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अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र।
ब्रह्मसरोवर के पावन तटों पर भारतीय संस्कृति की महक को दूर-दूर तक महसूस किया जा रहा है। इस संस्कृति की महक का एहसास करने के बाद लोग अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की ओर खिंचे आ रहे है। इस महोत्सव में शिल्पकार अपनी शिल्पकला से पर्यटकों को मोहित कर रहे है, तो विभिन्न प्रदेशों के लोक कलाकार पर्यटकों का मनोरंजन कर रहे है। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के क्राफ्ट और सरस मेले के छठे दिन सुबह और शाम के समय दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों का हिमाचल, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के लोक कलाकारों ने मनोरंजन किया।
उत्तरी तट पर राजस्थानी लोक कलाकार कच्ची घोड़ी नृत्य की प्रस्तुती दे रहे थे, तो उत्तर पश्चिमी तट पर बीन-बांसुली की धुन पर लोक कलाकार पर्यटकों को आकर्षित कर रहे थे। ब्रह्मसरोवर तट के चारों तरफ किसी न किसी प्रदेश के कलाकर, बाजीगर, बहरूपिए भी पर्यटकों को लुभा रहे थे। बुधवार को इस शिल्प और सरस मेले की रौनक को बढ़ाने का काम विभिन्न स्कूलों से आए हजारों विद्यार्थियों ने किया। उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने महोत्सव के शिल्प और सरस मेले का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को जांचा और कार्यक्रमों की तैयारियों का जायजा भी लिया।
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लोक कला बनी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र
शिल्प मेले के छठे दिन चारों तरफ शिल्पकला की दुकानों पर पर्यटक खरीददारी कर रहे हैं। यह दुकानें भारतीय शिल्पकला के सौंदर्य को भी चरितार्थ कर रही हैं। राजस्थान की कठपुतलियां, बनारस की साड़ियां, आसाम की बांस से बनी टोकरियां भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। कुरुक्षेत्र निवासी सुधा सैनी और इशिता का कहना है कि दीपावली से ज्यादा इस महोत्सव का इंतजार रहता है।

डीएलएसए ने गीता महोत्सव पर लगाई प्रदर्शनी
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गीता महोत्सव में लोगों को कानून के प्रति जागरूक करने के लिए प्रदर्शनी आयोजित कर रहा है। डीएलएसए की प्रदर्शनी के समक्ष कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक से लोगों को कानून के प्रति जागरूक किया। यह प्रदर्शनी तीन दिसंबर तक लगेगी। इस प्रदर्शनी के लिए पैनल के अधिवक्ताओं और पीएलवी की डयूटी लगाई हैं।

ब्रास की कलाकृतियों ने दिलवाया दक्षता अवार्ड
क्राफ्ट मेले में स्टाल नंबर 183 पर पहुंचे अलीगढ़ के राजकुमार को सरकार ने ब्रास की कलाकृतियां बनाने पर दक्षता अवार्ड दिया है। मेले में पहुंचने वाले पर्यटक उनकी कलाकृतियों को पसंद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह लगभग 20 वर्षों से पीतल की कलाकृतियां बना रहे हैं। उन्होंने 200 किलो पीतल से शेर की प्रतिमा बनाई है। इसके साथ-साथ पूरी बैल गाड़ी पर पीतल की नक्काशी की है। गीता महोत्सव में पर्यटकों की मांग पर पीतल के बने डोर बैल, टॉवल हैंगर, वॉल हैंगिंग, कॉर्नर, चैस सैट, राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं भी लाए हैं। इस बार मेले में पीतल की हुरली भी लाएं है।

बाल भवन के बच्चे पहुंचे मारकंडेश्वर मंदिर
बाल भवन पब्लिक स्कूल के बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण के लिए धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल शाहाबाद मारंडेश्वर मंदिर का भ्रमण कराया गया। स्कूल की प्रिंसिपल स्वाति पहावा ने कहा कि किसी भी कार्य में श्रेष्ठतम सफलता के लिए समर्पण आवश्यक हैं। यह संदेश हमें महर्षि मारकंडे के जीवन से मिलता हैं। बच्चों ने मंदिर में भगवान शिव और महर्षि मारकण्डेश्वर के दर्शन कर माथ टेका। इस अवसर पर बच्चों ने पार्क परिसर में स्थित झूलों पर खुब मस्ती की। इस मौके पर स्कूल स्टाफ अनीता, सुनीता, सर्वजीत, ममता, शशि, रजनी, सपना आदि मौजूद रहे।

