अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
हाल ही में सरकारी नौकरियों को लेकर हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से जारी किए गए आंकड़ों में सरकार ने बाजीगरी की है। यह आंकड़े लोगों को गुमराह करने वाले है। ये हकीकत के धरातल पर टिक नहीं पा रहे। यह आरोप अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने लगाए। वह वीरवार को जाट धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों की पोल खोलने के लिए अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति शुक्रवार को आयोग को एक सैंपल रिपोर्ट सौंपेगी। यह सैंपल रिपोर्ट प्रदेश के छह जिलों से एकत्रित की गई है। करीब यही स्थिति सभी जिलों की है। उन्होंने बताया कि आंकड़े जारी करने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जातिगत तौर पर जारी किए गए आंकड़ों में पूरी वास्तविकता नहीं है। जो सिपाही के तौर पर भर्ती होने के बाद बड़े स्तर पर पहुंचे हैं, तो उन्हें बड़े स्तर पर ही गिना गया है। गरीब और आम लोगों से जातिगत तौर पर कितने युवा नौकरियों में पहुंचे हैं, यह स्पष्ट नहीं किया गया है। एक समाज मलाईदार पदों पर आसीन है, जबकि हर छोटे पद पर जाट समाज के युवा भर्ती होने के लिए तैयार हो जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाए कि सरकार जातिगत तौर पर समाज को बांटने में लगी है। हर सरकार यही खेल जनता के साथ खेलती है। लोगों को सरकार और राजनीतिक पार्टियों की इस साजिश को समझना होगा।
आरक्षण के दौरान दंगे चुनाव जीतने की साजिश
यशपाल मलिक ने जाट धर्मशाला में कुरुक्षेत्र, अंबाला और यमुनानगर के पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि जाट आरक्षण संघर्ष के दौरान सरकार ने सोची समझी साजिश के तहत दंगे करवाए, ताकि चुनाव में इसका फायदा उठाया जा सके। सरकार ने इस आड़ में जातिगत भेदभाव बढ़ाने का प्रयास किया। सांसद राजकुमार सैनी और जाट समाज के कुछ लोगों को सरकार ने प्रायोजित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की साजिश से बचना होगा। सभी समाज के लोगों को एकजुट होते हुए भाईचारा कायम रखना होगा। बैठक को समिति के प्रदेश अध्यक्ष सूबे सिंह, अशोक बल्हारा, कृष्ण हुड्डा, सुरेश कुमार, रामकरण आदि पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया। उन्होंने बलिदान दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाने का आह्वान किया।
देश के 175 जिलों में मनाया जाएगा बलिदान दिवस
यशपाल मलिक ने बताया कि जाट आरक्षण के दौरान शहीद हुए युवाओं की याद में 18 फरवरी को देश के 175 जिलों में बलिदान दिवस मनाया जाएगा। इसके लिए तैयारी पूरी की जा रही है। उन्होंने उपस्थित पदाधिकारियों से आह्वान किया कि जिला स्तर पर बलिदान दिवस उत्साह के साथ मनाएं। इसमें जाट के साथ-साथ अन्य समाज को भी शामिल किया जाए।
धर्मशालाएं बनी ताश खेलने के अड्डा
यशपाल मलिक ने कहा कि चौधरी छोटू राम और देवीलाल जैसे महापुरुषों ने हमें स्कूल दिए, लेकिन हम आने वाली पीढ़ी को धर्मशालाएं दे रहे हैं। धर्मशालाएं ताश खेलने के अड्डे बन गई हैं। हमें शिक्षण संस्थानों पर अधिक जोर देना चाहिए। धर्मशालाओं में भी हमारे समाज के युवा सड़कों पर भटक रहे हैं। दूसरे राज्यों के लोग भंडारे में भोजन कर रहे हैं। हमें रोहतक में बनाए संस्थान को मजबूत करने के साथ जिला स्तर पर युवाओं को पढ़ाई के लिए अधिक से अधिक सुविधाएं मुहैया करवानी चाहिए।