कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र में शुक्रवार को जलवायु परिवर्तन और इसके प्रभाव विषय पर एक ज्ञानवर्धक पैनल डिस्कशन एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डॉ.भगवान सिंह चौधरी, अध्यक्ष भूभौतिकी विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, डॉ.एमएस. जगलान सेवानिवृत्त प्रोफेसर भूगोल विभाग, डॉ.हरदीप राय शर्मा एसोसिएट प्रोफेसर, पर्यावरण अध्ययन संस्थान, डॉ.किरण लांबा, एसोसिएट प्रोफेसर अर्थशास्त्र विभाग, प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर सुरेश कुमार सोनी, तथा शिक्षा अधिकारी जीतेंदर कुमार दास ने संबोधन किया।
इस दौरान कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए जलवायु परिवर्तन के वैज्ञानिक, भौगोलिक, आर्थिक और पर्यावरणीय पहलु ओंपर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ. भगवान सिंह चौधरी ने कहा कि पृथ्वी के संसाधनों में सभी की बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने की क्षमता है, लेकिन वे लालच को पूरा नहीं कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में हमारे लगभग 75 फीसदी ग्लेशियर पिघल सकते हैं, जो एक गंभीर चेतावनी है। उन्होंने जल-उपभोग करने वाली फसलों जैसे धान (पैडी) और चॉकलेट उत्पादन के उदाहरणों से जल संसाधन संकट पर चर्चा की तथा विद्यार्थियों से सस्टेनेबल हैबिटैट, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।
इसके पश्चात डॉ. एमएस जगली ने जलवायु परिवर्तन के ऐतिहासिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सरल रूप में समझाया। उन्होंने आइस एज, औद्योगिक क्रांति और कृषि क्रांति के कारण बढ़ती ग्रीन हाउस गैसों के प्रभाव को स्पष्ट किया तथा पेरिस एग्रीमेंट के संदर्भ में बताया कि वैश्विक तापमान को 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक न बढ़ने देना अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. हरदीप राय शर्मा ने विद्यार्थियों को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पॉल्यूशन जैसे नए प्रकार के प्रदूषण से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि विद्युत उपकरणों से निकलने वाली हानिकारक किरणें भी पर्यावरण के लिए खतरा बन रही हैं। विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया।