संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पारंपरिक कारीगरी का बेहतरीन संगम देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में राजस्थान के टोंक जिले से पहुंचे अनीष अपने नमदा वर्क के खूबसूरत और आकर्षक आइटमों के साथ लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।
अनीष ने बताया कि यह कला उनके परिवार की पुश्तैनी विरासत है, जिसे वे समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। पहले उनके पिता गीता महोत्सव में दुकान लगाते थे और लोगों को नमदा वर्क की खासियत से रूबरू करवाते थे। समय बदलने के साथ आज यह जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। वे कहते हैं कि पिता ने जिस लगन से इस कला को जिया, मैं भी उसी मेहनत और जुनून के साथ उनकी विरासत को और आगे ले जाना चाहता हूं। पर्यटक और स्थानीय लोग इनकी हैंडमेड कला की खूब सराहना कर रहे हैं।
अनीष के स्टॉल पर नमदा वर्क से बने स्लीपर, मैट, कार्पेट और डेकोरेटिव आइटम लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। रंग-बिरंगी ऊन से तैयार किए गए ये उत्पाद न सिर्फ खूबसूरत हैं बल्कि टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल भी हैं।