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कॉलेज की समस्याओं को लेकर छात्राओं ने निकाला जुलूस, डीसी दफ्तर का घेराव कर दिया धरना
- डीसी ने छात्राओं से मिलकर उनकी समस्याओं के जल्द समाधान का दिया आश्वासन
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। दयानंद महिला महाविद्यालय स्टूडेंट कौंसिल के नेतृत्व में सैंकड़ों छात्राओं ने कॉलेज की विभिन्न समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया। कॉलेज प्रशासन के खिलाफ छात्राएं सोमवार सुबह ही कक्षाओं का बहिष्कार कर सड़कों पर उतर गई। इस दौरान कॉलेज के बाहर से ही रोष मार्च निकालती हुई छात्राएं लघु सचिवालय तक पहुंची। यहां छात्राओं ने धरना देते हुए कॉलेज प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। उन्होंने मांगों के संदर्भ में उपायुक्त डा. एसएस फुलिया से मुलाकात करने की मांग की, लेकिन उपायुक्त दोपहर तक जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में व्यस्त रहे। समय न दिए जाने पर भड़की छात्राएं उपायुक्त कार्यालय में घुस गई। इसके बाद डा. फुलिया करीब 2 बजे छात्राओं से मिलने पहुंचे। उन्होंने छात्राओं की समस्याएं सुनकर जल्द समाधान कराने का आश्वासन दिया। इस दौरान लघु सचिवालय के समक्ष प्रदर्शन कर रही एक छात्रा की अचानक तबीयत बिगड़ गई। इस दौरान सहयोगी छात्राओं ने अफरा-तफरी में स्थिति संभाली।
डीएमएम स्टूडेंट कौंसिल की अध्यक्ष मधु ने कहा कि कॉलेज की विभिन्न समस्याओं को लेकर वह पिछले दो माह से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कॉलेज प्रशासन उनकी मांगों को पूरी करने की बजाय उनपर दबाव बना रहा है। कहा कि पांच माह बीतने के बाद भी आज तक कॉलेज प्रशासन ने कौंसिल को कार्यालय तक उपलब्ध नहीं कराया। जब इस संदर्भ में कई बार प्राचार्या को लिखित में शिकायत सौंप चुके है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। आरोप लगाया कि छात्राओं द्वारा चुनी गई कौंसिल के साथ कॉलेज प्रशासन भेदभाव कर रहा है। कहा कि पांच माह बीतने के बाद भी प्रशासन द्वारा आयोजित बैठक में कभी कौंसिल के शिष्ठमंडल को आमंत्रित नहीं किया गया। जब छात्राओं के हितों की आवाज उठाते हैं तो निष्कासन करने की धमकी दी जाती है। वहीं उपप्रधान अंजु सैनी, सचिव इतिका व महासचिव अकांक्षा ने कहा कि वैसे तो सरकार बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ नारा देकर हौसंले बुलंद कर रही है, लेकिन यहां के कॉलेज प्रशासन बेटियों की अनदेखी कर रहा है। आरोप लगाया कि प्रशासन ने गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेने के बाद कॉलेज पहुंची छात्रा प्रियंका को सम्मान नहीं दिया। इसके अलावा छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए कॉलेज में कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाता। कहा कि जब छात्राओं से फंड इक्टठा किया जाता है, सुविधाएं क्यों नहीं दी जा रही। जब छात्राएं अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरी तो कॉलेज प्रशासन द्वारा परिसर में ही उनको बंधक बनाया गया। उन्होंने कॉलेज प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि शीध्र उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वह आंदोलन करने को मजबूर होगी, जिसकी जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन की होगी।
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ये है मुख्य मांगें
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-कॉलेज परिसर में स्टूडेंट कौंसिल को कार्यालय उपलब्ध कराया जाए।
-कॉलेज परिसर में शिकायत पेट्टी लगाई जाए।
-कॉलेज परिसर के सभी शौचालयों की नियमित रूप से साफ-सफाई की जाए।
-छात्राओं के लिए सभी कक्षाओं में बैंच उपलब्ध कराए जाए।
-कॉलेज में व्यवस्थित ढंग से कंप्यूटर लैब बनाई जाए।
-कॉलेज में छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए कार्यक्रम आयोजित कराने सहित अन्य मांगें।
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कॉलेज प्रशासन ने दी अभिभावकों को सूचना
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इधर, कॉलेज प्रशासन ने प्रदर्शन कर रही छात्राओं के सूचना अभिभावकों को फोन कर दी। सूचना मिलने के बाद अभिभावक कॉलेज पहुंचे तो कई लघु सचिवालय पहुंचे। इस दौरान छात्राओं ने दोपहर करीब 2 बजे तक उपायुक्त कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। इस दौरान मांगें पूरी न होने पर आंदोलन छेड़ने का ऐलान कर दिया।
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छात्राओं के आरोप निराधार: प्राचार्या
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प्राचार्या डा. विजेश्वरी शर्मा ने कहा कि कौंसिल के पदाधिकारियों का आरोप निराधार है। छात्राओं की समस्याएं सुनने के अलावा समय-समय पर जरूरी कार्यक्रम भी कराए जाते है। तीन दिन पहले ही छात्राओं के साथ विभिन्न मुद्दों पर बैठक के दौरान मंथन किया गया था। इनकी समस्याओं का समाधान निकाला गया था। हाल ही में गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेने वाली छात्रा के लिए 18 फरवरी को सम्मान समारोह करने का निर्णय लिया था, लेकिन छात्राएं प्रदर्शन में उतर गई। यदि छात्राओं को किसी प्रकार की समस्या थी तो वे उनसे मुलाकात कर सकते थे।