कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। शाहाबाद व करनाल के भादसों स्थित शुगर मिल पर गन्ना किसानों का करीब 153 करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है। इसमें शाहाबाद शुगर मिल पर 72 करोड़ रुपये तो बादसों शुगर मिल पर करीब 81 करोड़ रुपये शामिल है। भुगतान न होने से जहां किसान खफा है वहीं बुधवार को शाहाबाद क्षेत्र के किसानों व भाकियू नेताओं ने गन्ने के भुगतान व स्थाई रूप से एमडी की नियुक्ति को लेकर शुगर मिल परिसर में पंचायत की तो वहीं बाजारों में जुलूस निकाल कर प्रदर्शन किया।
सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए देवी मंदिर रोड से चलकर शहर के विभिन्न बाजारों से जुलूस निकालते हुए तहसील कार्यालय पहुंचे और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। इससे पहले भी किसान सोमवार को सड़कों पर उतरे थे और उन्होंने जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा था, जिसमें उन्होंने जल्द भुगतान कराए जाने की मांग की थी, इसके बावजूद प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली तो बुधवार को किसान व भाकियू नेता शुगर मिल परिसर में कृष्ण कुमार कलालमाजरा जिलाध्यक्ष भाकियू के नेतृत्व में इकट्ठा हुए और बैठक का आयोजन कर अपनी समस्याओं बारे विचार विमर्श किया। कृष्ण कुमार ने कहा कि शुगर मिल के पास किसानों का लगभग 72 करोड़ रुपये बकाया हैं और शुगर मिल प्रशासन इसके लिए गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि इस समय किसानों को पैसे की जरूरत है, क्योंकि इस समय धान की रोपाई हो रही है जिसके लिए खाद व दवाई लेनी है तथा गन्ने की खुदाई व परवरिश भी करनी है जिसकी लेबर भी देनी है। अनेक किसानों की गन्ना छिलाई की लेबर देना भी बाकी है तथा किसानों ने अपना फसली ऋण चुकाना है, जिसके कारण किसान आर्थिक व मानसिक रूप से परेशान है।
उन्होंने कहा कि इस समय शाहाबाद शुगर मिल में मशीनरी की रिपेयर होने का काम शुरू होने वाला है, जिसके लिए मिल में स्थाई प्रबंध निदेशक की नियुक्ति जरूरी है। मौजूदा प्रबंध निदेशक के पास दो स्थानों का कार्यभार होने के कारण मिल की मरम्मत व सही सामान की खरीद नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि मरम्मत के सामान खरीद में भारी परेशान होगी व भ्रष्टाचार होने की आशंका है, जिससे अगले साल सीजन में किसानों को मिल सही न चलने के कारण भारी परेशानी होगी।
बैठक के पश्चात किसानों व भाकियू नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल गुरनाम सिंह चढ़ूनी की अगुवाई में प्रबंध निदेशक कार्यालय पहुंचे और मिल प्रशासन से गन्ना भुगतान जल्द करने की मांग की। भाकियू नेता गुरनाम सिंह ने मिल प्रबंधन को सुझाव दिया कि जल्द से जल्द चीनी का कोटा बेचा जाए और प्राथमिकता के आधार पर मिल प्रशासन अपने ऋण चुकता करने की बजाय किसानों के भुगतान को प्राथमिकता दी जाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए शाहाबाद तहसीलदार दिनेश कुमार ढिल्लो भी मौके पर पहुंच गए। इस अवसर पर भाकियू प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस, तेजपाल जंधेडी, पवन शाहाबाद, रामकुमार, सुखविन्द्र पाडलू, अनिल तनेजा, जयपाल चढ़ूनी सहित अनेक किसान मौजूद थे।
किसान गुजर रहे मानसिक परेशानी से : बैंस
भाकियू प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि शाहाबाद सहकारी चीनी मिल का पिराई सत्र करीब 3 माह पहले खत्म हो चुका हैं, लेकिन अभी तक किसानों द्वारा डाले गए गन्ने का करीब 72 करोड़ का भुगतान रुका हुआ है। गन्ने की पेमेंट न होने के कारण किसान मानसिक व आर्थिक परेशानी से गुजर रहा है। पेमेंट न होने के कारण गन्ने की छिलाई और उसके बाद धान रोपाई का खर्च घर से करके बैठा है। भुगतान न होने के कारण किसानों के काम रुके हैं इसलिए गन्ने का भुगतान जल्द से जल्द करवाया जाए।
20 तक कर दिया जाएगा 12 करोड़ का भुगतान : गिरीश
शुगर मिल के एमडी गिरीश कुमार ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि 20 जुलाई तक 12 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को कर दिया जाएगा और कहा कि चीनी मिल प्रशासन जल्द से जल्द चीनी के कोटे को बेचने का प्रयास कर रही है ताकि किसानों को भुगतान किया जा सके। उन्होंने बताया कि इस बार शुगर मिल ने 282 करोड़ रुपये का गन्ना खरीद किया है, जिसमें से 210 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को बैंकों के माध्यम से किया जा चुका है। उन्होंने कि किसानों का शुगर मिल पर 72 करोड़ रुपये बकाया है ।