कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय का प्रथम दीक्षांत समारोह का आयोजन शुक्रवार को किया गया, जिसमें महिला सशक्तीकरण की झलक दिखाई दी। 126 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें से अधिकांश छात्राएं रहीं। स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले 26 विद्यार्थियों में से 23 बेटियां शामिल रहीं। समारोह में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की सशक्त झलक देखने को मिली, जिसकी सराहना राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने की। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति राष्ट्र के विकास में अहम भूमिका निभा रही है। इसी के साथ विश्वविद्यालय द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में लगाए जा रहे नि:शुल्क चिकित्सा शिविरों, सामुदायिक जागरूकता अभियानों और शोध कार्यों की सराहना की। राज्यपाल ने डिग्री धारकों को डॉक्टर की जगह वैद्य बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि हमेशा आयुर्वेदिक दवा ही लिखना अंग्रेजी मत लिखना।
राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि यह दीक्षांत समारोह केवल उपाधियां प्राप्ति का अवसर नहीं है बल्कि एक नवीन उत्तरदायित्व का आरंभ है। आज जब पूरी दुनिया स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई दिशा तलाश रही है, ऐसे में आयुर्वेद, योग और होम्योपैथी जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि मुझे मालूम हुआ कि जिन विद्यार्थियों को डिग्रियां मिल रही हैं, उनमें से ज्यादातर को सरकारी नौकरी मिल गई है। चिकित्सकों को प्रेरित करते हुए कहा कि आप सिर्फ सरकारी नौकरी तक सीमित न रहें, बल्कि 10 लोगों को नौकरी देने वाले बनें। देश-विदेशों में नया स्टार्टअप स्थापित करने का लक्ष्य रखकर चलें।
मानवता के सच्चे दूत हैं चिकित्सक : बंडारू
राज्यपाल ने कहा कि आप केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और मानवता के सच्चे दूत हैं। आपको समाज के अंतिम व्यक्ति तक अपनी सेवा पहुंचानी है। आज लकवा, कैंसर और किडनी के रोग से परेशान मरीज आज आयुर्वेद की तरफ जा रहे हैं। डॉक्टर को भगवान का स्वरूप माना जाता है। अगर आप अच्छे वैद्य बनेंगे तो निश्चित रूप से रोगी का दर्द और पीड़ा खुद से ठीक हो जाएगी।
इन 26 चिकित्सकों को मिला स्वर्ण पदक
श्री धन्वतरि आयुर्वेदिक कॉलेज चंडीगढ़ से बीएएमएस (सत्र 2018-19) की छात्रा दीपावली, जेआर किसान होमोपैथिक्स मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रोहतक से बीएचएमएस (2018-19) की छात्रा कोमल, श्री कृष्ण राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल कुरुक्षेत्र से एमडी कौमारभृत्य बाल रोग विभाग (2019-20) के छात्र शेषन सिंह, एमडी क्रिया शरीर विभाग (2019-20) की छात्रा मोनिका सिंह, एमडी पंचकर्म विभाग (2019-20) की छात्रा रवीना, एमडी रचना शरीर विभाग (2019-20) की छात्रा रंजलि, एमडी कौमारभृत्य बाल रोग (2019-20) की छात्रा मोनिका गुप्ता, एमडी कौमारभृत्य बाल रोग (2020-21) की छात्रा सुनैना, एमडी क्रिया शरीर (2020-21) की छात्रा पूजा रानी, एमडी पंचकर्म (2020-21) की छात्रा पूजा, एमडी पंचकर्म (2020-21) की छात्रा नैना सरोया, एमएस शल्य (2020-21) के छात्र प्रदीप शर्मा, एमडी कौमारभृत्य बाल रोग (2021-22) की छात्रा उपासना, एमडी क्रिया शरीर (2021-22) की छात्रा साक्षी, एमडी पंचकर्म (2021-22) की छात्रा अंजली कंबोज, एमडी पंचकर्म (2021-22) की छात्रा प्रियंका, एमएस शल्य (2021-22) की छात्रा गुरप्रीत कौर, एमडी आयुर्वेदिक समता एवं सिद्धांत की छात्रा मनप्रीत गहलावत, एमडी द्रव्यगुण विज्ञान की छात्रा रितु, एमडी रस शास्त्र एवं भैषज्य कल्पना की छात्रा सीमा, एमडी रोग निदान एवं विकृति विज्ञान की छात्रा गरिमा आनंद, एमडी स्वस्थवृत के छात्र प्रतीक, एमडी प्रसूति एवं स्त्री रोग की छात्रा सुधि कौशल, एमडी काय चिकित्सा की छात्रा प्रीति गहलावत, एमडी शालाक्य की छात्रा हिमांशी और एमडी अगद तंत्र की छात्रा तन्वी को स्वर्ण पदक पहनाकर सम्मानित किया गया।
आयुर्वेदाचार्य वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा को राज्यपाल ने दी मानद उपाधि
कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह के ऐतिहासिक अवसर पर देश-विदेश में आयुर्वेद की पताका फहराने वाले प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा को आयुष विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (आयुर्वेद संकाय) की मानद उपाधि से अलंकृत किया।
राज वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा को ये उपाधि उन्हें आयुर्वेद को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित करने के लिए प्रदान की गई। उन्होंने इससे देश के कई राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों तथा अंतरराष्ट्रीय हस्तियों की चिकित्सा की है। वे पद्मश्री (1998) और पद्मभूषण (2009) जैसे राष्ट्रीय सम्मानों से विभूषित हो चुके हैं। उन्होंने ये उपाधि सौंपे जाने पर विवि प्रशासन और राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय का आभार जताया।
पद्म भूषण वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा ने नवदीक्षित चिकित्सकों को प्रेरित करते हुए कहा कि आयुर्वेद केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र दृष्टि है। अब जब आप सब डिग्री प्राप्त कर समाज में उतर रहे हैं, तो यह आवश्यक है कि आप शुद्ध और प्रामाणिक आयुर्वेद पद्धति से जनमानस की सेवा करें। उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौर में आयुर्वेद ने जिस प्रभावशीलता और सशक्तता से लोगों को राहत दी, उसने इसकी प्रासंगिकता को फिर से स्थापित किया है। ऐसे में यह हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि हम इस प्राचीन ज्ञान को समर्पण, विश्वास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाएं।
पहले भी मिल चुकी मानद उपाधि
वैद्य त्रिगुणा को लाल बहादुर शास्त्री विद्यापीठ डीम्ड युनिवर्सिटी द्वारा वाचस्पति की मानद उपाधि, गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय, एमिटी यूनिवर्सिटी (नोएडा), बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय (रोहतक) श्री श्री विश्वविद्यालय, कटक (ओडिशा) द्वारा भी मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। यही नहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका के केंटुकी के गवर्नर द्वारा भी केंटुकी कर्नल की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया था। श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्री ने आयुर्वेद कीर्ति की मानद उपाधि, हॉलैंड में भी महर्षि धन्वन्तरि अवार्ड अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन द्वारा आयुर्वेद महर्षि तथा श्री इंद्रप्रस्थीय वैद्य सभा द्वारा भी मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में आयोजित प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित करते राज
कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में आयोजित प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित करते राज