फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केयू के 1350 स्थाई कर्मचारियों की जेब चला नो वर्क नो पे के आदेशों का डंडा

विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो नंबर-57
विज्ञापन

शनिवार को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी सैलरी काटने की कार्रवाई का समाचार
- केयू के 1350 स्थायी कर्मचारियों की जेब चला नो वर्क नो पे के आदेशों का डंडा
- आठ माह में तीसरी अनिश्चितकालीन हड़ताल, केयू प्रशासन एक्शन मोड पर
- वेतन में से काटी गई है तीन, पांच, सात और नौ हजार की राशि
- सिर्फ वेतन काटने की कार्रवाई ही नहीं कुंटिया प्रधान सहित 17 पर कोर्ट केस भी दायर
- कुलपति ने कर्मचारियों का वेतन काटकर किया अवैधानिक कार्य- रामकुमार गुर्जर
- केयू प्रशासन ने 17 कर्मचारी नेताओं के खिलाफ कुरुक्षेत्र सिविल कोर्ट में किया केस दायर
- कुंटिया प्रधान सहित पदाधिकारियों और दस अन्य कर्मचारी नेताओं को भेजे समन
- समन में 6 सितंबर को कोर्ट में होना होगा पेश
राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र। हड़ताल पर बैठे कुंटिया कर्मचारियों पर इस बार केयू प्रशासन ने नो वर्क नो पे का डंडा चला दिया है। प्रशासन ने 1350 स्थायी कर्मचारियों की सैलरी काटी है। किसी के तीन, किसी के पांच या सात तो किसी के नौ हजार रुपये वेतन से काटे गए हैं। इसके साथ ही कुंटिया प्रधान रामकुमार गुर्जर व महासचिव नीलकंठ शर्मा सहित 17 कर्मचारी नेताओं के खिलाफ कुरुक्षेत्र सिविल कोर्ट में केस भी दायर कराया गया है। कुंटिया प्रधान सहित पदाधिकारियों और दस अन्य कर्मचारी नेताओं को समन भेजे गए हैं। जिन्हें 6 सितंबर को कुरुक्षेत्र सिविल कोर्ट में पेश होना होगा।
इससे पहले नो वर्क नो पे का आदेश मार्च 2018 में भी जारी किए गए थे। जनवरी में भी ऐसी हड़ताल के चलते केयू की व्यवस्था चरमराई थी। लेकिन इस साल तीसरी बार हड़ताल पर केयू प्रशासन का ऐसा डंडा चलेगा कि इसका अंदाजा शायद कुंटिया नेताओं और कर्मचारियों को नहीं था। शनिवार को सबसे पहले अमर उजाला ने केयू के 1350 कर्मचारियों का वेतन कटने की कार्रवाई का समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके बाद छुट्टी के दिन सैकड़ों कर्मचारी लामबंद हुए थे।
विज्ञापन


आठवें दिन में प्रवश कर चुकी है अनिश्चितकालीन हड़ताल
इधर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में चल रही कुंटिया की अनिश्चितकालीन हड़ताल आठवें दिन में प्रवेश कर गई। आज भी सभी कर्मचारियों ने विजय ग्राउंड में इकट्ठे होकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। सभी कर्मचारी नेताओं ने कर्मचारियों के जारी किए गए वेतन में से कटौती की जोरदार शब्दों में निंदा की।

रजिस्ट्रार ने किया था वेतन न काटने के लिए आश्वस्त : गुर्जर
कुंटिया प्रधान रामकुमार गुर्जर ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ओछी हरकतों पर उतर आया है। कल कुलसचिव डॉ. नीता खन्ना ने कुंटिया को आश्वस्त किया था कि कर्मचारियों के वेतन से कोई कटौती नहीं की जाएगी, लेकिन एक बार फिर विश्वविद्यालय प्रशासन ने वादाखिलाफी की और कर्मचारियों का वेतन काटकर उनके मौलिक अधिकारों का हनन किया है।

कुंटिया नेता बोले बगैर नोटिस दिए हुई वेतन में कटौती
कुंटिया नेताओं के मुताबिक नियमानुसार कर्मचारियों के वेतन में से कटौती नहीं की जा सकती, इसके लिए संबंधित कर्मचारी को नोटिस देना पड़ता है। विश्वविद्यालय प्रशासन और उसके प्रवक्ता बार-बार झूठ बोल रहे हैं कि कुंटिया की सभी मांगे मान ली गई हैं जबकि सत्य यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को जरूरत से ज्यादा समय दिया गया और जब बार-बार आगाह करने के बावजूद भी प्रशासन नहीं माना तो मजबूरन कर्मचारियों को अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लेना पडा।

दमनकारी नीति से और तेज होगा आंदोलन
कुंटिया महासचिव नीलकंठ शर्मा एवं सहसचिव रविंद्र तोमर का कहना है कि केयू प्रशासन दमनकारी नीतियों से कुंटिया के आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रहा है। इसी के चलते कुंटिया के 17 नेताओं के खिलाफ कुरुक्षेत्र के सिविल कोर्ट में एक केस दायर किया है। इन्होने चेतावनी दी कि केयू प्रशासन को चेतावनी दी कि कर्मचारियों के आंदोलन को जितना कुचलने की कोशिश करेगा, ये आंदोलन उतना और तेज होगा।
विज्ञापन


कुंटिया का आरोप हो रहा है पीएफ घोटाला, केयू प्रशासन का नहीं
कुंटिया नेताओं ने केयू प्रशासन पर आरोप लगाया कि शीघ्र ही पीएफ घोटाले के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन पर केस किया जाएगा। वहीं केयू प्रवक्ता ने कहा कि कुंटिया पीएफ घोटाले के बारे में जो बयान दे रही है वह गलत है। इसकी वास्तविकता यह है कि केयू कर्मियों के पीएफ के पैसे साल में दो बार डालती है। एक बार सितंबर में और दूसरी बार फरवरी-मार्च में डाले जाते हैं। यह पैसा ब्याज सहित दिया जाता है। यह कई दशकों से ऐसे ही दयिा जा रहा है। इससे कर्मचारियों को कोई नुकसान नहीं होता।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें