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Kurukshetra News: पुलिसकर्मी से 20 हजार रुपये लूटने और डंडों से मारपीट के मामले में शिकायतकर्ता सहित सभी गवाह मुकरे, चारों आरोपी बरी

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कुरुक्षेत्र। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट दवेंदर की अदालत ने पुलिस जवान से 20 हजार रुपये लूटने और डंडों से मारपीट करने के मामले में शिकायतकर्ता व सभी गवाहों के मुकर जाने के बाद चारों आरोपियों को बरी कर दिया।
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थाना सदर थानेसर में 28 अगस्त 2019 को हरियाणा पुलिस में तैनात विक्रम चौहान की शिकायत पर दर्ज मामले के अनुसार 26 अगस्त 2019 शाम को वह सेक्टर-तीन की मार्केट में अपनी कार से सामान खरीदने आए थे। जैसे ही वह कार से नीचे उतरे अचानक दो युवक आए और उनके गले को पकड़ा लिया। इसके बाद चार-पांच और युवक एक कार से उतरे और विक्रम पर डंडे-बिंडों से हमला कर दिया। आरोप लगाया था कि आरोपियों ने विक्रम की जेब से 20 हजार रुपये भी छीन लिए। हमलावरों ने दोबारा मिलने पर बुरी तरह पीटने की धमकी दी।
पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। इन आरोपियों में मुनियारपुर गांव निवासी विकास जज उर्फ विक्की, मथाना गांव का गौरव, बहरोट गांव का दीपक व राहुल शामिल रहे। मामले में एक आरोपी को पुलिस ने अभी तक प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर यानी पीओ घोषित किया हुआ है।
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ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने सिर्फ चार गवाह पेश किए। इनमें एसआई वजीर सिंह जिन्होंने सिर्फ प्राथमिकी और दस्तावेज साबित किए। दूसरे गवाह ने आरोपियों की पहचान नहीं की। सरकारी वकील ने उसे होस्टाइल घोषित कर दिया। गिरधर लाल और बलजीत सिंह को कथित रूप से स्वतंत्र गवाह के रूप में पेश किया था। उन दोनों ने भी अदालत में अपने बयान बदल दिए। उन्होंने कहा कि गांव में पंचायत हुई थी जिसमें विक्रम ने गौरव व उसके साथियों पर झूठे आरोप लगाए थे। क्रॉस-एग्जामिनेशन में भी कुछ ठोस सबूत नहीं निकला। शिकायतकर्ता ने आरोपियों की पहचान तक नहीं की।
अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपियों की पहचान तक साबित नहीं हुई। अभियोजन पक्ष आरोप को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। अदालत ने कहा कि जब मुख्य गवाह ही प्रॉसीक्यूशन के पक्ष में नहीं खड़ा होता, तो बाकी दस्तावेजों से दोष सिद्ध नहीं होता। इसलिए सभी चार आरोपी को बरी किया जाता है। वहीं पीओ आरोपी संदीप अभी गिरफ्त से बाहर है, इसलिए उसका मामला अलग रखा गया है।
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