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बंद कराने को कुरुक्षेत्र के जिला कांग्रेस भवन में जुटे चंद कांग्रेसी

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बंद कराने को कुरुक्षेत्र के जिला कांग्रेस भवन में जुटे चंद कांग्रेसी
- बंद कराने में बड़े चेहरों का नहीं दिखा दिखा प्रभाव, कार्यकर्ता मायूस
- विरोधी दलों के नेताओं ने चुटकी, बोले कांग्रेस के पास संगठन नहीं सारे हैं टिकटार्थी
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। नेतृत्वहीन होने की वजह से कांग्रेस के आह्वान पर भारत बंद जिले में फ्लॉप रहा। टिकट के लिए कांग्रेस में लंबी कतार पेट्रोल-डीजल की आसमान छू रही कीमतों का विरोध करने के लिए जिले में सड़कों पर नजर नहीं आई। हालांकि पिछले दिनों में कांग्रेस के अलग-अलग धड़ों द्वारा आयोजित रैलियों में जितना हुजूम उमड़ा, उसका एक प्रतिशत भी जिले में इस बंद को सफल कराने को आगे नहीं आया।
विरोधी दलों के नेताओं ने भी इस बंद की विफलता पर खूब चुटकियां लीं। इनका कहना है कि कांग्रेस के पास संगठन नहीं सिर्फ टिकटार्थी हैं और टिकटार्थियों के पास रैलियों में ले जाने के लिए कार्यकर्ता नहीं भाड़े की भीड़ बची है। इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने कहा कि प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को नकार कर ही भाजपा को अवसर दिया था, लेकिन भाजपा और कांग्रेस से लोगों की उम्मीद टूट चुकी है। इसका प्रमाण सोमवार का बंद है। उन्होंने कहा कि शनिवार को इनेलो ने एसवाईएल के मुद्दे पर जो बंद कराया था, उसमें जनता ने इनेलो को पूरा सहयोग दिया था, वहीं कांग्रेस की बंद की अपील को व्यापारी वर्ग ने ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अनेक धड़ों में बंट चुकी है, यही कारण रहा कि कांग्रेस आलाकमान के फैसले के बावजूद बंद को सफल बनाने के लिए कांग्रेस नेतृत्व नदारद रहा। वहीं लाडवा के विधायक डॉ. पवन सैनी ने फोन पर बताया कि शनिवार को इनेलो और सोमवार को कांग्रेस के बंद की पोल खुल गई। इससे साफ है कि प्रदेश की जनता इन दलों की असलियत और भाजपा के सबका साथ सबका विकास को समझती है। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव पवन गर्ग ने बताया कि वह पार्टी पदाधिकारी होने की वजह से करनाल जिला के प्रभारी भी हैं,इ स नाते उनकी ड्यूटी करनाल में थी, इसकी वजह से वह कुरुक्षेत्र में नहीं थे। वहीं उन्होंने करनाल जिला में कार्यकर्ताओं के साथ बंद कराने का प्रयास भी किया,लेकिन शांतिपूर्वक बंद के आग्रह को अधिकांश दुकानदारों ने स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि इनेलो पर बंद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस का हंगामा करने का कल्चर नहीं रहा, शांतिपूर्वक बंद कराने का प्रयास कार्यकर्ताओं ने जरूर किया था।
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थानेसर में मोहननगर चौक की कुछेक दुकानें बंद कराई
प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी के पूर्व सदस्य लक्ष्मीकांत शर्मा के नेतृत्व में दर्जन भर कार्यकर्ता कांग्रेस भवन में एकत्रित हुए, जहां एक बैठक का आयोजन किया गया। इसके बाद उन्होंने मोहन नगर चौक पर दुकानें बंद कराईं। इस दौरान मेहर सिंह रामगढ़, जगबीर जोगनाखेड़ा, दीप सैनी, शमशेर कश्यप, बलजीत सिंह, शिवचरण शर्मा, गोबिंद, संतोष पांचाल, निशी गुप्ता, दीपा शर्मा व रेखा आदि कार्यकर्ता भी शामिल रहे।

