श्रद्धालुओं ने सुनी झूलेलाल अमरकथा
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। गोशाला बाजार स्थित श्रीझूलेलाल मंदिर में शुक्रवार को झूलेलाल अमरकथा सुनाई गई। पिछली कथा से आगे का वर्णन करते हुए व्यवस्थापक रामलाल ठाकुर ने कहा कि लालसाईं के शिष्यों ने सिंधु नदी किनारे पहुंच कर देखा कि वहां एक सुंदर विशाल मंदिर बना हुआ है। वहां सिंहासन पर उडेरोलाल साईं विराजमान हैं। लालसाईं के दर्शन पाकर सभी श्रद्धालु प्रसन्न हुए और उन्होंने जयकारे लगाए।
लालसाईं ने उनसे कहा कि जब तक बादशाह मिरखशाह को सद्बुद्धि नहीं आती, तब तक तुम लोग यहीं रहोगे। उधर, बादशाह को जब इस बात का पता चला तो उसने अपनी सेना को आदेश दिया कि उन्हें बंदी बना कर लाओ। जब बादशाह की सेना उन्हें पकड़ने पहुंची, तो अचानक अग्नि की लपटों से सेना घिर गई और उनके शरीर जलने लगे। सारी सेना वापस महल की ओर भागने लगी। तब आंधी-तूफान से चारों ओर अंधकार छा गया। बादशाह मिरखशाह और उसकी सेना भागने लगी। अगले दिन जब बादशाह ने इस बात की चर्चा अपने दरबारियों से की तो उन्होंने उसे सुझाव दिया कि वह अपनी जिद छोड़ कर लालसाईं से माफी मांगे। तभी हमें इस मुसीबत से छुटकारा मिलेगा। झूलेलाल आरती में महेंद्र ठाकुर, महेश ठाकुर, वेद भाटिया, संजय मुटरेजा, रवि, सन्नी, शंकरलाल ठाकुर, राजू, राजेंद्र अग्रवाल, पंकज, वीरभान, ताराचंद पंडित, मंजू, भारती, शशी वर्मा, सोनिया मुटरेजा, पूजा, लवली और लाजवंती ग्रोवर मौजूद रही।