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अपनी फरियाद लगाने को आंगनबाड़ी कर्मियों ने प्रधानमंत्री को लिखा खून से पत्र

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आंगनबाड़ी वर्कर्स ने मांगी भीख और खून से लिखा पीएम को पत्र
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जहां शहर की कई महिलाओं का सम्मान किया गया, वहीं जिलाभर की आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स भीख मांग रही थीं। मांगों को लेकर हड़ताल कर रही महिला वर्करों व हेल्परों ने भीख मांगने के अलावा अपनी फरियाद प्रधानमंत्री तक पहुंचाने के लिए खून से पत्र भी लिखा। प्रदर्शन कर रह रही महिलाओं ने कहा कि जिस राज्य में महिलाओं को सड़क पर भीख मांगनी पड़े वह प्रदेश महिलाओं के शोषण को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती आंदोलन जारी रखेंगी। महिलाओं ने भीख मांग कर 600 रुपये इक्ट्ठा किए। महिलाओं ने जिला राजस्व अधिकारी चांदीराम को ज्ञापन सौंपा।
आंगनबाड़ी वर्करों ने महिला दिवस को शोषण दिवस के रूप में मनाते हुए द्रोणाचार्य स्टेडियम के आसपास के दुकानदारों से भीख मांगी। धरने का नेतृत्व कर रही जिला सचिव कलावती एवं प्रधान परमजीत ने कहा कि प्रदेश सरकार से उन्हें निराशा ही मिली है। सरकार ने उन्हें कई बार बातचीत के लिए बुलाया, लेकिन उनकी बात को अनसुना कर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार वर्कर्स का वेतन 18000 रुपये और हेल्पर का वेतन 15000 रुपये नहीं किया आंदोलन चलता रहेगा। धरने को बलजीत, सुनीता, जनसंघर्ष मंच की उषा, सेवानिवृत्त सुपरवाइजर संतोष तथा रविंद्र कौर ने भी संबोधित किया।
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कलावती ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय में भेजे जाने वाले पत्र में केंद्र सरकार से उन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित करने की मांग को लेकर सैकड़ों महिलाओं ने खून से हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र अर्बन से संबंधित महिला कर्मियों से बकाया वेतन को लेकर भेदभाव किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों की कर्मियों को जनवरी तक का वेतन दे दिया गया है, लेकिन अर्बन की कर्मियों को अक्तूबर 2017 से न तो वेतन मिला है और न केंद्रों का किराया दिया गया। आंदोलन में पिहोवा एवं शाहाबाद के ग्रामीण क्षेत्र से आई महिलाओं ने बताया कि जब भी उनका दो-तीन महीने का वेतन रुक जाता है तो वे राज्यमंत्री को शिकायत कर देती हैं, जिसके बाद उनका वेतन जारी कर दिया जाता है। ऐसे में विभाग की मंत्री कविता जैन का यह दावा कि केवल दो महीने का वेतन रुका है खोखला साबित हो रहा है।
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