मुख्य बाजारों से लेकर सेक्टर व अन्य क्षेत्रों में भी दुकानदारों ने स्वयं अपनी दुकानें व प्रतिष्ठान स्वयं बंद कर इसका समर्थन किया तो 35 बिरादरी के सैकड़ों लोग सड़कों पर भी उतर आए। शहर में रोष मार्च निकालते हुए जमकर नारेबाजी व प्रदर्शन किया। पहले से ही तय कार्यक्रम के अनुसार मंच के संयोजक रबजेंद्र सैनी के नेतृत्व में सुबह ही महाराणा प्रताप चौक पर भारी संख्या में लोग एकत्रित हुए। जहां से नारेबाजी कर विशाल जुलूस निकाला गया। जो शहर के छोटा बाजार, मुख्य बाजार, सीकरी चौक, सब्जी मंडी, चक्रवर्ती मोहल्ला व झांसा रोड से होता हुआ पुराने बस अड्डे से जिला सचिवालय पहुंचा।
इसी बीच प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ व बाधित हो रहे यातायात को देख सीटीएम पूजा भारती मोहन नगर स्थित महाराजा अग्रसेन चौक पहुंची और ज्ञापन लिया। इसके बावजूद भी प्रदर्शनकारियों का रोष कम नहीं हुआ और जोरदार नारेबाजी करते हुए जिला सचिवालय पहुंचे। यहां भी उपायुक्त कार्यालय के समक्ष जमकर प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने नाम ज्ञापन सौंपे। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा।
दुकानदारों ने जमकर की नारेबाजी अधिकतर दुकानदारों ने सुबह से ही दुकानें नहीं खोली। जिन लोगों ने दुकानें खोली उन्होंने बंद कराने वालों के निवेदन पर अपनी दुकानें बंद कर दी ओर जुलूस में शामिल हो गए। कई मार्केट एसोसिएशन ने बंद में बढ़-चढ़कर भाग लिया तो अनेकों दुकानदारों ने देर सायं तक भी अपनी दुकानें नहीं खोली। जिसके चलते बाजार प्रदर्शन व जुलुस के बाद सुनसान से दिखाई दिए।
सरकार को हरियाणा बंद का अल्टीमेटमकुरुक्षेत्र बंद से उत्साहित प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने अपनी मांगें रखी और प्रदेश सरकार को अल्टीमेटम दिया और कहा कि इस दौरान मांगें पूरी न होने पर 17 मार्च को हरियाणा बंद किया जाएगा। इसी के साथ ही कई वक्ताओं ने कहा कि 31 मार्च के बाद कड़ा आंदोलन चलाया जाएगा।
एंबुलेंस आई तो खाली कर दी सड़कभारी संख्या में जुलूस निकाल मोहन नगर चौक पर प्रदर्शन कर रहे लोगों ने वहां से जा रही एक एंबुलेंस को देखते ही सड़क खाली कर दी। जिससे एंबुलेंस को तत्काल ही रास्ता मिल गया और उसमें मरीज को लेकर एंबुलेंस रवाना हो गई।
इन्होंने किया प्रदर्शनकारियों को संबोधितराजेंद्र सैनी, राकेश मेहता, दीपक चोपड़ा, प्रदीप झांब, सुरेंद्र गोयल, फतेहचंद गांधी, रामकुमार रंबा, रामरत्न कटारिया, मोहन लाल धीमान, बलबीर प्रजापति, श्यामलाल जोगी, जगननाथ हरियापुर, सतबीर बाल्मीकी, मनोज गोयल, नरेंद्र अग्रवाल, हरिश अरोड़ा व रवि डोडा खेड़ी सहित अन्य लोगों ने भी जिला सचिवालय में उपस्थित प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया।
ये रही मुख्य मांगें1. आंदोलन के दौरान लूटे, तोड़े व जलाए गए प्रतिष्ठानों की भरपाई 10 मार्च से पहले करवाई जाए व 31 मार्च तक पीड़ितों के एक सदस्य को नौकरी दी जाए।2. व्यापारियों का लूटा हुआ सामान 29 फरवरी से पहले लूटेरों से वापिस दिलवाया जाए।3. जिन बीमार लोगों व गर्भवती महिलाओं की आंदोलन के कारण मौत हुई है, उनके परिवार को 25-25 लाख रुपए मुआवजा व सरकारी नौकरी दी जाए।4. उपद्रवियों को देशद्रोही घोषित किया जाए।5. जिस क्षेत्र के लोगों ने अपने क्षेत्र की सरकारी संपत्ति नष्ट की, उसका पुन: निर्माण किया जाए।6. आंदोलन की आड़ में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ व दुष्कर्म करने के आरोपियों को फांसी दी जाए।7. लूटपाट व आगजनी करने के आरोपियों को 29 फरवरी तक गिरफ्तार किया जाए।8. दंगाग्रस्त क्षेत्रों के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।9. दंगा भड़काने वाले लोगों के खिलाफ 10 मार्च तक सख्त कार्रवाई की जाए।10. पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच करवाई जाए।11 आंदोलन में मारे गए उपद्रवियों को आर्थिक मदद न दी जाए।12. आरक्षण से बाहर रहे वर्गों को कारोबार के लिए ऋण देने की नीति सरल की जाए।
