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तीन एकड़ जमीन पर कब्जे का मामला ं

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धन्ना भगत सिंह पब्लिक स्कूल की तीन एकड़ जमीन पर आठवीं बार भी कब्जा नहीं दिला सका प्रशासन
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। नाभिकमल ठाकुरद्वारा मंदिर की धन्ना भगत पब्लिक स्कूल परिसर में स्थित तीन एकड़ जमीन पर जिला प्रशासन बुधवार को आठवीं बार भी कब्जा नहीं दिला सका। प्रशासन महज पैमाइश तक ही सीमित रह गया। अधिकारियों ने इस जमीन पर संबंधित पक्ष को भी जेसीबी या ट्रैक्टर आदि चलाने की अनुमति नहीं दी। दोनों पक्षों में टकराव की आशंका से पुलिस बल और अमले के साथ पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी घबराए नजर आए। यही कारण रहा कि अधिकारियों का यह अमला पैमाइश की औपचारिकता कर लौट गया। इस दौरान मंदिर के महंत और उनके समर्थकों की अधिकारियों से बहस भी हो गई। सभी ने प्रशासन पर दबाव में काम करने के आरोप लगाए और मामले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में ले जाने का ऐलान किया।
इसस पहले बुधवार सुबह तक प्रशासन कब्जा दिलाने नहीं पहुंचा तो मंदिर के महंत विशालदास मणी, डेरा बाबा गुुदड़ के महंत हनुमानदास, ठाकुरद्वार तीर्थ दयालपुर के महंत आशीषदास आदि जिला उपायुक्त के पास पहुंच गए। सभी ने कार्रवाई न होने पर रोष व्यक्त किया। इस पर उपायुक्त ने शाम तक कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद शाम करीब चार बजे ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार परमिंद्र सिंह और कानूनगो सुभाष चंद के नेतृत्व में पुलिस बल और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंच गया। वहां पहुंचने बाद भी बहुत देर तक सभी अधिकारी बाहर ही खड़े रहे। बाद में अंदर जाकर जमीन की पैमाइश की। इसी बीच महंत ने कब्जा लेने के लिए जेसीबी और ट्रैक्टर आदि मंगवा लिए। इस पर अधिकारियों ने इन सब मशीनाें को जमीन के अंदर ले जाकर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। अधिकारियों का यह रुख देख महंत और अन्य लोग भड़क गए। वे सभी जेसीबी से अपने अनुसार खुदाई कराने पर अड़ गए। इस पर अधिकारियों से उनकी बहस हो गई। महौल गरमाता देख अधिकारी कुछ ही देर बाद पूरे अमले के साथ वहां से रवाना हो गए। हालांकि, इस कार्रवाई के दौरान दूसरे पक्ष जाट समाज की ओर से कोई आपत्ति नहीं की गई थी, लेकिन अधिकारियों के जाने तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा। बता दें कि मंदिर और जाट सभा के बीच इस जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष ही फैसला मंदिर के हक में दिया है। इसके बाद भी प्रशासन कब्जा नहीं दिला सका है। मंदिर के महंत ने स्थानीय अदालत में अर्जी दी थी। इस पर अदालत ने 23 फरवरी तक कब्जा दिलाने के आदेश दिए हुए हैं।
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मेरा काम लॉ एंड आर्डर बनाए रखना है : परमिंद्र
ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार परमिंद्र सिंह का कहना है कि उनका काम यहां महज लॉ एंड आर्डर बनाए रखने का है। कब्जा दिलाने का काम संबंधित विभाग के कानूनगो सुभाष चंद का है। उनकी विभाग ने ड्यूटी लगाई है। कब्जा न दिलाने के मामले में कानूनगो कुछ भी जवाब नहीं दे पाए और तत्काल ही वहां से निकल गए।

डीसी का दावा गलत, नहीं दिलाया कब्जा : महंत
नाभिकमल ठाकुरद्वारा मंदिर के महंत विशाल दास मणी और अन्य ने कब्जा न मिल पाने पर आरोप लगाए कि प्रशासन जाट समाज के दबाव में है। डीसी का ये कहना कि हमें कब्जा दिलवा दिया गया है, क्योंकि कोर्ट में हमने कहा था कि जमीन खाली करवाकर हमें दी जाएगी। प्रशासन जमीन पर बना कमरा और अन्य निर्माण नहीं हटाया है। केवल पैमाइश की है। इसे हम कब्जा दिलाना नहीं मानेंगे। इस तीर से उन्हें कब्जा दिलाने की बजाए दबाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन की इस कार्यशैली और अदालत के फैसले को भी लागू न करवा पाने को लेकर वे हाईकोर्ट में दस्तक देंगे।

