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द जर्नी ऑफ सोरो में दिखी किसानों की पीड़ा, भावुक हुए दर्शक

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र।
जब एक रंगकर्मी रंगमंच को समर्पित होकर नए ढंग से किसी विषय को प्रस्तुत करता है तो आम दर्शक उस प्रस्तुति के कायल जरूर होते हैं। ऐसा ही देखने को मिला मैक की भरतमुनि रंगशाला में। मैक में अक्सर नाटकों का मंचन होता रहता है। इसमें अधिकतर नाटक संवाद प्रधान रहते है या बेहतरीन संगीत के माध्यम से अपनी पटकथा को प्रस्तुत करते हैं। हरियाणा कला परिषद् मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर में ट्रेजर आर्ट एसोसिएशन, मणिपुर के कलाकारों ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से स्नातक जॉय मैसनम के निर्देशन में खूबसूरत नाटक ‘द जर्नी ऑफ सोरो’ का मंचन किया।
इस नाटक में संगीत और संवाद की प्रधानता न होते हुए आंगिक अभिनय से कलाकारों ने दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों के मंच पर आने से लेकर प्रस्तुति खत्म होने तक नाटक किसी फिल्म या टेलीविजन के धारावाहिक से कम प्रतीत नहीं हुआ। भरतमुनि रंगशाला में बैठे सभी लोग एकाग्रचित्त होकर नाटक को देखते रहे। कलाकार भी पूरी तल्लीनता से अपनी बात सबसे कह गए। एक घ्ंण्टे में कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से किसानों की दयनीय हालत को सबके सामने प्रस्तुत कर दिया। नाटक प्रस्तुत करने का ढंग इतना निराला था कि सभागार में उपस्थित सभी दर्शक तालियां बजाने के लिए मजबूर हो गए।
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नाममात्र के संवाद के साथ केवल आंगिक अभिनय से कलाकारों ने एक किसान के बुरे वक्त को दर्शाया। किसान के मुंह से निकली जीभ कहती है कि भूख से कोई नहीं जीत सकता और पानी की किल्लत सहते लोगों के लिए जिंदगी और मौत के बीच बस एक बूंद का फासला है, जैसे मार्मिक संवादों ने सभी को झकझोर कर रख दिया। खेती करते हुए पानी के लिए तरसना, बादल बनना पर बारिश न होना, मन्नतें मांगना, तंत्र विद्या का सहारा लेना जैसे सभी कृत्यों को कलाकारों ने अपने अभिनय से मंच पर जीवंत कर दिया। ‘द जर्नी ऑफ सोरो’ ने देश के हर राज्य के किसानों का दर्द बयां किया। नाटक की खास बात यह रही कि प्रत्येक दृश्य में एक अलग प्रदेश की संस्कृति और रीति-रिवाज देखने के लिए मिले।
नाटक के मंचन के दौरान आसाम का नृत्य पेश किया गया तो मणिपुर की तंत्र विद्या से लोगों को अवगत कराया गया। पानी के लिए तरसते छत्तीसगढ़ के किसान की व्यथा बयान हुईं तो साउथ अफ्रीका में होने वाले कृत्यों को भी पेश किया गया। कलाकारों के बेहतर प्रस्तुतिकरण में सहयोग दे रहा कर्णप्रिय संगीत भी दर्शकों को लुभाने में सहायक रहा। नाटक में नृत्य और शारीरिक मुद्राओं का भी समावेश रहा। लगभग 15 कलाकार जब मंच पर एक जैसी मुद्राओं में अपना पात्र निभा रहे थे तो दर्शक दीर्घा में बैठा प्रत्येक व्यक्ति तालियों से उनकी प्रशंसा कर रहा था। बीच-बीच में भावुक कर रहा नाटक सभी के दिलों में विशेष जगह बनाने में कामयाब रहा।
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नाटक के अंत में सभी दर्शकों ने अपने स्थान पर खड़े होकर देर तक तालियां बजाते हुए कलाकारों की प्रस्तुति को सराहा। कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ साहित्यकार चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि सामाजिक परिवेश पर नाटक मंचन करना सराहनीय प्रयास है। कलाकारों द्वारा दी गई प्रस्तुति ने सभी पात्रों को मंच पर जीवंत किया है। नाटक में एक-एक कलाकार ने अपनी भूमिका को बखूबी निभाया। वरिष्ठ रंगकर्मी शिव कुमार किरमिच ने भी नाटक की प्रशंसा की। नाटक के दौरान मंच संचालन विकास शर्मा द्वारा किया गया। इस अवसर पर पूर्व रजिस्ट्रार डीएम ग्रोवर, रंगआधार नाट्य संस्था के अध्यक्ष अमरदीप जांगड़ा, न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप से नरेश सागवाल, अमित चौहान, सुग्रीव मेहरा, साहिल खान, आकाश, गुरदीप, अंकित, कलाधारा संस्था से साहिल शर्मा, किशोर दत्त आदि उपस्थित रहे।
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