सोचों, सही गलत को लेकर नोंक कलम की पैनी क्यूं है, बाज अगर है बेकसूर तो चिड़ियों में बैचेनी क्यूं है...। डॉ. दिनेश दधीचि की यह रचना और हम दानी है हम क्षत्रिय हैं हम है कर्मवीर...। हद हुई है पशुता की अब डोल रहा है धीर... जकी के इस गीत से अंदाजा लगाया जा सकता है कि हिंदी दिवस पर कलमकार मंच के कवि सम्मेलन का आलम क्या रहा होगा? कवियों और शायरों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं सुनाकर सामाजिक तानेबाने को श्रोताओं के सामने रखा। अपने स्तर पर कामयाब रहे इस कवि सम्मेलन में गीत, गजलें, कविताएं, व्यंग्य पेश किए गए। जिनका श्रोताओं ने जमकर लुत्फ उठाया।
कलमकार मंच की ओर से बुधवार को केयू के यूनिवर्सिटी कॉलेज में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया था। हिंदी दिवस पर आयोजित इस कवि सम्मेलन में हरियाणा और मप्र के कवियों और शायरों ने अपने कलाम पेश किए। खास बात यह रही है कि आयोजक समूह के कई युवा उभरते कवियों को शुरूआत में मौका दिया। इसके बाद आमंत्रित कवियों ने अपने कलाम सुनाए। सरस्वती वंदना के साथ कवि सम्मेलन की विधिवत शुरूआत हुई। जिसमें कुमार विनोद ने फैशन परस्ती पर तंज करते हुए सुनाया कि फैशन का डिप्लोमा करके लौटी तो, तितली ने भी टैंटू बनवा रखे थे...। सुबे सिंह सुजान ने अपनी भाषा को गुनगुनाता हूं, अपनी भाषा में मुस्कुराता हूं... सुनाकर दाद बटोरी।
गीतकार जकी ने जब मंच संभाला तो पूरे हॉल में खामोशी छा गई। उन्होंने अपने दो गीतों से मुल्क के हालात में तीखे तंज कएि। जकी ने हम दानी है हम क्षत्रिय हैं हम है कर्मवीर, हद हुई है पशुता की अब डोल रहा है धीर। राजनीति का चक्रव्यूह और अभिमन्यु अंधियारे में, धर्म लूट गया गलियों, में ढ़ोंगी बन गए पीर...' से मुल्क के हालात बयां किए। साथ ही उन्होंने 'जिसने हमें दिया है जनम, उसी पर हमने किए सितम ये कैसे वंदे मातरम... गीत सुनाकर अपनी संतान की सताई मांओं का दर्द सांझा किया। इसी तरह शैलेंद्र सिंह ने बादलों ने सहेजा, हवाओं में पला, मुझे दरिया न बनाओ मैं कतरा ही भला... सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। योगेश शर्मा ने नजरे तेरी सूरत से होकर गुजरती है, गरीबी जैसे किसी जरूरत से होकर गुजरती है... गजल सुनाई। सीतेंद्र ने शायद वो ख्वाहिश थी, जरूरत नहीं मेरी, उसे पाकर क्या करार मिले... सुनाई। कपिल भारद्वाज ने जूते सी उधड़ी पड़ी है जिंदगी मेरी... सुनाकर समां बांधा। कार्यक्रम का संचालन मशहूर शायर बालकिशन बेजार ने किया। उन्होंने बेहतरीन शेरों शायरी के साथ दो गजलें भी सुनाई। उनकी परेशानियां मेरी उनसे ना कहना, अगर वो सुनेगा तो परेशां हो जाएगा... को जमकर सराहना मिली। करीब तीन घंटे चले इस कवि सम्मेलन में खासी श्रोता मौजूद थे।