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रेलवे ने पौने घंटे बाद दी फायर ब्रिगेड को कालका मेल में आग की सूचना

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र। एक लोको पायलट की सूझबूझ से कालका मेल बर्निंग ट्रेन बनने से बच गई। दूसरी ओर, इस आपात स्थिति ने रेलवे सुरक्षा और प्रबंधों की भी पोल खोली।
कालका से हावड़ा की ओर बढ़ रही इस ट्रेन में शाहाबाद स्टेशन से निकलने के कुछ देर बाद आग लग गई थी। ट्रेन को 2 बजकर 55 मिनट पर गांव धीरपुर के निकट रोका गया। तब इस ट्रेन की जनरल पैसेंजर एवं पार्सल बोगी में आग की लपटें प्रचंड हो चुकी थीं। लोको पायलट ने बोगी को ट्रेन से अलग किया। मगर दमकल केंद्र में रेलवे की ओर से सूचना करीब पौने घंटे बाद 3 बजकर 40 मिनट के बाद मिली। उधर बोगी से कूदे यात्री मदद के लिए करीब डेढ़ घंटे तक भटकते रहे। यात्री विनोद सोनकर ने बताया कि वह बच्चों, महिलाओं और परिवार की बुजुर्ग महिला के साथ झाड़ियों में भटकते रहे। करीब डेढ़ घंटे बाद एंबुलेंस पहुंची।
दमकल केंद्र के रिकॉर्ड के अनुसार, उन्हें पहली सूचना साढ़े तीन बजे पीसीआर नंबर-एचआर-65 पर तैनात हवलदार चंद्रपाल ने दी थी। फायर ब्रिगेड की पहली गाड़ी 3.31 बजे रवाना की गई। दूसरी गाड़ी को 3.35 बजे रवाना किया गया। 3.40 बजे रेलवे ने दमकल केंद्र को सूचना दी। इसके बाद दीसरी गाड़ी रवाना की गई।
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सगाई कर लौट रहा था सोनकर परिवार, 35 तोले सोना नष्ट
कालका में सगाई करके दिल्ली लौट रहे सोनकर परिवार का 35 तोले सोना, कीमती सामान, कपड़े, मोबाइल सब कुछ बर्निंग ट्रेन में खत्म हो गया। परिवार की बेटी का रिश्ता कालका में हुआ था। यहां सगाई के बाद सोमवार शाम पांच बजे वापसी थी। लेकिन, कार्यक्रम लेट हो गया और वे रात को कालका-हावड़ा एक्सप्रेस ट्रेन से वापसी के लिए बैठे थे। परिवार के करीब 14 लोग सगाई में गए थे। इनमें ज्यादातर महिलाएं थीं, जिन्होंने सारे गहने छीनाझपटी के डर से उतारकर बैग में रखे थे। इनके मुताबिक भगवान ने इस भयानक हादसे में सभी की जान बचा दी यही बहुत बड़ी कृपा है। वह तो इस घटना के बाद अपना दूसरा जन्म मान रहे हैं।

माता के जागरण से घर लौटते समय सुनाई दी चीख पुकार
धीरपुर के निकट डेरा गंडा सिंह वासी श्रवण बाजवा ने बताया उनके गांव मंदिर में माता का जगराता था। वह जगराते से घर लौट रहे थे। इसी दौरान उन्हें काफी दूर आग की रोशनी में धुआं उठता दिखा और चीख-पुकार सुनाई दी। वह तेजी से घटनास्थल की ओर बढ़े थोड़ा नजदीक पहुंचने पर ट्रेन की एक बोगी में आग की लपटें उठती दखिाई दीं।

घर पर था, मगर फर्ज निभा गया पंचकूला का हवलदार
मूल रूप से जिला कुरुक्षेत्र वासी हरियाणा पुलिस के हवलदार और पंचकूला पुलिस लाइन में तैनात श्रवण सिंह बाजवा अपने गांव आया हुआ था। उसने एंबुलेंस का इंतजार करने की बजाय, दम घुटने से बेहोश हुई दो महिलाओं को अपनी कार में कुरुक्षेत्र के अग्रवाल अस्पताल पहुंचाया। उसने अपने एक अन्य दोस्त को भी फोन कर उसकी गाड़ी मंगाई और दो बच्चों और एक महिला को भी अस्पताल पहुंचाया गया।

भयावह मंजर के बीच चारों दरवाजों से कूदे यात्री
श्रवण बाजवा के मुताबिक, घटनास्थल पर काफी भयावह मंजर था। ट्रेन की एक बोगी भीषण आग की लपटों से घिरी थी। दूसरी ओर बच्चों, महिलाओं और लोगों के चीखने की आवाजें सुनाई दे रही थीं। यात्री ट्रेन के चार दरवाजों से कूद रहे थे।

बुआ के ऊपर से गुजरते रहे यात्री
ट्रेन में सवार दिल्ली वासी अजय सोनकर के मुताबिक उनकी बुआ ट्रेन से बाहर निकलने की भगदड़ में अंदर ही नीचे गिर गई। अन्य यात्री अपने बचाव में उसके ऊपर से निकलते रहे। बड़ी मुश्किल से उसकी बुआ की जान बची।

सर्दी की वजह से बंद थीं खिड़कियां...
गांव अढौनी वासी परमजीत व श्रवण ने बताया कि सर्दी के कारण बोगी की सभी खिड़कियां बंद थीं। ट्रेन से बाहर निकले लोग शोर मचाकर अपने साथियों और अन्य यात्रियों को बाहर निकलने को कह रहे थे। लेकिन कौन कहां है, इसका अंदाजा नहीं हो रहा था। आखिर में दो महिलाएं ट्रेन में फंस गईं। इन्हें बड़ी मुश्किल से खिड़की खोलकर निकाला गया।

एसएस की शिकायत पर जीआरपी में डीडीआर
जीआरपी के एसएचओ सतबीर सिंह ने बताया कि कुरुक्षेत्र रेलवे जंक्शन के अधीक्षक एसएन गुप्ता की सूचना पर इत्तेफाकिया हादसे की डीडीआर दर्ज की गई है। जांच जारी है। प्रथम दृष्टया इस घटना के पीछे शॉर्ट-सर्किट की संभावना स्टेशन सुपरिंटेंडेंट ने जताई है।
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तीन घंटे बाधित रहा रेल ट्रैफिक
घटना के बाद तीन घंटे तक रेल यातायात बाधित रहा। स्टेशन अधीक्षक के मुताबिक, इस दौरान चार ट्रेनों को रास्ते में ही रोकना पड़ा। 18101 मूरी एक्सप्रेस, 12686 संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, 14012 दिल्ली एक्सप्रेस और 12446 एक्सप्रेस तीन-तीन घंटे लेट रहीं।
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