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शाहाबाद में कांग्रेस बंद का रहा मिलाजुला असर
थानेसर, पिहोवा, लाडवा में भले बंद पूरी तरह से बेअसर रहा, लेकिन शाहाबाद में इसका मिलाजुला प्रभाव जरुर दिखा। कांग्रेस कार्यकर्ता जहां अपने-अपने गुटों में नगर को बंद करवाने की कवायद में लगे रहे। वहीं कांग्रेस की गुटबाजी एक बार फिर उभर कर सामने आई। कांग्रेस नेत्री बिमला सरोहा के नेतृत्व में कार्यकर्ता देवी मंदिर से मेन बाजार में निकले और दुकानदारों से दुकानें बंद करने की अपील की। बंद में प्रेम हिंगाखेडी, वीरेंद्र कुमार, कुलविंद्र ढकाला ने भी दुकानदारों से दुकानें बंद रखने की अपील की।

लाडवा में भी बंद रहा विफल
लाडवा मुख्य मार्ग मार्केट बंद के बावजूद पूरी तरह से खुली रही। जबकि मेन बाजार और संगम मार्केट की कुछेक दुकानों को कांग्रेसी नेता संदीप गर्ग व कंवरदीप सैनी के 15-20 समर्थकों ने बंद कराने का प्रयास किया, लेकिन कुछ देर तक दुकानें बंद करने के बाद सभी दुकानें खोल दी गईं। लाडवा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ चुकीं पूर्व सांसद कैलाशो सैनी के अलावा पूर्व विधायक रमेश गुप्ता, प्रदेश महासचिव पवन गर्ग, पूर्व जिप चेयरमैन मेवा सिंह का नेतृत्व बंद कराने के लिए कार्यकर्ताओं को नहीं मिला। हालांकि मनदीप तूर, धर्मपाल, गौरव, अमरजीत सिंह, नरेश मित्तल, राकेश मित्तल, प्रमोद कुमार, राकेश गोयल, जसबीर सिंह, राजेन्द्र यारा व सन्नी बंद कराने के लिए प्रयासरत जरुर दिखे।

एक दिन पहले रैली में हुजूम,अगले दिन बंद कराने सभी गुम
पिहोवा के बाजार सामान्य दिनों की तरह खुले रहे। खास बात यह रही कि मार्केट बंद कराने के लिए कांग्रेस के बड़े नेता और कार्यकर्ता मार्केट में नहीं पहुंचे। हालांकि एक दिन पहले युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतविंद्र सिंह टिम्मी ने बंद को सफल कराने के लिए अपील थी। जबकि रविवार को जनक्रांति यात्रा रैली में पिहोवा पहुंचे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी सुबह नौ से 3 बजे तक दुकानें बंद रखने की अपील की थी, लेकिन अगले ही दिन यह अपील काम नहीं आई।
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बंद बेअसर होने का तीसरा कारण ये भी
बंद के विफल होने के पीछे नेतृत्व का अभाव और धड़ेबंदी के अलावा तीसरा बड़ा कारण शनिवार को इनेलो का बंद और अगले दिन रविवार की छुट्टी भी रही। दरअसल, इसकी वजह से पिछले दो दिनों से मार्केट प्रभावित रही थी। व्यापारी तीसरे दिन भी बाजार बंद कर दुकानदारी को खराब करने के मूड में नहीं थे, यह भी एक बड़ा कारण रहा कि कांग्रेस के इस बंद को व्यापारी वर्ग ने नजरअंदाज कर दिया। खुद कई कांग्रेसी नेता भी इस बात को मानते हैं कि बंद का आह्वान करने से पहले योजनाबद्ध तरीके से तैयारी नहीं की गई, जिसकी वजह से बंद बेअसर हुआ।
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