कुरुक्षेत्र। हरियाणा सरस्वती विकास बोर्ड सरस्वती नदी को धरातल पर फिर से अविरल बहने और भूमिगत पानी को रिचार्ज करने के लिए काफी अच्छा काम कर रहा है। सरस्वती नदी व इसके तट पर बने तीर्थों का सुंदरीकरण बेहद सराहनीय है। बोर्ड के यह प्रयास सफल रहेंगे और आने वाले चार-पांच सालों में हम सरस्वती नदी को फिर से धरातल पर बहता हुआ देखेंगे।
यह कहना है भारतीय स्पेस रिसर्च सेंटर (इसरो) के सेवानिवृत वैज्ञानिक एवं हरियाणा सरस्वती विकास बोर्ड की तकनीकी कमेटी के सदस्य एके गुप्ता का। वे शनिवार को गांव बिहोली और मरचेहड़ी में सरस्वती नदी के तट पर बनाए गए सरस्वती जलाशयों का निरीक्षण करने के उपरांत बातचीत कर रहे थे। इससे पहले सेवानिवृत वैज्ञानिक एके गुप्ता, हरियाणा सरस्वती विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच, अधीक्षण अभियंता अरविंद कौशिक ने इन जलाशयों का निरीक्षण किया। उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच ने वैज्ञानिक एके गुप्ता को सरस्वती जलाशयों के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की।
एके गुप्ता ने कहा कि सरस्वती बोर्ड के यह प्रयास केवल धरोहर व पर्यटन को विकसित करने के लिए नहीं है, अपितु इससे किसानों व भूमि से जुड़े लोगों को काफी फायदा होगा। सरस्वती नदी के फिर से धरातल पर बहने से इस क्षेत्र की डार्क जोन की समस्या का समाधान होगा, भूमिगत जलस्तर को ओर अधिक रिचार्ज किया जा सकेगा।
वैज्ञानिक एके गुप्ता ने कहा कि सरस्वती बोर्ड के यह प्रयास केवल धरोहर व पर्यटन को विकसित करने के लिए नहीं है, अपितु इससे किसानों व भूमि से जुड़े लोगों को काफी फायदा होगा। सरस्वती नदी के फिर से धरातल पर बहने से इस क्षेत्र की डार्क जोन की समस्या का समाधान होगा, भूमिगत जलस्तर को ओर अधिक रिचार्ज किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि वह देश में अन्य नदियों के किनारों पर इस तरह की जलाशय बनाने की केंद्र व राज्य सरकार से अपील करेंगे ताकि बरसात के पानी को एकत्रित किया जा सके। सरस्वती बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह ने कहा कि बोर्ड द्वारा जलाशयों के निर्माण के साथ-साथ उनका रख-रखाव व सुंदरीकरण का कार्य भी किया जा रहा है।