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Kurukshetra News: ब्रह्मसरोवर में बारिश के बीच श्रद्धालुओं ने अमावस्या पर लगाई आस्था की डुबकी

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कुरुक्षेत्र। अमावस्या पर पवित्र ब्रह्मसरोवर में आस्था की डुबकी लगाते श्रद्धालु। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। आषाढ़ महीने की हलहारिणी अमावस्या के अवसर पर धर्मनगरी में मंगलवार को श्रद्धा और भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा। अल सुबह से ही हल्की बारिश के बीच श्रद्धालुओं ने पवित्र ब्रह्मसरोवर पहुंचकर स्नान किया और अपने पितरों की आत्मिक शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और पूजा-अर्चना की। ब्रह्मसरोवर परिसर में सुबह से ही मेले जैसा माहौल बन गया था। दूर-दराज से आए श्रद्धालु अपने साथ वस्त्र, फल, मिठाई और अन्न लेकर पहुंचे, जिन्हें उन्होंने जरूरतमंदों को दान किया। मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। स्थानेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी पंडित राजेश ने बताया कि अमावस्या के दिन किया गया दान 100 गुना फलदायी होता है। इस अवसर पर लोगों ने पीपल वृक्ष पर दूध और जल अर्पित कर अपने पूर्वजों की शांति के लिए प्रार्थना की।
श्रद्धालुओं ने कहा कि चाहे बारिश हो या धूप, पितरों के प्रति श्रद्धा कभी कम नहीं होती। पवित्र ब्रह्मसरोवर में आस्था की डुबकी लगाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। पूरे दिन धर्मनगरी में भक्तिभाव का वातावरण बना रहा। वहीं प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा और साफ-सफाई के विशेष प्रबंध किए गए थे।
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किसानों के लिए विशेष होती है हलहारिणी अमावस्या : महंत जगन्नाथ पुरी
कुरुक्षेत्र। अखिल भारतीय श्री मारकंडेश्वर जनसेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत जगन्नाथ पुरी एवं अन्य संतों के सान्निध्य में श्री मारकंडेश्वर महादेव मंदिर ठसका मीरां जी में विधिवत मंत्रोच्चार के साथ आषाढ़ महीने की हलहारिणी अमावस्या पर किसानों की तरक्की एवं अच्छी फसल की कामना के साथ खेतों में पूजन किया गया।
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महंत जगन्नाथ पुरी ने बताया कि इस दिन किसान विधि-विधान से हल एवं कृषि यंत्रों का पूजन करके भगवान से फसल हरी-भरी बनी रहने की कामना करते हैं। इसके साथ ही अमावस्या का दिन पितरों का श्राद्ध, तर्पण एवं दान इत्यादि करने के लिए भी शुभ दिन होता है। इसी अवसर पर पितरों की शांति एवं जीवन के तीन ऋण मुक्ति के लिए कुछ यजमान श्रद्धालु विभिन्न क्षेत्रों से पूजन के लिए पहुंचे। महंत जगन्नाथ पुरी के मार्गदर्शन में विधिवत मंत्रोच्चार के साथ पूजन संपन्न करवाया। उन्होंने बताया कि हर मनुष्य के जीवन में तीन प्रकार के ऋण बताए गए हैं, जिनमें पितृ ऋण, देव ऋण और ऋषि ऋण हैं, इन तीनों ऋणों से बचने एवं मुक्ति के लिए ही पूरे विधि विधान से त्रिपिंडी श्राद्ध पूजन किया जाता है। पूजन के उपरांत दान इत्यादि किया गया।

कुरुक्षेत्र। अमावस्या पर पवित्र ब्रह्मसरोवर में आस्था की डुबकी लगाते श्रद्धालु। संवाद

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