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पिता के पास मिली बाल अनाथ आश्रम से भागी लड़की

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पिता के पास मिली बाल अनाथ आश्रम से भागी लड़की
- संचालक ने नहीं दी थी पुलिस को कोई शिकायत
- आश्रम में बच्चों से ढुलवाई गई ईंटे
अमर उजाला ब्यूरो
लाडवा। बाल अनाथ आश्रम से देर रात भागी दस वर्षीय बच्ची वीरवार रात को अनाजमंडी से अपने पिता खेमचंद के पास मिली। बच्ची के भागने से लेकर मिलने तक न तो बाल अनाथ आश्रम के संचालक ने इसकी शिकायत पुलिस को करने की जहमत उठाई और न ही बाल कल्याण विभाग को ही सूचित किया। वहीं बाल अनाथ आश्रम में रहने वाले बच्चों से मजदूरों की तरह काम कराने का मामला भी सामने आया है। शुक्रवार को बाल अनाथ आश्रम के संचालक शीशपाल मढान ने इस बच्ची को मीडिया के सामने पेश किया। इस दौरान लडकी पूरी तरह सहमी हुई सी बैठी रही और एक ही रट लगाती रही कि बाल आश्रम में उसे सब प्यार करते हैं और वह अपनी मर्जी से आश्रम से भागी थी। मीडिया से बात करने के दौरान बाल अनाथ आश्रम के संचालक शीशपाल मढान ने लडकी को यहां से बार-बार भागने की लत लगी करार दिया। इससे पहले जब मीडिया की टीम बाल अनाथ आश्रम पंहुची तो उस समय वहां दो बच्चे आश्रम में चल रहे निर्माण कार्यों के लिए ईंटे ढोने का काम कर रहे थे। मीडिया टीम यह देखकर हैरान रह गई कि बाल अनाथ आश्रम का भवन सडक से काफी दूर खेतों के बीच बना हुआ है और भवन से दूर-दूर तक कोई रिहायश नही है। जब इस बारें में संचालक शीशपाल से बात की गई तो उसने कहा कि बच्चों से मारपीट की बात पूरी तरह गलत है और वह किसी लालच या कमाने के लिए अनाथ आश्रम नही चला रहे बल्कि अनाथ बच्चों की सेवा के लिए दिनरात लगे हुए है। बच्चों से मजदूरों की तरह काम कराने की बात पर संचालक ने कहा कि बच्चें अपने काम के लिए ईंटे ले जा रहे होंगे, लेकिन वह इस बात का जवाब नही दे पाए कि बच्चों को ईटों से क्या काम था और पुलिस को लडकी के भागने की शिकायत क्यों नही की गई। पुलिस थानाप्रभारी निर्मल कुमार ने बताया कि बाल अनाथ आश्रम द्वारा इस मामले में कोई शिकायत नही दी गई है। दूसरी ओर शहरवासियों ने प्रशासन से बाल अनाथ आश्रम के कार्यों की जांच कराई जाने की मांग की है।
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