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डीजल के फेर में पहले दिन छाया शिल्पकारों की उम्मीदों पर अंधेरा

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डीजल के फेर में पहले दिन छाया शिल्पकारों की उम्मीदों पर अंधेरा
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
करोड़ों के बजट वाले अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में डीजल बचाना का प्रयास शिल्पकारों पर भारी पड़ गया। पहले ही दिन महोत्सव की रंगत फीकी पड़ गई। इन हालात के चलते स्टालों पर अंधेरा पसरा दिखा। कई दिनों से लगातार चेताने के बावजूद आयोजक नहीं जागे और पहले ही दिन इसका खामियाजा क्राफ्ट मेले में देशभर से आए 200 से अधिक शिल्पकारों ने भुगता। दुकानों पर अंधेरे में बैठे शिल्पकारों का सबसे बड़ा डर चोरी का था। दो दशक में संभवत: यह पहली बार था कि गीता जयंती उत्सव के अधिकांश सरकारी निमंत्रण कार्ड उद्घाटन होने पर भी नहीं बंट सके।
बदहाली का आलम ये है कि अंतरराष्ट्रीय महोत्सव शुरू होने के बाद भी अधिकांश काम अधूरे हैं। महाआरती स्थल पर अभी तक काम चल रहा है। ब्रह्मसरोवर के द्रोपदी कूप, पुरुषोत्तमपुरा बाग के पत्थर उखड़े हुए हैं। शहर की लाइफ लाइन नंदाजी मार्ग पर बने देवीलाल पार्क के पास ग्रीन बेल्ट का निर्माण पांच दिन पहले शुरू हुआ था। यह भी पूरा नहीं हुआ है। इस मेन चौक पर पड़े पत्थरों की वजह से छोटे वाहन दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। यह सब कुछ तब हो रहा है, जबकि इस उत्सव की तैयारी पिछले करीब एक साल से हो रही है। इस बारे में संबंधित अधिकारी का कहना है कि जनरेटर में डीजल के साथ लाइटिंग का ठेका दिया गया था। ठेकेदार ने डीजल बचाने के चक्कर में जनरेटर शुरू नहीं किया। मामला अभी संज्ञान में आया है, केडीबी की सीईओ पूजा चांवरियां को इस बारे में बता दिया गया है। उन्होंने एक टीम मौके पर भेज दी है। जल्द लाइट शुरू करा दी जाएगी। ठेकेदार को चेतावनी दी जाएगी कि तीन दिसंबर तक इस तरह की खामी नहीं मिलनी चाहिए।
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जिनके सेंटर का उद्घाटन उन्हें निमंत्रण तक नहीं
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव पर सरस और शिल्प मेले के उद्घाटन के बाद मेला क्षेत्र में मीडिया सेंटर का उद्घाटन भी हुआ। यहां जिन मीडिया कर्मियों के लिए सेंटर तैयार किया जा रहा था। उन्हें सरस मेले और शिल्प मेले के निमंत्रण कार्ड तक नहीं मिले। जिला लोक संपर्क अधिकारी धर्मवीर सिंह ने तर्क दिया कि विभाग को गीता जयंती के निमंत्रण कार्ड वीरवार रात को ही प्राप्त हुए थे। इसलिए नाम लिखने और भेजने में चूक हो गई।
...और टल गई राजभवन में होने वाली बोर्ड की बैठक
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के प्रबंधों पर खड़े हो रहे सवालों का ठीकरा अब उन हालात पर फोड़ा जा रहा है, जिनके चलते हरियाणा राजभवन में होने वाली बोर्ड की बैठक टल गई। दरअसल, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के करीब पांच दशकों के इतिहास में 2016 तक 80 बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में केडीबी से संबंधित खास विषयों पर चर्चा के साथ बैठक में रखे गए प्रस्तावों पर मुहर लगती है। वर्ष 2016 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती से करीब पांच माह पहले 18 जुलाई 2016 को हरियाणा राजभवन चंडीगढ़ में राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी की अध्यक्षता में 80 वीं बैठक आयोजित की गई थी। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की बैठक में 18 बिंदुओं पर चर्चा के साथ महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद की संस्था को गीता ज्ञान संस्थानम के लिए कुरुक्षेत्र में केडीबी द्वारा एक साल पहले दी गई छह एकड़ भूमि के साथ ही तीन एकड़ और भूमि देने, बोर्ड में पहली बार मानद सचिव का पद सृजित करने, बजट और अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती से संबंधित विषयों पर मुहर लगी थी।

मनोनीत केडीबी सदस्यों की टीस
फीका आगाज, निमंत्रण से लेकर प्रबंधों तक बरती गई लापरवाही को देख केडीबी मेंबरों दर्द सामने आ रहा है। जाहिर है कि गीता जयंती महोत्सव में मुख्य आयोजक केडीबी पिछले दो दशकों से अहम रोल निभा रहा है। मगर 2017 में अब तक के सबसे अधिक बजट और दूसरे देशों की सहभागिता वाले इस आयोजन से पहले बोर्ड के अध्यक्ष और राज्यपाल की अध्यक्षता में बैठक के न होने का मलाल बोर्ड के सदस्यों को है। बता दें कि मौजूदा सरकार ने पहली बार कुरुक्षेत्र के अलावा पानीपत, करनाल, जींद और कैथल सहित कुल 10 सदस्यो को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड में गैर सरकारी सदस्य मनोनीत किया है।
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राज्यपाल की अध्यक्षता में बोर्ड की बैठक की जगह नई परंपरा
बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता राज्यपाल करते रहे हैं। केडीबी के उपाध्यक्ष मुख्यमंत्री, राज्यपाल के सचिव, सरकार के सभी सहायक मुख्य सचिव, डीसी, सीईओ केडीबी, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के कुलपति, बोर्ड के तमाम सरकारी और गैर सरकारी सदस्य पिछले साल तक इस बैठक में शामिल होते रहे हैं। गीता महोत्सव से पहले 2017 में राज्यपाल की अध्यक्षता में होने वाली 81 वीं बैठक नहीं हुई। इस बैठक जगह अंतरराष्ट्रीय महोत्सव-2017 के लिए बोर्ड के सिर्फ तीन गैर सरकारी सदस्यों की बैठक सरकार के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में होने की पुष्टि अन्य गैर सरकारी सदस्य जरूर करते हैं। इसे नई परंपरा शुरू करने से भी जोड़ा जा रहा है। इस बैठक क्या हुआ। उसके बाद की दो अन्य बैठकों में क्या हुआ, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
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