गीता केवल पुस्तक नहीं बल्कि मानव जीवन का वास्तविक सार है : ब्रह्मचारी
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
भारत साधु समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और जयराम संस्थाओं के अध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने बताया कि पवित्र ब्रह्मसरोवर के तट पर तीन दशकों से गीता जयंती महोत्सव को गुरु परंपराओं के साथ आयोजित किया जाता है। गुरु देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी ने गीता जयंती उत्सव का जो पौधा विद्यापीठ में लगाया गया था, आज उसकी गूंज पूरे देश में ही नहीं, विश्व के कोने-कोने में हो रही है। ब्रह्मचारी ने बताया कि वह तो गुरु परंपराओं का निर्वाह कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण के श्रीमुख से उत्पन्न हुई पावन श्री गीता के जन्मोत्सव को पूर्णतया शुद्ध और सात्विक कार्यक्रमों के साथ आयोजित किया जाता है। यही कारण है कि विद्यापीठ की ख्याति से देश-विदेश के श्रद्धालुओं के साथ शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वरानंद महाराज, जूनापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी, जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी उमाकान्तानंद, बड़ा अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद, अखाडा परिषद के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरी, महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव स्वामी रविंद्र पुरी, भूमा निकेतन के दंडी स्वामी अच्यूतानंद, हरिद्वार के महंत ऋषिश्वरानंद, हरिद्वार के महंत हठयोगी, भारत साधु समाज के प्रदेशाध्यक्ष महंत बंसी पुरी, महामंडलेश्वर शाश्वतानंद, महामंडलेश्वर ज्ञानानंद, बड़ा अखाड़े के रघुमुनि और महेश्वर दास सहित देश के कोने-कोने से संत महापुरुष पहुंच रहे है।
ब्रह्मचारी ने बताया कि इन संत महापुरुषों द्वारा गीता जयंती महोत्सव के आयोजन के वास्तविक ज्ञान के बारे में अपने तरीके से बताया जाएगा। उन्होंने कहा कि गीता को केवल पुस्तक या अध्ययन के लिए ग्रंथ माना जाना गलत है। गीता तो भगवान श्री कृष्ण की वाणी है। इसमें मानव को उतरना पड़ता है। ब्रह्मचारी ने बताया गीता तो मानव जीवन का वास्तविक सार है। इसी उद्देश्य के साथ विद्यापीठ में गीता जयंती महोत्सव कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। विद्यापीठ में अंतर्विद्यालय सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामूहिक विवाह समारोह, भागवत कथा, हास्य कवि सम्मेलन तक सभी को गीता जयंती पर आधारित किया जाता है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष युवाओं को यही संदेश दिया जाता है कि यदि वह जीवन में गीता को अपना लें तो समाज की बहुत सी समस्याओं का अपने आप अंत हो जाएगा। ब्रह्मचारी ने बताया कि हरवर्ष की भांति इस वर्ष भी गीता जयंती महोत्सव 2017 पर 28 नवंबर को गरीब कन्याओं के सामूहिक विवाह समारोह में उन सैनिकों और पूर्व सैनिकों की बेटियों को भी भागीदार बनाया जाएगा, जो किन्ही कारणों से आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इस वर्ष विद्यापीठ के पंडाल में व्यासपीठ से 24 नवंबर से 30 नवंबर तक देश विदेश में विख्यात कथावाचक कृष्ण चंद ठाकुर वृंदावन वाले संगीतमयी शैली में श्रीमद भागवत पुराण की कथा करेंगे। इसी के साथ 24 नवंबर से 30 नवंबर तक विद्वान ब्राह्मणों द्वारा गीता यज्ञ किया जाएगा। पिछले करीब 15 सालों से विद्यापीठ में आयोजित की जाने वाली राज्य स्तरीय अंतरविद्यालय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं 24 नवंबर से 27 नवंबर तक होंगी। इस वर्ष भी देश के विख्यात कवियों की मौजूदगी में हास्य कवि सम्मेलन 27 नवंबर को होगा। ब्रह्मचारी ने बताया की गीता जयंती के समापन पर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड, नगर की सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से 30 नवंबर को भव्य एवं विशाल शोभा यात्रा नगर में निकाली जाएगी। विद्यापीठ के मंदिरों का वार्षिक उत्सव समारोह दो दिसंबर को होगा। इस अवसर पर राजेंद्र सिंघल, केके कौशिक, श्रवण गुप्ता, कुलवंत सैनी, टेक सिंह लौहार माजरा, राजेश सिंगला, खरैती लाल सिंगला, डीके गुप्ता, ईश्वर गुप्ता, सुरेंद्र गुप्ता, मुनीष मित्तल, केके गर्ग, संजीव गर्ग, सौरभ चौधरी, केसी रंगा, रणबीर भारद्वाज, राजेश लेखवार शास्त्री आदि भी मौजूद थे।