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सुविधा- आयुर्वेदिक अस्पताल में शुरू हुई 7 नई ओपीडी

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फोटो 14,15
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सुविधा- आयुर्वेदिक अस्पताल में शुरू हुईं सात नई ओपीडी
- अब सभी 14 ओपीडी चलने से मरीजों को मिली बड़ी राहत
- लंबे समय से अटकी थी सुविधा, मरीज लौट रहे थे बैरंग
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में मरीजों को अब अधिकतर रोगों का इलाज मिल सकेगा। उन्हें यह सुविधा देने के लिए अस्पताल में सात नई ओपीडी शुरू की गई है, जिसके चलते अब अस्पताल में कॉलेज के सभी 14 विभागों की ओपीडी होने लगी है। नई ओपीडी शुरू करने के बाद अस्पताल की ओपीडी संख्या में भी करीब डेढ़ गुना बढ़ौतरी हो गई है तो वहीं मरीजों को बिना ईलाज के बैरंग लौटने को भी मजबूर नहीं होना पड़ रहा है। सभी ओपीडी शुरू करने की आयुष विश्वविद्यालय शुरू होने के बाद पहली बड़ी योजना थी, जिसे अब अमलीजामा पहनाया जा सका है। आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ बलदेव धीमान ने नई ओपीडी शुरू करने की योजना का प्रारूप मार्च माह में अपने पदग्रहण करने के तत्काल बाद ही विभाग को भेजा था। जहां से मंजूरी मिलने के बाद अब यहां सात नई ओपीडी शुरू कर दी गई जबकि अस्पताल में पहले भी इतनी ही ओपीडी अलग-अलग विभागों व रोगों से संबंधित चल रही थी। नई ओपीडी शुरू होने से मरीजों को बड़ी राहत मिली है तो अब अस्पताल में अन्य सुविधाएं बढ़ने की संभावना भी प्रबल हो गई है।

आयुष विश्वविद्यालय बना तो बढ़ पाई ओपीडी
अस्पताल में ओपीडी बढ़ाए जाने की सुविधा यहां श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद ही मिल पाई है। बताया जा रहा है कि इससे पहले इसके लिए सार्थक प्रयास नहीं किए जा सके, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ा। अस्पताल के चिकित्सकों की मानें तो विश्वविद्यालय न बनता तो शायद ही नई ओपीडी शुरू हो पाती जबकि नई ओपीडी शुरू करने की बेहद जरूरत थी।
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ये नई ओपीडी हुई शुरू
- रस शास्त्र, अंगतंत्र, समहिता सिद्धांत, रचना शरीर, क्रिया शरीर, द्रव्यगुण व रोग निदान।

पहले से चल रही ओपीडी
- काया चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, बाल रोग, शल्य तंत्र, प्रसूति तंत्र, पंचकर्मा व स्वास्थ्यवृत

ओपीडी बढ़ने से मरीजों को मिलेगी अधिक सुविधा : रजिस्ट्रार
आयुष विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार कृष्ण कुमार जाटियान का कहना है कि नई ओपीडी शुरू करने से मरीजों को बड़ी राहत मिली है। जहां पहले सात ओपीडी चलाई जा रही थी वहीं अन्य ओपीडी न होने के कारण अनेकों मरीजों को बिना ईलाज के वापस जाना पड़ता था। ओपीडी बढ़ाने के साथ-साथ अस्पताल में मरीजों के लिए दूसरी आवश्यक सुविधाएं भी जुटाए जाने के प्रयास किए जा रहे है।
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