ब्रहमसरोवर पर पहली बार हुई आरती
ब्रह्मसरोवर के पुरुषोमतपुरा बाग में बनारस की तर्ज पर पहली बार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के पावन पर्व पर आरती की गई। इस आरती में उपायुक्त सुमेधा कटारिया, अतिरिक्त उपायुक्त धर्मवीर सिंह, भाजपा के नेता धुम्मन सिंह किरमच, जिला बार एसोसिऐशन के प्रधान मनोज कौशिक आदि ने आरती में भाग लिया। गीता महोत्सव के छठे दिन ब्रह्मसरोवर के पुरुषोतमपुरा बाग में बनारस से विशेष तौर पर मंगवाई गई आरती से रस्म अदा की गई। इस मनोरम दृश्य को देखने के लिए दूर-दराज से पर्यटक पहुंच गए। भाजपा के नेता धुम्मन सिंह किरमिच ने बताया कि इस महोत्सव में पहली बार बनारस की तर्ज पर आरती की गई है। आने वाले समय में 11 हजार बत्तियों वाली आरती की जाएगी।

17 माह में माह तैयार की पश्मीना शॉल
शिल्पी मंसूर अहमद ने पशमीना से 17 महीनों में एक शॉल तैयार की है। इस शॉल को बनाने पर शिल्पी को वर्ष 2012 में राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। पशमीना की इस शॉल को दिल्ली म्यूजियम में भी सजाया गया हैं। शिल्पकार मंसूर अहमद पहली बार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि लेह लद्दाख में पशमीना की शॉल बनाने का पुश्तैनी काम हैं। पशमीना और पेपर वायर पर तैयार किए गए डिजाइन से 700 रुपये से लेकर 35 हजार रुपये तक की शाल, गर्म सूट, स्टॉल लेकर आए हैं। लेह लद्दाख वे कन्नी शाल तैयार करते हैं। इनकी कीमत 1 लाख 30 हजार रुपये से लेकर 4 लाख 50 हजार रुपये तक की होती हैं।
पुश्तों से कर रहे हैं कांथा वर्क
वेस्ट बंगाल का प्रसिद्ध कांथा वर्क गीता महोत्सव में महिला पर्यटकों को लुभा रहा है। इस शिल्पकला को वेस्ट बंगाल के शिल्पकार प्रोबोल रॉय पिछले चार सालों से कुरुक्षेत्र में ला रहे हैं। इस शिल्पकार को कांथा वर्क की बनी एक साड़ी को तैयार करने में सात महीनों का समय लग जाता हैं। शिल्पकार प्रोबोल राय का कहना है कि पुश्तों से उनका परिवार कांथा वर्क और अन्य डिजाइनों की साड़ियां तैयार कर रहा है।
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विश्व के 26 देश लेंगे ग्लोबल चैंटिंग में भाग
गीता महोत्सव में भारत देश के साथ पूरे विश्व के 22 देश ग्लोबल चैटिंग में भाग लेंगे। 18 हजार विद्यार्थियों द्वारा अष्टादश श्लोक गीता पाठ 30 नवंबर को थीम पार्क में किया जाएगा। यह जानकारी उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने स्थानीय नीलकंठ यात्री निवास में बंगलादेश से आए प्रशासनिक अधिकारियों को दी। उन्होंने कुरुक्षेत्र के आध्यात्मिक, पौराणिक और धार्मिक इतिहास के बारे में भी बताया। उपायुक्त ने बंगलादेश से आए प्रशासनिक अधिकारी को कुरुक्षेत्र के 48 कोस में पड़ने वाले तीर्थ स्थलों के साथ प्रशासनिक कार्य शैली के बारे में भी बताया। बंगलादेश से आए प्रशासनिक अधिकारियों ने उपायुक्त कार्यालय, ई-दिशा केंद्र, शक्ति पीठ मां भद्रकाली मंदिर, कृष्ण संग्रहालय, पैनोरमा, ज्योतिसर आदि स्थानों का भ्रमण किया। इस मौके पर अतिरिक्त उपायुक्त धर्मबीर सिंह, एसडीएम वत्सव कौशिक, एसडीएम सतबीर कुंडू, सीटीएम कंवर सिंह, एचसीएस अधिकारी सतीश कुमार आदि मौजूद थे। बंगलादेश से आए प्रशासनिक अधिकारियों को उपायुक्त ने बुधवार को स्थानीय नीलकंठ यात्री निवास में पवित्र ग्रंथ गीता भेंट की। बंगलादेश से आए प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से आशीफ मोहम्मद ने उपायुक्त को धन्यवाद देते हुए स्मृति चिह्न भेंट किया।
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