स्कूल में मिले कुछ सुरक्षा कर्मी और प्राचार्य
जब तक जमीन की पैमाइश की जाती रही, तब तक स्कूल आरैर जाट सभा की ओर से कोई नहीं पहुंचा, लेकिन कुछ देर बाद ही स्कूल से प्राचार्य और कुछ सुरक्षा कर्मी बाहर निकल आए। उन्होंने अधिकारियों के जाते ही फिर से गेट बंद कर दिया।
पुलिस कर्मियों को लगाना पड़ा अपनी ही वैन को धक्का
कब्जा दिलाने गए पुलिस कर्मियों के पसीने उस समय छूट गए जब ड्यूटी मजिस्ट्रेट और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंच गए। वहां उनकी वैन केयू थर्ड गेट पुलिस चौकी के पास खराब हो गई। पुलिस कर्मियों ने धक्का लगाकर वैन को स्टार्ट किया और मौके पर पहुंचे। तब तक अधिकारी उनका इंतजार करते रहे।
कई बार किए प्रयास, हर बार रहे विफल
इस जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने पहले भी कई बार प्रयास किए हैं, लेकिन हर बार विफल रहा है। बता दें कि मंगलवार को भी 300 पुलिस कर्मी दिन भर ड्यूटी मजिस्ट्रेट का इंतजार कर लौट गए थे। इससे पहले नौ फरवरी को भी प्रशासन जमीन पर कब्जा नहीं दिला पाया था। दिन भर पुलिस बल पुख्ता प्रबंधों के साथ इंतजार करता रहा। इस पर प्रशासन ने न्यायाधीश रेनू नागर की अदालत में मामला संवेदनशील होने का हवाला दिया था। इस पर अदालत ने प्रशासन को 23 फरवरी तक कार्रवाई के आदेश दिए थे। यह भी बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में अपने पक्ष में आदेश मिलने के बाद मंदिर के महंत और अन्य संबंधित लोग प्रशासन की ओर से कब्जे की कार्रवाई न हो पाने के बाद डीसी से मिल चुके हैं। डीसी ने पहले दो फरवरी और बाद में पांच फरवरी का समय दिया। पांच फरवरी को भी प्रशासन कब्जा दिलाने नहीं पहुंचा तो महंत और अन्य लोग फिर से डीसी के पास पहुंचे। इस पर डीसी ने नौ फरवरी तक कार्रवाई का आश्वासन दिया। अदालत के निर्देश पर 23 फरवरी तक कब्जा दिलाने का दावा किया गया था।
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महंत को तो दिलाना ही नहीं है कब्जा, आदेश मंदिर ट्रस्ट के लिए : डीसी
डीसी सुमेधा कटारिया का कहना है कि जो महंत कब्जा नहीं दिलाने की बात कह रहे हैं, उसे प्रशासन को कब्जा दिलाना ही नहीं है। कब्जा दिलाने के आदेश मंदिर ट्रस्ट के लिए दिए गए हैं। कोर्ट के मामले और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार प्रशासन ने आज प्राचीन नाभिकमल ठाकुरद्वारा मंदिर ट्रस्ट को जमीन पर कब्जा दिलाने की प्रक्रिया पूरी कराई है। कानूनी प्रक्रिया में रहकर यही कार्रवाई की जानी थी। जमीन की पैमाइश करवाकर उन्हें कब्जा दिला दिया है। इस जमीन में ट्रैक्टर और जेसीबी चलाने के लिए प्रशासन की कार्रवाई नहीं बनती। यह कब्जा लेने वाला ही तय कर सकता है कि संबंधित जमीन पर उसे ट्रैक्टर चलाना है या कोई ओर कार्य करना है। प्रशासन ने मामले को बेहद शांतिपूर्ण ढंग से निपटा लिया है। इसके लिए वह कई दिनों से प्रयास कर रही थीं। मामला शांतिपूर्ण निपटा।
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