कुरुक्षेत्र। आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में बिजनेस की पुनर्कल्पना केवल एक विचार नहीं बल्कि एक दृष्टि (विजन) है। इस दृष्टि को साकार करने के लिए नवाचार वह माध्यम है जो नए विचारों, नई सोच और नए उद्देश्य को जन्म देता है। भारत स्टार्ट-अप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहल के माध्यम से विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन चुका है। भारत की युवा शक्ति, तकनीकी दक्षता और उद्यमशीलता की भावना उसे वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर कर रही है।
यह उद्गार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग की ओर से व्यापार की पुनर्कल्पना : नवाचार, समावेश और समृद्धि (रि-इमेजिनिंग बिजमेनय इनोवेट, इंक्लूयड एंड थ्राइव) विषय पर सीनेट हॉल में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर व्यक्त किए। कॉमर्स विभाग के अध्यक्ष प्रो. महावीर नरवाल ने दिवसीय संगोष्ठी के बारे में बताया।
कुलपति ने कहा कि व्यवसाय को केवल लाभ के नजरिये से नहीं बल्कि नैतिकता, समावेशन और मानवता के साथ आगे बढ़ाना ही वास्तविक प्रगति का मार्ग है। उन्होंने बताया कि भारतीय विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को जहां मौजूदा सिद्धांतों का अध्ययन करना चाहिए। वहीं उन्हें इन सिद्धांतों को चुनौती देने, पुनर्स्थापित करने और नए दृष्टिकोण से देखने की भी क्षमता विकसित करनी चाहिए।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हमेशा से ही नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहा है और यह सम्मेलन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर में 10 हजार से अधिक विद्यार्थी विभिन्न कार्यक्रमों में अध्ययनरत हैं। विश्वविद्यालय में साइबर सुरक्षा, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में क्षमता निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्य अतिथि गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कौशिक ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में नवाचार (इनोवेशन) ही सफलता की कुंजी है। नवाचार को केवल अपनाने की नहीं बल्कि उत्पन्न करने की आवश्यकता है।
प्रो. संजय कौशिक ने कहा कि समावेशन न केवल सामाजिक दृष्टि से आवश्यक है बल्कि यह व्यवसाय में अधिक लाभप्रदता भी लाता है। जब हर व्यक्ति को विकास की प्रक्रिया में शामिल किया जाता है, तो परिणाम और अधिक स्थायी और सकारात्मक होते हैं।
इंडियन प्रिंटेड सर्किट एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रजनीश कुमार गर्ग ने कहा कि आज के समय में हमें बाजारों को परिष्कृत (रिफाइनिंग) और पुनर्निर्मित (रिनोवेटिंग) करने की दिशा में कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिवेश में बाजार केवल लेन-देन का माध्यम नहीं रहे बल्कि नवाचार और मूल्य सृजन के केंद्र बन चुके हैं।
विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन
वाणिज्य विभाग में तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जहां विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से आए हुए विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की। इस दौरान एक ऑनलाइन क्विज का भी आयोजन किया गया जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ट्रैक एक में डॉ. संजय अरोड़ा और प्रो. जगदीप सिंगला ने अध्यक्षता की, जहां उन्होंने नवाचार और व्यावसायिक रणनीतियों पर चर्चा की। ट्रैक दो में डॉ. सुनील कुमार और डॉ. संदीप सिंह ने नेतृत्व किया जिसमें व्यवसाय में समावेशिता और स्थायित्व पर जोर दिया गया। ट्रैक तीन का संचालन प्रो. मोहिंदर चंद और प्रो. दलबीर सिंह ने किया जिसमें व्यावसायिक शिक्षा और नवाचार के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ।
एडिटर एन्क्लेव सत्र सम्मेलन का एक मुख्य आकर्षण
एडिटर एन्क्लेव सत्र सम्मेलन का एक मुख्य आकर्षण रहा, जहां प्रो. जीवन ज्योति, जीके, और चार्बेल सल्लौम ने शोध प्रकाशन और अकादमिक लेखन पर अपने अनुभव और ज्ञान साझा किए। उनके सत्र ने शोध विद्वानों और अकादमिक समुदाय को प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में अपने शोध प्रकाशित करने के लिए मूल्यवान मार्गदर्शन प्रदान किया।