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शतरंज के खिलाड़ी में दिखा भोग-विलास का नशा, बड़े भाईसाहब ने दी कर्तव्य पालन की सीख

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कुरुक्षेत्र। कहानियों को पढ़ते हुए मन में ही उनका चित्रण कर उसे समझ लेना आसान होता है, किंतु कहानी को पढ़ने के बाद उसका प्रस्तुतिकरण करके दर्शकों को कहानी का मर्म समझा पाना बेहद मुश्किल होता है। इसके बावजूद रंगकर्मी अपनी मेहनत व जुनून से हर काम संभव कर लेते हैं।
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ये कहना था वरिष्ठ साहित्यकार डॉ कंवल नयन कपूर का। शुक्रवार वे देर सायं मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर में आयोजित नाटक कहन कहानी कहन के मंचन के दौरान दर्शकों को संबोधित कर रहे थे। हरियाणा स्वर्ण जयंती के अवसर पर मैक की भरतमुनि रंगशाला में रास कला मंच सफीदों के कलाकारों ने रवि मोहन के निर्देशन में मुंशी प्रेमचंद की कहानियों पर आधारित नाटक कहन कहानी कहन का मंचन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ साहित्यकार डॉ कंवल नयन कपूर ने की। इस अवसर पर हरियाणा कला परिषद् के कार्यकारिणी सदस्य शीशपाल चौहान, मैक समन्वयक मदन डागर, आनंद कुमार व नाटक निदेशक रवि मोहन ने सहयोग दिया। मंच संचालन विकास शर्मा ने किया गया।
वहीं दूसरी ओर मीर भी अपनी घिनौनी हरकतों से बाज नहीं आते थे, जिसके कारण उनकी बेगम उन्हें घर से बाहर जाकर खेलने को कह देती है। शतरंज के शौकीन दोनों खिलाड़ी एक मस्जिद में जाकर शतरंज खेलना शुरू कर देते हैं, जहां दोनों मे कहासुनी हो जाती है और दोनों एक दूसरे को मार देते हैं। इस प्रकार विलासिता का नशा दोनों की जान ले लेता है। वहीं दूसरी कहानी बड़े भाई साहब में बच्चों की आनंददायी गतिविधियों के माध्यम से खेलने की इच्छाओं को बड़े ही शानदार ढंग से प्रस्तुत किया गया। इस कहानी में दो भाईयों के आपसी संवाद के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था की नब्ज टटोलने की सफल कोशिश की गई। जहां एक ओर कलाकारों का अभिनय बेमिसाल था, वहीं मंच सज्जा व वस्त्र सज्जा ने भी नाटक को सार्थक करने में सहयोग दिया। शतरंज के खिलाड़ी कहानी में कलाकारों के उर्दू अल्फाज व नवाबी ठाठ दर्शकों को लुभाने का कार्य कर रहे थे। वहीं बड़े भाईसाहब में प्रयोग की गई नाट्य सामग्री ने भी कहानी में जान डालने का कार्य किया। दिपांश शर्मा, प्रदीप कुमार, किरन दत्त, अंकित चौधरी, गौरव सक्सेना, सोमबीर, ज्योति बाला, आशीष सैनी, चांद भारद्वाज, राहुल शर्मा, पवन भारद्वाज, शुभम, मोहित सैनी, साक्षी भारद्वाज, आशीष, अमित, रहीश, व रुचि भारद्वाज आदि कलाकारों ने नाटक मंचन में सहयोग दिया। कार्यक्रम में प्रो. संतलाल निर्वाण, शिवकुमार किरमिच, नरेश सागवाल, जगदीश शर्मा, वीरेंद्र सरोहा, मैक लेखा परीक्षण अधिकारी अजमेर संधू, मनीष डोगरा, ललित कला समन्वयक सीमा कांबोज, धर्मपाल आदि कलाप्रेमी उपस्थित रहे।
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