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आप ईमानदार, नीति और नीयत खरी, मगर खत्म नहीं हुआ भ्रष्टाचार : संघ

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र।
संघ की दहलीज पर दस्तक देकर सीएम ने सरकार का फीडबैक आधी रात तक लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल की ईमानदार छवि और उनकी योजनाओं के प्रति संघ की एक लॉबी पूरी तरह से संतुष्ट दिखी, लेकिन भ्रष्टाचार पर नकेल नहीं लगने, कार्यकर्ताओं के प्रति सांसद और विधायकों की बेरुखी से संघ कार्यकर्ता खिन्न निजर आए। इस मौके पर अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती के बजट का मुद्दा भी सीएम के समक्ष रखा गया। संभावना जताई जा रही है कि इसी भड़ास को बाहर निकालने के लिए बेहद शांत माहौल में संघ के महत्वपूर्ण कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेने के लिए कुरुक्षेत्र स्थित विद्या भारती में यह बैठक रखी गई थी।
शनिवार को जनता दरबार के बाद संघ दरबार की तैयारी हुई। इसके लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अलग-अलग आयामों से जुड़े चुनिंदा पदाधिकारियों को न्योता दिया गया। रात करीब पौने 10 बजे कुरुक्षेत्र सलारपुर रोड स्थित गीता निकेतन आवासीय परिसर स्थित विद्या भारती के सभागार में बैठक शुरू हुई। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक कार्यकर्ता से उनकी और परिवार की कुशलक्षेम जानी। इसके बाद उन्होंने एक-एक कर सभी पदाधिकारियों से सरकार की गतिविधियों के बारे में राय ली। कह सकते हैं कि मुख्यमंत्री का इस बैठक को बुलाने का मुख्य उद्देश्य भी यही था कि वह जनता की अपेक्षाओं पर हरियाणा सरकार कितनी कारगर साबित हुई है, इसका फीडबैक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ताओं से लेना चाहते थे। बैठक में सामने आया कि आमजन और संघ की कसौटी पर सरकार की नीयत और नीति एकदम खरी है, लेकिन कार्यकर्ताओं में अनदेखी से निराशा है। संघ के पदाधिकारियों ने सीधे तौर पर सांसद और विधायकों को टारगेट किया। उन्होंने सीएम को बताया कि कार्यकर्ताओं की जायज काम में भी अनदेखी की जाती है। दावा किया गया कि मौजूदा शासन-प्रशासन में भ्रष्टाचार खत्म हो चुका है। इस पर संघ पदाधिकारियों ने आपत्ति जताई। स्वयंसेवकों का कहना था कि अभी भ्रष्टाचार कायम है। संघ पदाधिकारियों ने सीएम ने सीएम को दो टूक कहा कि सरकार ने अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2017 के लिए भरपूर बजट दिया। इसके बावजूद कुरुक्षेत्र को ज्यादा लाभ नहीं मिला।
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नहीं गया गीता महोत्सव का अच्छा संदेश
बैठक में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में सरकार ने करोड़ों का बजट दिया था, लेकिन गीता जन्मस्थली ज्योतिसर और सन्निहित सरोवर पर उस बजट की रंगत नहीं दिखी। यह मामला मुख्यमंत्री के समक्ष संघ के कुछ पदाधिकारियों ने रखा। कहा कि भारीभरकम खर्च के बावजूद इस बार गीता जयंती का संदेश अच्छा नहीं गया। गौरतलब है कि इस बार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के टेंडरों से लेकर ढाई करोड़ के पंडाल और ढाई करोड़ के लाइट एंड साउंड सहित अन्य प्रबंधों में गड़बड़ी सामने आई थी। ये मामले पूरे महोत्सव में छाए रहे थे। भाजपा और संघ का एक धड़ा भी इससे नाराज था। रात करीब पौने 12 बजे तक चली इस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने पूरी सहजता से तमाम बातों को सुना। बैठक के दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति को तो दूर मंत्रियों तक के प्रवेश को प्रतिबंधित किया गया था। यहां तक की सीएम सिक्योरिटी की गाड़ियां भी स्कूल प्रांगण से बाहर मेन रोड पर खड़ी रहीं।
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अमर उजाला के सवाल पर सीएम बोले कुंभ के स्तर पर मनेगी गीता जयंती
सरकार ने 2016 और 2017 में गीता महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप दिया है। अब गीता महोत्सव-2018 को कुंभ मेले की तर्ज पर आयोजित किया जाएगा। इससे इस महोत्सव में विभिन्न देशों, संस्थाओं और आमजन की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकेगी। मुख्यमंत्री ने यह जानकारी अमर उजाला के सवाल के जवाब में दी। दरअसल उनसे पूछा गया था कि राज्य सरकार पिछले दो वर्षों से कुरुक्षेत्र में गीता जयंती को अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के रूप में आयोजित कर रही है, लेकिन इसका अंतरराष्ट्रीय स्वरूप सामने नहीं आया है। दूसरी ओर हरियाणा के सूरजकुंड मेले में इस साल भी करीब 40 देशों की भागीदारी की सूचना है। मुख्यमंत्री मनोहरलाल से इस पर बताया कि आगामी गीता जयंती महोत्सव को लेकर लेकर अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक में पिछले महोत्सव और आगामी महोत्सव पर विचार किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुरुक्षेत्र को विश्वमानचित्र पर लाने के लिए उन्होंने श्रीकृष्णा सर्किट के तहत कुरुक्षेत्र के तीर्थ और पर्यटन स्थलों को विकसित करने की योजना बनाई है। इस योजना के लिए 95 करोड़ रुपये का अनुदान जारी हो चुका है।
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