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शनिवार को चंद्र ग्रहण की काली छाया में आरंभ होगा भगवान शिव का अति प्रिय माह श्रावण

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चंद्रग्रहण की काली छाया में आरंभ होगा भोले का प्रिय माह सावन
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- श्रावण में हर दिन होगा भगवान शिव का अखंड रुद्राभिषेक व भव्य शृंगार
- प्रवेश द्वार व भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन पर्वत उठाए झांकी होगी बेहद खास
- दीमक की बांबी की मिट्टी से बने पार्थिव शिवलिंग की होगी पूरे माह पूजा, 24 अगस्त को निकलेगी विशाल शोभायात्रा
फोटो नंबर - 16,17, 18
सुनील धीमान
पिहोवा। भोलेनाथ का अतिप्रिय माह सावन, शनिवार को चंद्रग्रहण की काली छाया में शुरू हो रहा है। इसमें भगवान शिव की पूजा-अर्चना से सभी कष्ट दूर होंगे। प्राचीन संगमेश्वर धाम मंदिर में श्रावण माह में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिर के व्यवस्थापक महंत विश्वनाथ गिरी ने बताया कि हर दिन दूध, दही, घी, गंगा जल, गन्ने का रस, शहद एवं भस्म से भगवान शिव का अखंड रुद्राभिषेक होगा। इसके अलावा बिल्वपत्र से विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। श्रावण माह में हर शाम को फल, फूल, मिठाई, ड्राई फ्रूट, रंग, सब्जी, अनाज, चावल तथा गेहूं से भगवान शिव का भव्य शृंगार होगा। वैसे तो भगवान शिव मात्र एक लोटा जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं, लेकिन श्रावण माह में विशेष रूप से अनेक प्रकार से पूजा की जाती है। मंदिर में अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा करने पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए सेवा दल की ओर से कई दिन पहले तैयारियां शुरू कर दी गईं थीं।

पार्थिव शिवलिंग की होगी पूजा
मंदिर के महंत विश्वनाथ गिरी ने बताया कि श्रावण माह में हर दिन पार्थिव शिवलिंग की पूजा की जाएगी। दीमक की बांबी से लाई मिट्टी से शिवलिंग तैयार होगा। अर्चना के बाद शिवलिंग का विजर्सन होगा। पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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दीमक के बीच से मिला था शिवलिंग
यहां शिवलिंग दीमक की बांबी के बीच से मिला था। महात्मा गणेश गिरी अपने शिष्यों के साथ झाड़ियों की तरफ घूम रहे थे। वहां उन्हें घास के बीच एक दीमक की बांबी दिखाई दी, जिसे चिमटे से कुरेदकर देखा तो उनका चिमटा किसी ठोस चीज से टकराया। बांबी को हटाकर देखा तो उन्हें यहां बड़ा सुंदर और तेजस्वी शिवलिंग दिखाई दिया। इस शिवलिंग को यहां से उखाड़कर किसी साफ स्थान पर स्थापित करने के लिए खुदाई की तो शिवलिंग का अंतिम छोर नहीं मिला। तब भगवान शिव की प्रेरणा से शिवलिंग को वहीं स्थापित कर दिया गया। इसके बाद 1946 में मंदिर का निर्माण पूरा हुआ।

कालसर्प दोष के निवारण के लिए विशेष पूजन
पंडित शंभूदत्त गौतम ने बताया कि 28 जुलाई से श्रावण माह का शुभारंभ होगा। संगमेश्वर महादेव मंदिर में कालसर्प दोष से युक्त व्यक्ति को विशेष पूजना-अर्चना कराने से दोष का निवारण होगा। राहु को अधिदेवता काल और केतु को प्रत्यधि देवता सर्प माना गया है। चंद्रग्रहण का असर भी देखने को मिलेगा। इससे आपसी द्वेष बढ़ेगी।

सूर्योदय के बाद श्रावण होगा शुरू
नृसिंह ज्योतिष मठ के संचालक पंडित श्याम सुंदर कौशिक ने बताया कि सनातन संस्कृति में सूर्योदय के बाद ही अगली तिथि का आगमन माना जाता है। चंद्रग्रहण 27 जुलाई को रात 11:54 से शुरू 28 जुलाई 03:49 को समापन होगा। 28 जुलाई को 5:43 पर सूर्योदय होगा, तब तक चंद्रग्रहण समाप्त हो चुका होगा। सूर्योदय के साथ ही प्रतिपदा तिथि का आगमन और श्रावण मास का शुभांरभ होगा।

9 अगस्त को कांवड़िये चढ़ाएंगे जल
प्रबंधक भूषण गौतम ने कहा कि 9 अगस्त रात्रि 12 बजे के बाद कांवड़िये जल चढ़ाएंगे। कांवड़ियों के लिए रात्रि 12 बजे मंदिर के द्वार खुले रखे जाएंगे। मंदिर की ओर से त्रयोदशी पर रक्तदान शिविर एवं नि:शुल्क जांच शिविर लगाया जाएगा। मंदिर में बुजुर्गों, दिव्यांग एवं कांवड़ियों के जल चढ़ाने के लिए विशेष व्यवस्था रहेगी।

24 अगस्त को निकलेगी शोभायात्रा
मंदिर व्यवस्थापक महंत विश्वनाथ गिरी ने बताया कि 24 अगस्त को विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी। यह मंदिर प्रागंण से शुरू होकर विभिन्न रास्तों से होते हुए सरस्वती के पावन तट पर संपन्न होगी। सरस्वती पर पार्थिव शिवलिंग की पूजा अर्चना के बाद पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन किया जाएगा।

भगवान श्रीकृष्ण दिखेंगे गोवर्धन पर्वत उठाए
संगमेश्वर धाम मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण गोवर्धन पर्वत उठाए हुए दिखेंगे। उड़ीसा से आए कलाकार इस विशेष झांकी को तैयार कर रहे हैं। झांकी तैयार करने में करीब 6 मास का समय लगेगा। मंदिर के प्रवेश द्वार के सामने इस झांकी को स्थान दिया गया है। मंदिर प्रागंण में समुद्र मंथन की झांकी भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
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दक्षिण भारतीय शैली का होगा प्रवेश द्वार
महंत विश्वनाथ गिरी ने बताया कि मंदिर का प्रवेश द्वार दक्षिण भारतीय शैली का होगा। नीलकंठ महादेव मंदिर की तर्ज पर इसे तैयार किया जा रहा है। ओडिशा से आए कलाकार प्रवेश द्वार तैयार कर रहे हैं। नीलकंठ महादेव मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा लगी हुई है। पहले यहां भी भगवान गणेश की प्रतिमा को ही लगाया जाना था, लेकिन बाद में इस डिजाइन को बदल कर प्रवेश द्वार पर भगवान गणेश की जगह आदिगुरु शंकराचार्य की प्रतिमा लगाई जाएगी। आदिगुरु के साथ उनके चार शिष्य भी होंगे।
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