी प्रमाणपत्रों व प्रबंध निदेशक को रिश्वत देकर टेंडर हासिल करने के मामले में मेसर्स कुश इंजीनियरिंग वर्क्स की साझेदार रितु की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। यह टेंडर शुगर मिल्स कोऑपरेटिव सोसाइटी के लिए 2024-25 के रखरखाव और मरम्मत टेंडर से संबंधित था।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि रितु की फर्म ने तकनीकी कर्मचारियों के फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर टेंडर हासिल किया जिसके परिणामस्वरूप चीनी मिल को 150 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि फर्म ने पहले रोहतक और पानीपत शुगर मिल्स के टेंडर में भी फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया था जिसके कारण उनकी निविदाएं खारिज हो चुकी थीं। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि फर्म ने टेंडर हासिल करने के लिए चीनी मिल के प्रबंध निदेशक और अन्य कर्मचारियों को रिश्वत भी दी थी।
मामले के सामने आने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत एंटी करप्शन ब्यूरो पुलिस थाना अंबाला में 22 जुलाई को मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है, जो अभी जारी है।
रितु के वकील ने तर्क दिया कि उनकी मुवक्किल निर्दोष है और फर्म के दैनिक कार्यों में शामिल नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने यह मामला रितु की फर्म की ओर से दायर रिट के जवाब में जल्दबाजी में दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि रितु शाहाबाद की स्थायी निवासी है और जांच में सहयोग करने को तैयार है।
अभियोजन पक्ष के वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि जांच प्रारंभिक चरण में है और रितु को जमानत देने से जांच में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
न्यायाधीश हेम राज ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि अग्रिम जमानत असाधारण मामलों में ही दी जानी चाहिए। उन्होंने अपराध की गंभीरता और जांच की आवश्यकता को देखते हुए रितु की जमानत याचिका खारिज कर दी। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि हिरासत पूछताछ व जांच के लिए आवश्यक है और जमानत देने से जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।