लीगल हेल्प डेस्क, फोन सिर्फ बजता है, उठता नहीं जाट आरक्षण के दौरान उपद्रव के शिकार हुए और मधुबन में कथित गैंग रेप के पीड़ितों की मदद के लिए हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेश के हर जिले में हेल्प लाइन नंबर जारी किए गए हैं। लेकिन कुरुक्षेत्र में स्थापित किया गई यह लीगल हेल्प डेस्क महज औपचारिकता ही नजर आई। यहां हेल्प डेस्क का जो नंबर जारी किया गया, वह दिनभर बजता रहा, लेकिन डेस्क पर कोई मौजूद नहीं था। अमर उजाला ने दिनभर इस नंबर पर फोन किए लेकिन किसी ने नहीं उठाया। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हेल्प डेस्क से जवाब नहीं मिलना मामले की गंभीरता को बयान करने के लिए काफी है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के संज्ञान लेने के बाद प्रदेश सरकार ने जाट आंदोलन के दौरान हुए उपद्रव से पीड़ित लोगों के लिए लीगल हेल्प हेस्क की स्थापना की गई। हर जिले के लिए अलग-अलग हेल्प लाइन नंबर जारी किए गए। अमर उजाला ने जब कुुरुक्षेत्र के हेल्प लाइन नंबर की पड़ताल की तो लापरवाही सामने आई।
बजते रहे फोन, उठाने वाला कोई नहींअमर उजाला ने इस नंबर की हकीकत जानने के लिए शनिवार को लगातार फोन किए। दोपहर से शाम तक किसी ने फोन नहीं उठाया। इस मामले में जब अधिकारियों से बात करनी चाही तो अधिकतर अधिकारियों ने फोन ही नहीं उठाए। जब एसडीएम से बात की गई तो उन्होंने बताया कि शनिवार को अवकाश होने की कारण शायद कोई नहीं होगा।
इसलिए जारी किए हेल्पलाइन नंबर गौरतलब है कि शुक्रवार को ही प्राधिकरण के प्रवक्ता ने मीडिया में हेल्प लाईन नंबर जारी किए थे। जिसके साथ ही प्राधिकरण की ओर से हाईकोर्ट के आदेश के बाद की पहल पर यह हेल्प डेस्क स्थापित किए जाने की जानकारी दी गई थी। उन्होंने बताया था कि इस डेस्क पर जारी हेल्पलाइन से उपद्रव के दौरान दुर्व्यवहार व दुराचार से पीड़ित व्यक्ति व उसका कोई संबंधी संपर्क कर सकता है। प्राधिकरण के पास डाक या ईमेल के जरिये भी सूचना दिए जाने की सुविधा दी गई, जिसके बाद आई सूचना को जांच के लिए पुलिस के पास भेजे जाने का दावा किया गया, ताकि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। लेकिन पहले ही दिन इस सुविधा की पोल खुल गई।
शायद छुट्टी के चलते नहीं उठाया फोन... हेल्प लाईन से जवाब न मिलने पर सबसे पहले प्राधिकरण सचिव से बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन वहां भी फोन नहीं उठाया गया। इसके बाद जिला उपायुक्त को फोन किया गया लेकिन उनका नंबर बंद मिला। लैंडलाइन पर फोन किया गया तो वहां से कर्मचारी का जवाब मिला इस बारे में कोई जानकारी नहीं। फिर अतिरिक्त उपायुक्त का मोबाईल व घर का नंबर लगाया गया, वहां भी फोन बजते रहे लेकिन बात नहीं हो पाई। आखिर में एसडीएम सतवीर कुंडू से बात की गई। उन्होंने कहा कि आज छुट्टी का दिन होने के चलते ही शायद हेल्पलाइन नंबर नहीं उठाया गया होगा। जिला उपायुक्त व अतिरिक्त उपायुक्त छुट्टी पर होने के कारण फोन नहीं अटेंड कर पाए होंगे।