संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। मांगों के समर्थन में मंगलवार को भी जिले भर के आढ़ती हड़ताल पर रहे। उन्होंने अनाज मंडियों में रोष मार्च निकाला और विधायकों व उनके प्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे। उन्होंने बुधवार को भी हड़ताल जारी रखने का एलान करते हुए जमकर नारेबाजी की। आढ़तियों ने बैठक कर बुधवार को करनाल में सीएम आवास का घेराव करने के लिए रणनीति भी तय की।
कुरुक्षेत्र अनाजमंडी में सभी एसोसिएशन से जुड़े आढ़तियों ने एकजुटता दिखाते हुए रोष मार्च निकालते हुए सुबह करीब 11 बजे विधायक सुभाष सुधा के आवास का घेराव किया। आढ़ती एसोसिएशन ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रोष प्रकट किया। इसके बाद आढ़ती विधायक सुभाष सुधा आवास पर पहुंचे और रोष जताते विधायक को ज्ञापन सौंपा। सुधा ने उन्हें मुख्यमंत्री से मुलाकात करवाकर उनकी मांगों का समाधान कराने का भरोसा दिया।
मंडी में मौजूद किसानों ने बताया कि आढ़तियों की दिन भर हड़ताल होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। किसानों को कहना है कि सरकार धान खरीद अभी तक शुरू नहीं कर पाई है और अब आढ़ती हड़ताल पर है। इसी बीच मौसम की मार भी उन पर पड़ रही है। ऐसे हालात में सबसे अधिक नुकसान किसान को ही हो रहा है।
अनाजमंडी में धान लेकर आए किसानों के समक्ष मंगलवार को उस समय बड़ी समस्या खड़ी हो गई, जब सुबह ही बारिश शुरू हो गई। इससे बचाने के लिए किसान मंडी में लाई गई धान को बचाने का प्रयास करते रहे। गनीमत रही कि बारिश तेज नहीं हुई। किसानों का कहना है कि न धान बिक रहा है और न मंडी में पर्याप्त सुविधाएं है, जिससे धान को बारिश में भीगने से बचाया जा सके।
किरमच निवासी किसान शिवकुमार ने बताया कि बारिश का मौसम होने से धान खराब होने का भय बना हुआ है। मौसम की मार को देख उन्हें मजबूरन जल्द धान कटाई करानी पड़ रही है। मंडी में आढ़ती हड़ताल पर है, जिसके चलते यहां भी उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है। सरकार को जल्द खरीद शुरू करनी चाहिए।
धान सुखाने की जद्दोजहद करते रहे किसान
अनाज मंडियों में मंगलवार सुबह धान भीग जाने के चलते किसान दिन भर इसे सुखाने के लिए जद्दोजहद करते रहे। अधिकतर किसानों ने धान की ढेरियां ढांकने के लिए अपने स्तर पर प्रबंध किया था। मंडियों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने से किसानों में रोष है।
अनाज मंडी में धान सुखाते मजदूर। संवाद- फोटो : Kurukshetra
विधायक निवास का घेराव करने के लिए जाते आढ़ती। संवाद- फोटो : Kurukshetra
बोली न होने पर धान की फसल तिरपाल से ढककर आराम करता किसान। संवाद- फोटो : Kurukshetra