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एक शिक्षक, बच्चों की पढ़ाने के साथ करता है शौचालय की सफाई

Thu, 28 Jul 2016 01:02 AM IST
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
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रोष प्रकट करते छात्र। - फोटो : अमर उजाला
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एक तरफ जब डिजिटल इंडिया की तस्वीर खींची जा रही है, वहीं दूसरी तरफ गांव टाटका का सरकारी स्कूल शर्मनाक स्थिति में हैं। यहां शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे बच्चे पढ़ाई को तरस रहे हैं। स्वीपर न होने के कारण शौचालयों की स्थिति उपयोग लायक नहीं है। जो शिक्षक हैं, वह ही स्वीपर का काम भी करने को मजबूर हैं। स्कूल हेड से लेकर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी तक को इस स्थिति का पता है, लेकिन अब अपने से ऊपर के अधिकारियों पर बात टाल कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। जब लंबे समय से सुनवाई नहीं हो रही और एक ही शिक्षक से सारे विषय पढ़ने पर मजबूर होना पड़ा तो विद्यार्थियों को ही सड़क पर उतरना पड़ा। बुधवार को इस स्कूल के बच्चों ने जमकर प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
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टाटका के सरकारी स्कूल के विद्यार्थी सरगम, काजल, प्रीति, निधि, नैना, अनमोल, निखिल व अन्य बच्चों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इन विद्यार्थियों की मांग थी कम से कम हर विषय का एक एक शिक्षक तो उनके स्कूल में हो। यहां एक ही शिक्षक सारे विषय पढ़ा देता है। ऐसे में शिक्षक पर भी काम का भारी बोझ और विद्यार्थियों की पढ़ाई का भी नुकसान हो रहा है।

स्वच्छ भारत, स्कूल में आहत
सरकार की ओर से स्वच्छ भारत को लेकर जमकर अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन छात्राओं की अच्छी खासी तादाद होने के बाद भी यहां शौचालय साफ करने के लिए एक अदद स्वीपर नहीं है। ऐसे में छात्राओं ने स्कूल का शौचालय ही उपयोग करना बंद कर दिया है। पिछले सत्र में हर स्कूलों में शौचालय बनाने को लेकर मन की बात में प्रधानमंत्री तक ने जिक्र किया था। इसके बाद प्रदेश भी यह कवायद शुरू भी हुई थी, लेकिन शौचालय साफ करने को लेकर शायद कोई दिशा निर्देश नहीं थे, इसलिए शिक्षा विभाग यहां ढीला पड़ गया। शर्मनाक स्थिति यह है कि स्कूल के शौचालय को शिक्षक खुद साफ करते हैं। यह बात खुद प्राइमरी हेड टीचर कबूल कर रहे हैं। शौचालय के कारण कई विद्यार्थियों ने स्कूल न आने तक की बात कही है।
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डेपूटेशन पर शिक्षक
बच्चों ने बताया कि स्कूल में डेपूटेशन पर अध्यापकों को लगाया हुआ है। दो टीचर शुक्रवार को पढ़ाने के लिए आते है और एक टीचर हफ्ते में 5 दिन साइंस पढ़ाने के लिए स्कूल में आते हैं। बच्चों का कहना था कि उनके विषयों की कोई तैयारी न होने के कारण उन्हें फेल होने का डर सता रहा है। बच्चों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द स्कूल में टीचर भेज कर पढ़ाई सुचारु रूप से शुरू कराई जाए।

स्कूल की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप
अध्यापक जगन्ननाथ ने कहा कि स्कूल में टीचरों की कमी के कारण बच्चों की शिक्षा पर असर पड़ रहा है। उन्होंने ने बताया कि स्कूल के अंदर सामाजिक, इंग्लिश, संस्कृत, हिन्दी, ड्राइंग व अन्य विषय के अध्यापक न होने के कारण बच्चों को एक अध्यापक के द्वारा पढ़ाया जाना मुश्किल है और स्कूल में स्वीपर न होने के कारण स्कूल में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है और स्कूल में बने शौचालय की सफाई खुद टीचर कर रहे है।

कई बार प्रशासन को बताया : सरपंच सरोज
गांव के सरपंच सरोज बाला ने बताया कि स्कूल में स्टाफ की कमी के कारण बच्चों को पढ़ने भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और इस समस्या के बारे में प्रशासन को कई बार अवगत करा चुके है।

आला अधिकारियों को बता दिया है : खंड शिक्षा अधिकारी
 खंड शिक्षा अधिकारी बलजीत सिंह ने कहा कि गांव टाटका में टीचर व सफाई कर्मचारी न होने के कारण एक समस्या बनी हुई है। इसके बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करा चुके है।

उच्च अधिकारियों को जानकारी दी है : जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी प्रविन्द्र कौर ने बताया कि कई स्कूलों में स्टाफ की कमी के बारे में हमें सूचना मिली है और इन स्कूलों में जल्द स्टाफ को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों टीचरों के रिक्त पड़े हैं उन पदों के बारे में उच्च अधिकारियों को जानकारी दी हुई है।
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